भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय XIX (धारा 351 से 357) · Read in English
धारा 351 – आपराधिक धमकी
(1) जो कोई, किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या सम्पत्ति को या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध हो, कोई क्षति करने की धमकी, उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि उसे संत्रास कारित किया जाए, या उससे ऐसी धमकी के निष्पादन का परिवर्जन करने के साधन स्वरूप कोई ऐसा कार्य कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो, या किसी ऐसे कार्य को करने का लोप कराया जाए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, वह आपराधिक अभित्रास करता है। स्पष्टीकरण किसी ऐसे मृत व्यक्ति की ख्याति को क्षति करने की धमकी जिससे वह व्यक्ति, जिसे धमकी दी गई है, हितबद्ध हो, इस धारा के अन्तर्गत आता है। दृष्टांत सिविल वाद चलाने से रोकने के लिए ख को उत्प्रेरित करने के प्रयोजन से ख के घर को जलाने की धमकी क देता है। क आपराधिक अभित्रास का दोषी है।
(2) जो कोई, आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(3) जो कोई, धमकी, मृत्यु या घोर उपहति कारित करने की, या अग्नि द्वारा किसी सम्पत्ति का नाश कारित करने की या मृत्यु दण्ड से या आजीवन कारावास से, या सात वर्ष की अवधि तक के कारावास से दण्डनीय अपराध कारित करने की, या किसी महिला पर असतित्व का लांछन लगाने की धमकी देकर आपराधिक अभित्रास का अपराध करता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(4) जो कोई, अनाम संसूचना द्वारा या उस व्यक्ति का, जिसने धमकी दी हो, नाम या निवास-स्थान छिपाने की पूर्वावधानी करके आपराधिक अभित्रास का अपराध करता है, वह उपधारा (1) के अधीन उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड के अतिरिक्त, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ।
धारा 352 – शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान
जो कोई, किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करता है और उसके द्वारा उस व्यक्ति को इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए, प्रकोपित करता है कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा 353 – सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान
(1) जो कोई, किसी कथन, मिथ्या जानकारी, जनश्रुति या रिपोर्ट को (क) इस आशय से कि, या जिससे यह सम्भाव्य हो कि, भारत की सेना, नौसेना या वायुसेना का कोई अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक विद्रोह करे या अन्यथा वह अपने उस नाते, अपने कर्तव्य की अवहेलना करे या उसके पालन में असफल रहे: या (ख) इस आशय से कि, या जिससे यह सम्भाव्य हो कि, लोक या लोक के किसी भाग को ऐसा भय या संत्रास कारित हो जिससे कोई व्यक्ति राज्य के विरुद्ध या लोक-प्रशान्ति के विरुद्ध अपराध करने के लिए उत्प्रेरित हो या (ग) इस आशय से कि, या जिससे यह सम्भाव्य हो कि, उससे व्यक्तियों का कोई वर्ग या समुदाय किसी दूसरे वर्ग या समुदाय के विरुद्ध अपराध करने के लिए उद्दीप्त किया जाए, रचता है, प्रकाशित करता है या परिचालित करता है, जिसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक माध्यम से रचना, प्रकाशन या परिचालन भी है, वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(2) जो कोई, मिथ्या जानकारी, जनश्रुति या संत्रासकारी समाचार अन्तर्विष्ट करने वाले किसी कथन या रिपोर्ट को, जिसके अन्तर्गत इलैक्ट्रानिक साधन के माध्यम से भी है इस आशय से कि, या जिससे यह संभाव्य हो कि, विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, आषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की आवनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, आषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर पैदा या संप्रवर्तित हो, रचता है, प्रकाशित करता है या परिचालित करता है, वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(3) जो कोई, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अपराध, किसी पूजा के स्थान में या किसी जमाव में, जो धार्मिक पूजा या धार्मिक कर्म करने में लगा हुआ हो, करता है, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । अपवाद ऐसा कोई कथन, मिथ्या जानकारी, जनश्रुति या रिपोर्ट इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत अपराध की कोटि में नहीं आती, जब उसे रचने वाले, प्रकाशित करने वाले या परिचालित करने वाले व्यक्ति के पास इस विश्वास के लिए युक्तियुक्त आधार हो कि ऐसा कथन, मिथ्या जानकारी, जनश्रुति या रिपोर्ट सत्य है और वह उसे सद्भावपूर्वक तथा पूर्वोक्त जैसे किसी आशय के बिना रचता है, प्रकाशित करता है या परिचालित करता है।
धारा 354 – व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने के लिए प्रेरित करने के कारण किया गया कार्य कि उसे दैवीय अप्रसन्नता का पात्र बना दिया जाएगा
जो कोई, किसी व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके, या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करके, कि यदि वह उस बात को न करें, जिसे उससे कराना अपराधी का उददेश्य हो, या यदि वह उस बात को करें जिसका उससे लोप कराना अपराधी का उद्देश्य हो, तो वह या कोई व्यक्ति, जिससे वह हितबद्ध है, अपराधी के किसी कार्य से दैवी अप्रसाद का भाजन हो जाएगा, या बना दिया जाएगा, स्वेच्छया उस व्यक्ति से कोई ऐसी बात करवाएगा या करवाने का प्रयत्न करेगा, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो, या किसी ऐसी बात के करने का लोप करवाएगा या करवाने का प्रयत्न करेगा, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से हकदार हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । दृष्टांत (क) क, यह विश्वास कराने के आशय से य के द्वार पर धरना देता है कि इस प्रकार धरना देने से वह य को दैवी अप्रसाद का भाजन बना रहा है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। (ख) क, य को धमकी देता है कि यदि य अमुक कार्य नहीं करेगा, तो क अपने बर्थ्यो में से किसी एक का वध ऐसी परिस्थितियों में कर डालेगा, जिससे ऐसे वध करने के भारत का राजपत्र असाधारण परिणामस्वरूप यह विश्वास किया जाए, कि य दैवी अपसाद का भाजन बना दिया गया है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 355 – शराबी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से दुर्व्यवहार
जो कोई, मतता की हालत में किसी लोक स्थान में, या किसी ऐसे स्थान में, जिसमें उसका प्रवेश करना अतिचार हो, आता है और वहां इस प्रकार का आचरण करता है जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि चौबीस घंटे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, या सामुदायिक सेवा से, दंडित किया जाएगा ।
धारा 356 – मानहानि
(1) जो कोई, बोले गए या पढ़े जाने के लिए आशयित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा, या दृश्यरूपों द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाता है या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि की जाए या यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए लगाता है या प्रकाशित करता है. ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि होगी, इसमें इसके पश्चात् अपवादित दशाओं के सिवाय उसके बारे में कहा जाता है कि वह उस व्यक्ति की मानहानि करता है। स्पष्टीकरण 1 किसी मृत व्यक्ति को कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आ सकेगा यदि वह लांछन उस व्यक्ति की ख्याति की, यदि वह जीवित होता, अपहानि करता, और उसके परिवार या अन्य निकट सम्बन्धियों की भावनाओं को उपहत करने के लिए आशयित हो । स्पष्टीकरण 2 किसी कम्पनी या संगम या व्यक्तियों के समूह के सम्बन्ध में उसकी वैसी हैसियत में कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आ सकेगा। स्पष्टीकरण 3 अनुकल्प के रूप में, या व्यंगोक्ति के रूप में अभिव्यक्त लांछन मानहानि की कोटि में आ सकेगा। स्पष्टीकरण 4 कोई लांछन किसी व्यक्ति की ख्याति की अपहानि करने वाला नहीं कहा जाता जब तक कि वह लांछन दूसरों की दृष्टि में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः उस व्यक्ति के सदाचारिक या बौद्धिक स्वरूप को कम न करे या उस व्यक्ति की जाति के या उसकी आजीविका के सम्बन्ध में उसके शील को कम न करे या उस व्यक्ति की साख को कम न करे या यह विश्वास न कराए कि उस व्यक्ति का शरीर घृणोत्पादक दशा में है या ऐसी दशा में है जो साधारण रूप से निकृष्ट समझी जाती है।
धारा 357 – असहाय व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने और आपूर्ति करने के अनुबंध का उल्लंघन
जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल करने या उसकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक वैध अनुबंध से बंधा हुआ है, जो युवावस्था, या मानसिक बीमारी, या किसी बीमारी या शारीरिक कमजोरी के कारण, अपनी स्वयं की देखभाल करने में असहाय या असमर्थ है। सुरक्षा या अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए, स्वेच्छा से ऐसा करने से चूक जाता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जाएगा।