भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय XVII (धारा 303 से 334) · Read in English
धारा 303 – चोरी
(1) जो कोई, किसी व्यक्ति कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना कोई चल सम्पति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पति ऐसे लेने के लिए हटाता है, यह घोरी करता है. यह कहा जाता है। स्पष्टीकरण 1 जब तक कोई वस्तु भूबद्ध रहती है. चल सम्पति न होने से चोरी का विषय नहीं होती; किन्तु ज्यों ही वह भूमि से पृथक की जाती है वह चोरी का विषय होने योग्य हो जाती है स्पष्टीकरण 2 हटाना, जो उसी कार्य दद्वारा किया गया है जिससे पृथक्करण किया गया है. चोरी हो सकेगा। स्पष्टीकरण 3 कोई व्यक्ति किसी चीज का हटाना कारित करता है, यह कहा जाता है जब वह उस बाधा को हटाता है जो उस पीज को हटाने से रोके हुए हो या जब वह उस चीज को किसी दूसरी चौज से पृथक् करता है तथा जब वह वास्तव में उसे हटाता है। स्पष्टीकरण 4 वह व्यक्ति जो किसी साधन द्वारा किसी जीव-जन्तु का हटाना कारित करता है, उस जीव-जन्तु को हटाता है. यह कहा जाता है और यह कहा जाता है कि वह ऐसी प्रत्येक चीज को हटाता है जो इस प्रकार उत्पन्न की गई गति के परिणामस्वरूप उस जीव-जन्तु द्वारा हटाई जाती है। स्पष्टीकरण 5 इस धारा में वर्णित संपति अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकती है, और तो कब्जा रखने वाले व्यक्ति द्वारा, या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो उस प्रयोजन यह के लिए अभिव्यक्त या विवक्षित प्राधिकार रखता है, दी जा सकती है। दृष्टांत (क) य की सम्मति के बिना कब्जे में से एक वृक्ष बेईमानी से लेने के आश्रय से य की भूमि पर लगे हुए उस वृक्ष को क काट डालता है। यहां, जैसे ही क ने इस प्रकार लेने के लिए उस वृक्ष को पृथक् किया, उसने चोरी की। (ख) के अपनी जेब में कुलों के लिए ललचाने वाली वस्तु रखता है, और इस प्रकार ब के कुर्ता को अपने पीछे चलने के लिए उत्प्रेरित करता है। यहां, यदि क का आशय य की सम्मति के बिना य के कब्जे में से उस कुते को बेईमानी से लेना हो. तो जैसे ही य के कुले ने क के पौठे पसना आरंभ किया, क ने चोरी की। (ग) मूल्यवान वस्तु की पेटी ने जाते हुए एक बैल क को मिलता है। वह उस बैल को इसलिए एक खास दिशा में हांकता है कि वे मूल्यवान वस्तुएं बेईमानी से ले सके। जैसे ही उस बैल ने गतिमान होना प्रारम्भ किया, मुल्यवान वस्तुएं घौरी की। (घ) क, जो य का सेवक है और जिसे य ने अपनी प्लेट की देख-रेख न्यस्त कर दी है. व की सम्मति के बिना प्लेट को लेकर बेईमानी से आग गया। क ने चोरी की।
(2) व यात्रा को जाते समय अपनी प्लेट लौटकर आने तक, क को, जो एक भाण्डागारिक है. न्यस्त कर देता है। के उस प्लेट को एक सुनार के पास ले जाता है और कब्जे में नहीं थी, इसलिए ह चोरी नहीं की है. चाहे आने आधिक स्वयमभंग किया नहीं ली जा सकती थी और काटता है। यहां वह अंगूठी करते में है. और यदि क उसकी बेईमानी से हटाता है.
(0) क की राजमार्ग पर पहई अंगठी मिला है. किसी व्यक्ति के बाते में नहीं है। कसे उसके से चोरी नहीं की है, भले ही उसने संपति का आप्याधिक दुरिनियोग अंगडी क देखता है। तलाशी और पला जगने के अब में उस अंगूठी का तुरंत दुर्विनिमोन करने अंगठी ऐसे स्थान पर जड़ से उसका को कभी भी मिला अति अधि इस आशय में जित्य देता है कि छिपाने के उसका बोया जाना बद है। से आम और जबकि हटाते समय चोरी की जौहरी है, क अपनी बैंक करने के लिए परिदत बयान है। व आभी अपनी बात पर में जाता है जौहरी बा, कोई ऐसा कुण नहीं है, जिसके लिए कि वह जहरी उस घड़ी की प्रतिभूति के रूप में विधिपूर्वका दीनाशके खुले तौर पर उस दुकान में घुसता है. के हाथ में अपनी घड़ी बलपूर्वक ने ओता है.औ भले ही अपराधिक अतिधार और हमला किया हो उसने चोरी नहीं की है, क्योंकि जी छ में उसने किया, बेईमानी को नहीं किया। धन देव है. और यदि उस की प्रतिभूति कथ उस संपत्ति लेता है उसे बेईमानी से नेता घड़ी को उस कुण की प्रतिभूति कब्जे में से इस आशय से लेता है कि व की उसने में अंचित कर दें तो उसने चोरी की है क्योंकि जो कुछ (८) और यदि क अपनी के गिरवी रखने के बाद ही के बदले लिए गए समति के बित्ता में नेता है तो उसने कुवरलेला है, चौरी की है, समापि प्रत्याईलन के लिए परस्कार के के बिलाव के बहते नेता है। यहां बेईमानी से लेता है, इसलिए क में चोरी की। पुस्तकालय में जाता है और ब पुस्तक केवल पड़ने के लिए और वापस करते की अभिध्यतति के बिता आय में से आता है। यहां यह अधिसम्म है कि कसे यह विचार किया हो कि पुस्तक उपधीग में जाने के लिए उसको यह विचार म.तो क ने चोरी नहीं की है। (ढ) य की पत्नी से क भिक्षादान मांगता है। वह क को धन, भोजन और कपड़े देती है जिनको क जानता है कि वे उसके पति य के हैं। यहां, यह अधिसंभव्य है कि क का यह विचार हो कि य की पत्नी को भिक्षा देने का प्राधिकार है। यदि क का यह विचार था, तो क ने चौरी नहीं की है। (ण) क, य की पत्नी का जार है। वह क को एक मूल्यवान संपत्ति देती है जिसके संबंध में क यह जानता है कि वह उसके पति य की है, और वह ऐसी संपत्ति है, जिसको देने का प्राधिकार उसे य से प्राप्त नहीं है। यदि क उस संपत्ति को बेईमानी से लेता है, तो वह चोरी करता है। (त) य की संपति को अपनी स्वयं की संपत्ति होने का सद्भावपूर्वक विश्वास करते हुए ख के कब्जे में से उस संपत्ति को क ले लेता है। यहां क बेईमानी से नहीं लेता, इसलिए वह चोरी नहीं करता ।
(2) जो कोई चोरी करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा और इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति के दूसरे या पश्चातवर्ती दोषसिदधि के मामले में, उसे ऐसे कठिन कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किंन्तु पांच वर्ष तक हो सकेगी और जुर्माने से दंडित किया जाएगा: परन्तु चोरी के उन मामलों में जहां चोरी की गई संपत्ति का मूल्य पांच हजार रुपए से कम है और कोई व्यक्ति पहली बार के लिए दोषसिदध किया गया है, चोरी की गई संपत्ति के वापस करने पर या संपत्ति को प्रत्यावर्तित करने पर उसे सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा ।
धारा 304 – छीनना
(1) चोरी "झपटमारी" है. यदि चोरी करने के लिए अपराधी अचानक या शीघ्रता से या बलपूर्वक किसी व्यक्ति से या उसके कब्जे में से किसी चल संपत्ति को अभिग्रहण कर लेता है या प्राप्त कर लेता है या छीन लेता है या ले लेता है। झपटमारी ।
(2) जो कोई, झपटमारी करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 305 – किसी आवासीय घर, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी
जो कोई, (क) ऐसे किसी भवन, तम्बू या जलयान में चोरी करता है, जो मानव निवास के रूप में, या संपति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता है या (ख) ऐसे किसी यातायात के साधन में चोरी करता है, जो माल या यात्रियों के यातायात के लिए उपयोग किया जाता है या (ग) ऐसे किसी यातायात के साधन से किसी वस्तु या माल की चोरी करता है. जो माल या यात्रियों के यातायात के लिए उपयोग किया जाता है; या (घ) किसी पूजा स्थल की मूर्ति या प्रतीक की चोरी करता है; या (ङ) सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण की किसी संपति की चोरी करता है. वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी,
धारा 306 – मालिक के कब्जे में संपत्ति की क्लर्क या नौकर द्वारा चोरी
जो कोई क्लर्क या नौकर होते हुए, या क्लर्क या नौकर की हैसियत से नियोजित होते हुए, अपने मालिक या नियोक्ता के कब्जे में किसी संपत्ति के संबंध में चोरी करेगा, उसे एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा। सात साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी देना होगा।
धारा 307 – चोरी करने के लिए मृत्यु, चोट या अवरोध उत्पन्न करने की तैयारी के बाद चोरी करना
जो कोई, चोरी करने के लिए, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी द्वारा ली गई संपत्ति को रखे रखने के लिए, किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उसे उपहति या उसका अवरोध कारित करने की, या मृत्यु का, उपहति का या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी करता है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । दृष्टांत (क) य के कब्जे में की संपत्ति पर क चोरी करता है और यह चोरी करते समय अपने पास अपने वस्त्रों के भीतर एक भरी हुई पिस्तौल रखता है, जिसे उसने य द्वारा प्रतिरोध किए जाने की दशा में य को उपहति करने के लिए अपने पास रखा था। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। (ख) क, य की जेब काटता है, और ऐसा करने के लिए अपने कई साथियों को अपने पास इसलिए नियुक्त करता है कि यदि य यह समझ जाए कि क्या हो रहा है और प्रतिरोध करे, या क को पकड़ने का प्रयत्न करे, तो वे य का अवरोध करें। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 308 – जबरन वसूली
(1) जो कोई, किसी व्यक्ति को स्वयं उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्षति करने के अय में साशय डालता है, और उसके द्वारा इस प्रकार अय में डाले गए व्यक्ति को, कोई संपति या मूल्यवान प्रतिभूति या हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई चीज, जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सके, किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करता है, वह उद्यापन करता है।
धारा 309 – डकैती
(1) सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है।
(2) चोरी 'लूट" है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त सम्पति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उपहति या उसका सदोष अवरोध या तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल सदोष अवरोध का भय कारित करता या कारित करने का प्रयत्न करता है।
(3) उद्यापन "लूट" है, यदि अपराधी वह उद्यापन करते समय अय में डाले गए व्यक्ति की उपस्थिति में है, और उस व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की तत्काल मृत्यु या तत्काल उपहति या तत्काल सदोष अवरोध के अय में डालकर वह उद्घापन करता है और इस प्रकार भय में डालकर इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को उद्घापन की जाने वाली चीज उसी समय और वहां ही परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है। स्पष्टीकरण अपराधी का उपस्थित होना कहा जाता है, यदि वह उस अन्य व्यक्ति को तत्काल मृत्यु के, तत्काल उपहति के, या तत्काल सदोष अवरोध के अय में डालने के लिए पर्याप्त रूप से निकट हो ।
धारा 310 – डकैती
(1) जब पांच या अधिक व्यक्ति मिलकर डकैती करते हैं या करने का प्रयास करते हैं, या जहां डकैती करने या करने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों की पूरी संख्या, और ऐसे कार्य में उपस्थित और सहायता करने वाले व्यक्तियों की संख्या पांच या अधिक होती है , ऐसा करने, प्रयास करने या सहायता करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को "डकैती" करने वाला कहा जाता है।
(2) जो कोई भी डकैती करेगा, उसे आजीवन कारावास या दस साल तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
(3) यदि पांच या अधिक व्यक्तियों में से कोई एक, जो मिलकर डकैती कर रहे हैं, डकैती करते समय हत्या कर देता है, तो उन व्यक्तियों में से प्रत्येक को मौत की सजा दी जाएगी, या आजीवन कारावास, या एक अवधि के लिए कठोर कारावास की सजा दी जाएगी। दस वर्ष से कम, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(4) जो कोई भी डकैती करने की तैयारी करेगा, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
(5) जो कोई भी डकैती करने के उद्देश्य से इकट्ठे हुए पांच या अधिक व्यक्तियों में से एक है, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
(6) जो कोई भी आदतन डकैती करने के उद्देश्य से जुड़े व्यक्तियों के गिरोह से संबंधित है, उसे आजीवन कारावास या कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
धारा 311 – लूट या डकैती, मौत या गंभीर चोट पहुंचाने के प्रयास के साथ
यदि लूट या डकैती करते समय अपराधी किसी घातक हथियार का उपयोग करता है, या किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाता है, या किसी व्यक्ति को मौत या गंभीर चोट पहुंचाने का प्रयास करता है, तो ऐसे अपराधी को कारावास की सजा दी जाएगी। सात वर्ष से कम न हो.
धारा 312 – घातक हथियार से लैस होकर डकैती या डकैती करने का प्रयास
यदि लूट या डकैती करने का प्रयास करते समय अपराधी किसी घातक हथियार से लैस है, तो ऐसे अपराधी को कारावास की सजा सात साल से कम नहीं होगी।
धारा 313 – लुटेरों, डकैतों, आदि के गिरोह से संबंधित होने के लिए सजा
जो कोई भी आदतन चोरी या डकैती करने वाले व्यक्तियों के गिरोह से संबंधित है, और डकैतों का गिरोह नहीं है, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
धारा 314 – संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग
जो कोई किसी चल संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग करेगा या अपने उपयोग के लिए परिवर्तित करेगा, उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जो छह महीने से कम नहीं होगी लेकिन जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जाएगा। रेखांकन (ए) ए, ज़ेड की संपत्ति को ज़ेड के कब्जे से बाहर ले जाता है, अच्छे विश्वास के साथ उस समय विश्वास करता है जब वह इसे लेता है, कि संपत्ति उसकी है। ए चोरी का दोषी नहीं है; लेकिन यदि ए, अपनी गलती का पता चलने के बाद, बेईमानी से संपत्ति को अपने उपयोग के लिए विनियोजित करता है, तो वह इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (बी) ए, ज़ेड के साथ मैत्रीपूर्ण शर्तों पर होने के कारण, ज़ेड की अनुपस्थिति में ज़ेड की लाइब्रेरी में जाता है, और ज़ेड की स्पष्ट सहमति के बिना एक किताब ले जाता है। यहां, यदि ए इस धारणा के तहत था कि उसे पढ़ने के उद्देश्य से पुस्तक लेने के लिए जेड की निहित सहमति थी, तो ए ने चोरी नहीं की है। लेकिन, यदि A बाद में अपने फायदे के लिए किताब बेचता है, तो वह इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (सी) ए और बी, एक घोड़े के संयुक्त मालिक हैं। ए घोड़े को इस्तेमाल करने के इरादे से बी के कब्जे से निकाल लेता है। यहां, चूंकि ए को घोड़े का उपयोग करने का अधिकार है, इसलिए वह बेईमानी से इसका दुरुपयोग नहीं करता है। लेकिन, यदि ए घोड़ा बेचता है और पूरी आय अपने उपयोग के लिए विनियोजित करता है, तो वह इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। स्पष्टीकरण 1.—केवल एक समय के लिए बेईमानीपूर्ण दुरुपयोग इस धारा के अर्थ के अंतर्गत एक दुरुपयोग है। रेखांकन A को Z से संबंधित एक सरकारी वचन पत्र मिलता है, जिस पर रिक्त पृष्ठांकन अंकित है। ए, यह जानते हुए कि नोट ज़ेड का है, इसे ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में एक बैंकर के पास गिरवी रखता है, भविष्य में इसे ज़ेड को वापस करने का इरादा रखता है। ए ने इस धारा के तहत अपराध किया है। स्पष्टीकरण 2.—एक व्यक्ति जो पाता है कि संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में नहीं है, और ऐसी संपत्ति को उसकी सुरक्षा के लिए, या मालिक को वापस लौटाने के उद्देश्य से लेता है, तो वह इसे बेईमानी से नहीं लेता है या उसका दुरुपयोग नहीं करता है, और नहीं है किसी अपराध का दोषी; लेकिन वह ऊपर परिभाषित अपराध का दोषी है, यदि वह इसे अपने उपयोग के लिए उपयुक्त बनाता है, जब वह जानता है या उसके पास मालिक की खोज करने के साधन हैं, या इससे पहले कि उसने मालिक की खोज करने और उसे नोटिस देने के लिए उचित साधनों का उपयोग किया हो और उसे अपने पास रखा हो। संपत्ति के मालिक को उस पर दावा करने में सक्षम बनाने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। ऐसे मामले में उचित साधन क्या हैं या उचित समय क्या है, यह तथ्य का प्रश्न है। यह आवश्यक नहीं है कि खोजने वाले को पता हो कि संपत्ति का मालिक कौन है, या कोई विशेष व्यक्ति इसका मालिक है; यह पर्याप्त है यदि, इसे विनियोजित करते समय, वह यह नहीं मानता कि यह उसकी अपनी संपत्ति है, या सद्भावपूर्वक विश्वास करता है कि वास्तविक मालिक नहीं पाया जा सकता है। रेखांकन (ए) ए को ऊंची सड़क पर एक रुपया मिलता है, यह न जानते हुए कि वह रुपया किसका है, ए रुपया उठा लेता है। यहां A ने इस धारा में परिभाषित अपराध नहीं किया है। (बी) ए को सड़क पर एक पत्र मिलता है, जिसमें एक बैंक नोट है। पत्र की दिशा और विषय-वस्तु से वह जान लेता है कि नोट किसका है। वह नोट को विनियोजित करता है। वह इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (सी) ए को धारक को देय एक चेक मिलता है। वह उस व्यक्ति के बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकता जिसने चेक खो दिया है। लेकिन उस व्यक्ति का नाम सामने आ जाता है, जिसने चेक काटा है. ए जानता है कि यह व्यक्ति उसे उस व्यक्ति के पास भेज सकता है जिसके पक्ष में चेक काटा गया था। ए मालिक का पता लगाने का प्रयास किए बिना चेक का विनियोजन करता है। वह इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (डी) ए ने देखा कि जेड ने अपना पैसों वाला पर्स गिरा दिया है। क उस पर्स को ज़ेड को लौटाने के इरादे से उठाता है, लेकिन बाद में उसे अपने उपयोग के लिए उपयोग कर लेता है। ए ने इस धारा के तहत अपराध किया है। (ङ) क को पैसों से भरा एक पर्स मिलता है, बिना यह जाने कि यह किसका है; बाद में उसे पता चलता है कि यह Z का है, और वह इसे अपने उपयोग के लिए उपयुक्त बना लेता है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (एफ) ए को एक मूल्यवान अंगूठी मिलती है, यह नहीं पता कि यह किसकी है। ए मालिक का पता लगाने का प्रयास किए बिना इसे तुरंत बेच देता है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है।
धारा 315 – मृत व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके पास मौजूद संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग
जो कोई, किसी सम्पत्ति को, यह जानते हुए कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उस मृत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है, बेईमानी से दुर्विनियोजित करता है या अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि वह अपराधी, ऐसे व्यक्ति की मृत्यु के समय लिपिक या सेवक के रूप में उसके ऐसी सम्पति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो मृत व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके कब्जे में थी। द्वारा नियोजित था, तो कारावास सात वर्ष तक का हो सकेगा ।
धारा 316 – आपराधिक विश्वास का उल्लंघन
(1) जो कोई, सम्पत्ति या सम्पत्ति पर कोई भी आधिपत्य किसी प्रकार से अपने को न्यस्त किए जाने पर उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेता है या उसे अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेता है या जिस प्रकार ऐसा न्यास निर्वहन किया जाना है, उसको विहित करने वाली विधि के किसी निदेश का, या ऐसे न्यास के निर्वहन के बारे में उसके दवारा की गई किसी अभिव्यक्त या विवक्षित वैध संविदा का अतिक्रमण करके बेईमानी से उस सम्पत्ति का उपयोग या व्ययन करता है, या जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का ऐसा करना सहन करता है, वह आपराधिक न्यास भंग करता है। स्पष्टीकरण 1 जो व्यक्ति, किसी स्थापन का नियोजक होते हुए, चाहे वह स्थापन कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 की धारा 17 के अधीन छूट प्राप्त है या नहीं, तत्समय प्रवृत किसी विधि द्वारा स्थापित भविष्य-निधि या कुटुंब पेंशन निधि में जमा करने के लिए कर्मचारी-अभिदाय की कटौती कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से करता है उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसके दद्वारा इस प्रकार कटौती किए गए अभिदाय की रकम उसे न्यस्त कर दी गई है और यदि वह उक्त निधि में ऐसे अभिदाय का संदाय करने में, उक्त विधि का अतिक्रमण करके व्यतिक्रम करेगा तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने यथापूर्वोक्त विधि के किसी निदेश का अतिक्रमण करके उक्त अभिदाय की रकम का बेईमानी से उपयोग किया है। स्पष्टीकरण 2-जो व्यक्ति, नियोजक होते हुए, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अधीन स्थापित कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा धारित और शासित कर्मचारी राज्य बीमा निगम निधि में जमा करने के लिए कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से कर्मचारी-अभिदाय की कटौती करता है, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसे अभिदाय की वह रकम न्यस्त कर दी गई है, जिसकी उसने इस प्रकार कटौती की है और यदि वह उक्त निधि में ऐसे अभिदाय के संदाय करने में, उक्त अधिनियम का अतिक्रमण करके, व्यतिक्रम करता है. तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने यथापूर्वोक्त विधि के किसी निदेश का अतिक्रमण करके उक्त अभिदाय की रकम का बेईमानी से उपयोग किया है।
धारा 317 – चोरी की संपत्ति
(1) वह संपत्ति, जिसका कब्जा चोरी द्वारा, या उद्घापन द्वारा या लूट द्वारा या छल द्वारा अंतरित किया गया है, और वह संपति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है, या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग किया गया है, चुराई हुई "संपति" कहलाती है, चाहे वह अंतरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग भारत के भीतर किया गया हो या बाहर, किंतु यदि ऐसी संपत्ति तत्पश्चात् ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुंच जाती है, जो उसके कब्जे के लिए वैध रूप से हकदार है, तो वह चुराई हुई संपत्ति नहीं रह जाती ।
(2) जो कोई, किसी चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करता है या रखता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(3) जो कोई, ऐसी चुराई गई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करता है या रखे रखता है, जिसके कब्जे के विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डकैती दवारा अंतरित की गई है, या किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके संबंध में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डाकुओं की टोली का है या रहा है, ऐसी संपत्ति, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई है, बेईमानी से प्राप्त करता है, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(4) जो कोई, ऐसी संपति, जिसके संबंध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, अभ्यासतः प्राप्त करता है, या अभ्यासतः उसमें व्यवहार करता है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(5) जो कोई, ऐसी संपति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर-उधर करने में स्वेच्छ्या सहायता करता है, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई संपत्ति है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा 318 – धोखाधड़ी
(1) जो कोई, किसी व्यक्ति से प्रवंचना कर उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, कपटपूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे. या यह सम्मति दे दे कि कोई व्यक्ति किसी संपति को रख रखे या साशय उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, उत्प्रेरित करता है कि वह ऐसा कोई कार्य करे, या करने का लोप करे, जिसे वह यदि उसे प्रत्येक प्रकार प्रवंचित न किया गया होता तो, न करता, या करने का लोप न करता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, ख्याति संबंधी या साम्पत्तिक नुकसान या अपहानि कारित होती है, या कारित होनी सम्भव्य है, वह छल करता है, यह कहा जाता है। स्पष्टीकरण तर्यो का बेईमानी से छिपाना इस धारा के अर्थ के अंतर्गत प्रवंचना है।
धारा 319 – पहचान के आधार पर धोखाधड़ी
(1) कोई व्यक्ति प्रतिरूपण द्वारा छल करता है, यह तब कहा जाता है, जब वह यह अपदेश करके कि वह कोई अन्य व्यक्ति है, या एक व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के रूप में जानते हुए प्रतिस्थापित करके, या यह निरूपित करके कि वह या कोई अन्य व्यक्ति, कोई ऐसा व्यक्ति है, जो वस्तुतः उससे या अन्य व्यक्ति से भिन्न है, छल करता है। स्पष्टीकरण यह अपराध हो जाता है, चाहे वह व्यक्ति, जिसका प्रतिरूपण किया गया है, वास्तविक व्यक्ति हो या काल्पनिक । दृष्टांत (क) क उसी नाम का अमुक धनवान बैंकर है इस अपदेश द्वारा छल करता है। क प्रतिरूपण द्वारा छल करता है। (ख) ख, जिसकी मृत्यु हो चुकी है, होने का अपदेश करने द्वारा क छल करता है। क प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।
(2) जो कोई, प्रतिरूपण द्वारा छल करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
धारा 320 – लेनदारों के बीच वितरण को रोकने के लिए संपत्ति को बेईमानी से या धोखाधड़ी से हटाना या छिपाना
जो कोई बेईमानी से या धोखाधड़ी से किसी भी संपत्ति को हटाता है, छिपाता है या किसी व्यक्ति को सौंपता है, या किसी भी संपत्ति को बिना पर्याप्त विचार के किसी भी व्यक्ति को हस्तांतरित करता है या हस्तांतरित करता है, जिससे उसे रोकने का इरादा होता है, या यह जानते हुए कि वह ऐसा होने से रोकेगा, उस संपत्ति को कानून के अनुसार अपने लेनदारों या किसी अन्य व्यक्ति के लेनदारों के बीच वितरित करने पर, किसी भी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो छह महीने से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना लगाया जाएगा। या दोनों के साथ.
धारा 321 – बेईमानी से या धोखाधड़ी से लेनदारों के लिए ऋण उपलब्ध होने से रोकना
जो कोई बेईमानी से या धोखाधड़ी से अपने या किसी अन्य व्यक्ति के कारण किसी ऋण या मांग को अपने ऋण या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋण के भुगतान के लिए कानून के अनुसार उपलब्ध होने से रोकता है, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी। जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
धारा 322 – गलत प्रतिफल विवरण वाले हस्तांतरण विलेख का बेईमानी से या धोखाधड़ी से निष्पादन
जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या लिखत पर हस्ताक्षर करता है, निष्पादित करता है या उस पर एक पक्ष बनता है जिसका तात्पर्य किसी संपत्ति, किसी संपत्ति, या उसमें किसी हित को हस्तांतरित करना या उसके अधीन होना है, और जिसमें ऐसे हस्तांतरण के लिए विचार के संबंध में कोई गलत बयान शामिल है या आरोप, या उस व्यक्ति या व्यक्तियों से संबंधित जिसके उपयोग या लाभ के लिए यह वास्तव में संचालित होने का इरादा है, किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 323 – बेईमानी से या धोखाधड़ी से संपत्ति को हटाना या छिपाना
जो कोई बेईमानी से या धोखाधड़ी से अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की किसी संपत्ति को छुपाता है या हटाता है, या बेईमानी से या धोखाधड़ी से उसे छुपाने या हटाने में सहायता करता है, या बेईमानी से कोई मांग या दावा जारी करता है जिसका वह हकदार है, उसे कारावास की सजा दी जाएगी। ऐसी अवधि का विवरण जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
धारा 324 – शरारत
(1) जो कोई, इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि, वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे, किसी सम्पत्ति का नाश या किसी सम्पत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है, जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है, या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है, वह रिष्टि करता है। स्पष्टीकरण 1 रिष्टि के अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी क्षतिग्रस्त या नष्ट सम्पत्ति के स्वामी को हानि या नुकसान कारित करने का आशय रखे। यह पर्याप्त है कि उसका यह आशय है या वह यह सम्भव्य जानता है कि वह किसी सम्पति को क्षति करके किसी व्यक्ति को, चाहे वह सम्पत्ति उस व्यक्ति की हो या नहीं, सदोष हानि या नुकसान कारित करे । स्पष्टीकरण 2 ऐसी सम्पति पर प्रभाव डालने वाले कार्य द्वारा, जो उस कार्य को करने वाले व्यक्ति की हो, या संयुक्त रूप से उस व्यक्ति की और अन्य व्यक्तियों की हो, रिष्टि की जा सकेगी । दृष्टांत
धारा 325 – जानवर को मारकर या अपंग बनाकर शरारत करना
जो कोई, किसी जीव-जन्तु का वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा 326 – चोट, बाढ़, आग या विस्फोटक पदार्थ, आदि द्वारा शरारत
जो कोई, किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करता है, – (क) जिससे कृषिक प्रयोजनों के लिए, या मानव प्राणियों के या उन जीव-जन्तुओं के, जो सम्पति है, खाने या पौने के, या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो या कमी कारित होना वह सम्भव्य जानता हो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा; (ख) जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य, नदी या प्राकृतिक या कृत्रिम नाव्य जलसरणी को यात्रा या सम्पति प्रवहण के लिए अगम्य या कम निरापद बना दिया जाए या बना दिया जाना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा; (ग) जिससे किसी लोक जलनिकास में क्षतिप्रद या नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोर्नो से, दंडित किया जाएगा; (घ) जिससे रेल, वायुयान या पोत या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिए मार्ग प्रदर्शन के लिए रखी गई हो, नष्ट करने या हटाने या कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा चिन्ह या सिग्नल जो नौ-चालकों के लिए मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा; (ङ) जिससे किसी लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाए गए किसी भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने द्वारा या कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिह्न ऐसे भूमि चिह्न के रूप में कम उपयोगी बन जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोर्नी से, दंडित किया जाएगा; (च) जिससे कृषि उपज सहित किसी सम्पत्ति का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह उसके द्वारा ऐसा नुकसान अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा कारित हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी द्वायी होगा: (छ) जिससे किसी ऐसे निर्माण का, जो साधारण तौर पर उपासना स्थान के रूप में या मानव-आवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सम्भव्य जानते हुए कि वह उसके द्वारा उसका नाश अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ दद्वारा कारित हो, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 327 – रेल, विमान, डेक वाले जहाज या बीस टन वजन वाले जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के इरादे से शरारत
(1) जो कोई किसी रेल, विमान, या डेक वाले जहाज या बीस टन या उससे अधिक वजन वाले किसी भी जहाज को नष्ट करने या असुरक्षित करने के इरादे से शरारत करता है, या यह जानते हुए कि वह इस तरह नष्ट कर देगा या असुरक्षित कर देगा। असुरक्षित, रेल, विमान या जहाज, दोनों में से किसी भी प्रकार की कैद से दंडित किया जाएगा जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(2) जो कोई आग या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी शरारत करेगा, या करने का प्रयास करेगा, जैसा कि उपधारा (1) में वर्णित है, उसे आजीवन कारावास या एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे बढ़ाया जा सकता है। दस साल तक की सजा और जुर्माना भी देना होगा।
धारा 328 – चोरी आदि करने के इरादे से जानबूझकर जहाज को किनारे या किनारे पर चलाने के लिए सजा
जो कोई जानबूझकर किसी जहाज को किनारे या किनारे पर चलाता है, उसमें मौजूद किसी भी संपत्ति की चोरी करने या ऐसी किसी संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग करने का इरादा रखता है, या इस इरादे से कि ऐसी चोरी या संपत्ति का दुरुपयोग किया जा सकता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
धारा 329 – आपराधिक अतिचार और घर अतिचार
(1) जो कोई, ऐसी संपत्ति में या ऐसी संपत्ति पर, जो किसी दूसरे के कब्जे में है. इस आशय से प्रवेश करता है कि वह कोई अपराध करे या किसी व्यक्ति को, जिसके कब्जे में ऐसी संपत्ति है अभित्रस्त, अपमानित या क्षुब्ध करे, या ऐसी संपति में या ऐसी संपति पर विधिपूर्वक प्रवेश करके वहां विधिविरुद्ध रूप में इस आशय से बना रहता है कि उसके द्वारा वह किसी ऐसे व्यक्ति को अभित्रस्त, अपमानित या क्षुब्ध करे या इस आशय से बना रहता है कि वह कोई अपराध करे, वह "आपराधिक अतिचार करता है, यह कहा जाता है।
(2) जो कोई, किसी निर्माण, तम्बू या जलयान में, जो मानव-आवास के रूप में उपयोग में आता है, या किसी निर्माण में, जो उपासना-स्थान के रूप में, या किसी संपति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता है, प्रवेश करके या उसमें बना रह कर, आपराधिक अतिचार करता है, वह 'गृह-अतिचार" करता है. यह कहा जाता है। स्पष्टीकरण आपराधिक अतिचार करने वाले व्यक्ति के शरीर के किसी आग का प्रवेश गृह-अतिचार गठित करने के लिए पर्याप्त प्रवेश है।
(3) जो कोई, आपराधिक अतिचार करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(4) जो कोई, गृह-अतिचार करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
धारा 330 – घर अतिचार और घर तोड़ना
(1) जो कोई किसी व्यक्ति से ऐसे गृह-अतिचार को छिपाने के लिए सावधानी बरतते हुए गृह-अतिचार करता है, जिसके पास अतिचारी को उस इमारत, तंबू या जहाज से, जो अतिचार का विषय है, बाहर निकालने या बाहर निकालने का अधिकार है, ऐसा कहा जाता है "गुप्त गृह अतिचार" करें।
(2) ऐसा व्यक्ति "गृह-भेदन" करने वाला माना जाता है जो गृह-अतिचार करता है यदि वह इसके बाद वर्णित छह तरीकों में से किसी एक में घर या उसके किसी हिस्से में प्रवेश करता है; या यदि, अपराध करने के उद्देश्य से घर या उसके किसी हिस्से में रहते हुए, या उसमें अपराध करने के बाद, वह निम्नलिखित में से किसी भी तरीके से घर या उसके किसी हिस्से को छोड़ देता है, अर्थात्:–– (ए) यदि वह गृह-अतिचार करने के लिए स्वयं, या गृह-अतिचार के किसी दुष्प्रेरक द्वारा बनाए गए मार्ग से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है; (बी) यदि वह किसी ऐसे मार्ग से प्रवेश करता है या छोड़ देता है जो मानव प्रवेश के लिए उसके या अपराध के दुष्प्रेरक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इरादा नहीं है; या किसी मार्ग से होकर जिस तक उसने किसी दीवार या इमारत पर चढ़कर या चढ़कर पहुंच प्राप्त की है; (सी) यदि वह किसी ऐसे मार्ग से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जिसे उसने या गृह-अतिचार के किसी दुष्प्रेरक ने किसी भी माध्यम से गृह-अतिचार करने के लिए खोला है, जिसके द्वारा वह मार्ग घर के कब्जे वाले द्वारा इरादा नहीं था खोला जाना है; (डी) यदि वह गृह-अतिचार करने के लिए, या गृह-अतिचार के बाद घर छोड़ने के लिए कोई ताला खोलकर प्रवेश करता है या बाहर निकलता है; (ई) यदि वह आपराधिक बल का प्रयोग करके या हमला करके, या किसी व्यक्ति को हमले की धमकी देकर प्रवेश या प्रस्थान करता है; (च) यदि वह किसी ऐसे मार्ग से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जिसके बारे में वह जानता है कि उसे ऐसे प्रवेश या प्रस्थान के विरुद्ध बांधा गया है, और उसे स्वयं या गृह-अतिचार के दुष्प्रेरक द्वारा खोला गया है। स्पष्टीकरण.-कोई भी आउट-हाउस या भवन जिस पर किसी घर का कब्ज़ा है, और जिसके और ऐसे घर के बीच तत्काल आंतरिक संचार है, इस धारा के अर्थ के तहत घर का हिस्सा है। रेखांकन (ए) ए ज़ेड के घर की दीवार के माध्यम से एक छेद बनाकर और छेद के माध्यम से अपना हाथ डालकर घर-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (बी) डेक के बीच पोर्ट-होल पर जहाज में रेंगकर ए गृह-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (सी) ए एक खिड़की के माध्यम से ज़ेड के घर में प्रवेश करके घर-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (डी) ए ज़ेड के घर में दरवाजे के माध्यम से प्रवेश करके, एक दरवाजा खोलकर, जो कि बांधा गया था, गृह-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (ई) ए ज़ेड के घर में दरवाजे के माध्यम से प्रवेश करके, दरवाजे में एक छेद के माध्यम से एक तार डालकर कुंडी उठाकर गृह-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (एफ) ए को ज़ेड के घर के दरवाज़े की चाबी मिल जाती है, जो ज़ेड खो गई थी, और उस चाबी से दरवाज़ा खोलकर ज़ेड के घर में प्रवेश करके गृह-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (छ) Z अपने द्वार पर खड़ा है। A, Z को नीचे गिराकर जबरदस्ती रास्ता बनाता है, और घर में प्रवेश करके गृह-अतिचार करता है। यह घर तोड़ना है। (ज) Z, Y का द्वारपाल, Y के द्वार पर खड़ा है। क घर में घुसकर गृह-अतिचार करता है, और उसे पीटने की धमकी देकर उसका विरोध करने से रोकता है। यह घर तोड़ना है.
धारा 331 – घर में अतिक्रमण या घर तोड़ने के लिए सजा
(1) जो कोई, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) जो कोई, सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(3) जो कोई, कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार का गृह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी ।
(4) जो कोई, कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है. वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा, तथा यदि वह अपराध जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी।
(5) जो कोई, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की या किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(6) जो कोई, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व गृह-भेदन करने की या किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के, भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा। (7) जो कोई, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करता है या किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(8) यदि प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करता है या मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करता है, तो ऐसे प्रच्छन्न गृह-अतिधार या गृह-भेदन सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व करने में संयुक्ततः संबंधित प्रत्येक व्यक्ति, आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
धारा 332 – अपराध करने के लिए घर में अतिक्रमण
जो कोई, ऐसा अपराध करने के लिए गृह-अतिचार करता है- (क) जो मृत्यु से दंडनीय है, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा: (ख) जो आजीवन कारावास से दंडनीय है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा: (ग) जो कारावास से दंडनीय है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा: परन्तु यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी।
धारा 333 – चोट, हमले या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में अतिक्रमण
जो कोई, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की या किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गृह-अतिचार करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 334 – बेईमानी से संपत्ति वाले पात्र को तोड़ना
(1) जो कोई बेईमानी से या शरारत करने के इरादे से, किसी बंद पात्र को तोड़ता है या खोलता है जिसमें संपत्ति होती है या जिसके बारे में उसका मानना है कि उसे दो साल तक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, या जुर्माने से, या दोनों से।
(2) जो कोई किसी बंद पात्र को सौंपा गया है जिसमें संपत्ति है या जिसके बारे में उसका मानना है कि उसे खोलने का अधिकार नहीं है, बेईमानी से, या शरारत करने के इरादे से, उस पात्र को तोड़ देगा या खोल देगा, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा। किसी भी प्रकार की अवधि के लिए जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।