BNS अध्याय XVI हिंदी में – धारा 298 से 302

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय XVI (धारा 298 से 302) · Read in English

धारा 298 – किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना

जो कोई, किसी उपासना स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग दवारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र इस आशय से करता है कि किसी वर्ग के धर्म का उसके द्वारा अपमान किए जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि व्यक्तियों का कोई वर्ग ऐसे नाश, नुकसान या अपवित्र किए जाने को अपने धर्म के प्रति अपमान समझेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।

धारा 299 – जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है

जो कोई, भारत के नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपों द्वारा या इलैक्ट्रानिक साधर्ना दद्वारा या अन्यथा करता है या करने का प्रयत्न करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोर्नो से. दण्डित किया जाएगा।

धारा 300 – धार्मिक सभा में विघ्न डालना

जो कोई भी स्वेच्छा से धार्मिक पूजा, या धार्मिक समारोहों के प्रदर्शन में कानूनी रूप से लगे किसी भी जमावड़े में अशांति पैदा करेगा, उसे एक अवधि के लिए कारावास, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 301 – कब्रिस्तान आदि पर अतिक्रमण करना

जो कोई किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से, या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के इरादे से या यह जानते हुए कि किसी व्यक्ति की भावनाएँ आहत होने की संभावना है, या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने की संभावना है। इससे अपमानित, किसी पूजा स्थल या किसी कब्रगाह पर, या अंतिम संस्कार के लिए या मृतकों के अवशेषों के भंडार के रूप में अलग किए गए किसी स्थान पर कोई अतिक्रमण करता है, या किसी मानव शव को कोई अपमान प्रदान करता है, या अंतिम संस्कार समारोहों के प्रदर्शन के लिए इकट्ठे हुए किसी भी व्यक्ति को परेशान करता है, तो उसे एक वर्ष तक के कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 302 – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के जानबूझकर इरादे से शब्दों आदि का उच्चारण करना

जो कोई, किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के जानबूझकर इरादे से, उस व्यक्ति की सुनवाई में कोई शब्द बोलता है या कोई आवाज निकालता है या उन व्यक्तियों की दृष्टि में कोई इशारा करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई वस्तु रखता है , किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।