BNS अध्याय XI हिंदी में – धारा 189 से 197

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय XI (धारा 189 से 197) · Read in English

धारा 189 – गैरकानूनी जमावड़ा

189(1) BNS | BNS 189(1) | Unlawful assembly meaning पांच या अधिक व्यक्तियों का जमाव विधि विरुद्ध जमाव कहा जाता है, यदि उस जमाव में शामिल व्यक्तियों का समान उद्देश्य हो,—
(a) आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन से केंद्रीय सरकार को, या किसी राज्य सरकार को, या संसद को, या किसी राज्य के विधान मंडल को, या किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक की वैध शक्तियों का प्रयोग करने से रोककर आतंकित करना; या
(b) किसी भी कानून या कानूनी प्रक्रिया के क्रियान्वयन का विरोध करना;
(c) किसी रिष्टि (नुकसान पहुंचाना) या आपराधिक अतिचार (अवैध रूप से दूसरों के अधिकारों, समय आदि पर नियंत्रण करना) या अन्य अपराध का करना; या
(d) किसी व्यक्ति पर आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा किसी संपत्ति का कब्जा लेना या प्राप्त करना या किसी व्यक्ति को किसी मार्ग के उपयोग के अधिकार से या जल का उपयोग करने के अधिकार से या किसी अन्य अमूर्त अधिकार से वंचित करना, जिस पर वह कब्ज़ा/अधिकार रखता हो, या किसी कथित अधिकार को लागू कराना; या
(d) आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा किसी व्यक्ति को ऐसा करने के लिए मजबूर करना, जिसे करने के लिए वह कानूनी रूप से बाध्य नहीं है या ऐसा कार्य करने से रोकना, जिसे करने के लिए वह कानूनी रूप से हकदार है। स्पष्टीकरण: जिन लोगों का जमाव एकत्रित होते समय गैर-कानूनी नहीं था, वह बाद में गैर-कानूनी जमाव बन सकता है। नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(1), भारतीय दंड संहिता की धारा 141 के समरूप है। 189(2) BNS | BNS 189(2) जो कोई उन तथ्यों से परिचित होते हुए, जो किसी जमाव को विधि विरुद्ध जमाव बनाते हैं, ऐसे जमाव में जानबूझकर सम्मिलित होता है या उसमें बना रहता है, तो यह कहा जाएगा कि वह उस विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य है और ऐसे सदस्य को 6 महीने तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। उदाहरण: भूरा ऐसे लोगों के जमाव में जानबूझकर सम्मिलित हो जाता है, जो अवैध तरीके से रोड जाम करके मारपीट करते हैं, ऐसे मामले में भूरा को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 6 माह तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(2), भारतीय दंड संहिता की धारा 142 एवं 143 के समरूप है। 189(3) BNS | BNS 189(3) जो कोई किसी विधि विरुद्ध जमाव में यह जानते हुए, कि ऐसे विधिविरुद्ध जमाव को तितर-बितर करने का आदेश विधि द्वारा दिया गया है, सम्मिलित होगा या बना रहेगा, तो उसे 2 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। उदाहरण: लालू ऐसे लोगों के जमाव में यह जानते हुए भी सम्मिलित हो जाता है, जो विधिपूर्वक जमाव को हटाने के आदेश के बावजूद अवैध तरीके से इकट्ठा हुए हैं, ऐसे मामले में लालू को उपरोक्त उपाधारा के अनुसार 2 साल तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(3), भारतीय दंड संहिता की धारा 145 के समरूप है। 189(4) BNS | BNS 189(4) जो कोई किसी घातक हथियार से या ऐसी चीज से, जिसे आक्रामक हथियार के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु होने की संभावना है, सज्जित होकर विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य बनेगा, तो उसे 2 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। उदाहरण: कालू तलवार लेकर ऐसे लोगों के जमाव में जाकर सम्मिलित हो जाता है, जो विधि विरुद्ध तरीके से कार्य कर रहे थे, ऐसे मामले में कालू को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 2 साल तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(4), भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के समरूप है। 189(5) BNS | BNS 189(5) जो कोई पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जमाव में, जिससे लोक शांति भंग होना संभावित हो, ऐसे जमाव को विधिपूर्वक तितर-बितर किए जाने के आदेश दिए जाने के बाद भी उसमें सम्मिलित होगा या बना रहेगा, तो उसे 6 महीने तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण: यदि वह जमाव उपधारा (1) के अंतर्गत विधि विरुद्ध जमाव हो, तो अपराधी को उपाधारा (3) के अधीन दंडित किया जाएगा। उदाहरण: लालसिंह ने अपने खानदान के 10 सदस्यों के साथ मिलकर अपनी गली में आने जाने वाले बाइक सवार लोगों पर रोक लगाने की मंशा से डंडे खड़े कर दिए और दबंगता से बाइक सवार लोगों को गली में आने से रोक दिया, ऐसे मामले में यदि लाल सिंह और उसके खानदान के 10 सदस्यों पर कानूनी कार्यवाही होगी तो उन्हें उपरोक्त उपधारा के अनुसार 6 माह तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(5), कुछ परिवर्तनों के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के समरूप है। 189(6) BNS | BNS 189(6) जो कोई किसी व्यक्ति को किसी विधि विरुद्ध जमाव में शामिल होने या उसका सदस्य बनने के लिए भाड़े पर रखता है या नियुक्त करता है या नियुक्त करने में सहयोग करता है, तो उसे ऐसे विधि विरुद्ध जमाव के सदस्य के रूप में ही दंडित किया जाएगा, और यदि, इस प्रकार विधि विरुद्ध जमाव में जुड़े व्यक्ति द्वारा कोई अपराध किया जाता है, तो उसे ऐसे जमाव में शामिल करने वाले व्यक्ति को उसी प्रकार दंडित किया जाएगा, कि उसने स्वयं ऐसा अपराध किया हो। उदाहरण: भूरा ने अपने शहर के 50 नौजवानों को ₹500 प्रतिदिन देकर वर्तमान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके प्रशासन को खरीदने का कार्य सौंप दिया, उनमें से एक व्यक्ति ने न्यायिक कार्यवाही के दौरान दरोगा पर पत्थर फेंका और वहां से भाग गया, जिससे वह दरोगा घायल हो गया। ऐसे मामले में उस दरोगा के घायल होने के लिए भूरा को दोषी समझ जाएगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(6), भारतीय दंड संहिता की धारा 150 के समरूप है। 189(7) BNS | BNS 189(7) जो कोई किसी विधि विरुद्ध जमाव के सदस्यों को किसी घर या उसके कब्जे या प्रभार में या नियंत्रण के अधीन किसी परिसर में आश्रय देता है या ऐसे लोगों को जमाव करने देता है या यह जानते हुए, कि ऐसे व्यक्ति किसी विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य बनने के लिए भाड़े पर लिए गए हैं, लगाए गए हैं या नियोजित किए गए हैं या उससे जुड़ने के लिए भाड़े पर लिए जाने हैं या भाड़े पर लगाए जाने हैं या नियोजित किए जाने हैं, तो आश्रय देने वाले व्यक्ति को 6 महीने तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। उदाहरण: दादरी शहर के जीटी रोड पर, जोकि एक सार्वजनिक स्थान है जहाँ भीड़ भाड़ वाला इलाका है, वहां दलित समुदाय ने एक नए बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया, जिससे रस्ते में आने जाने वालों के लिए काफी कष्ट हुआ, विरोध प्रदर्शन के बाद सभी लोग वहीं जीटी रोड पर भूरा के फार्म हाउस में ही ठहरे और विश्राम किया। ऐसे मामले में भूरा को विधि विरुद्ध जमाव के सदस्यों को अपने फार्म हाउस पर आश्रय देने के लिए उपरोक्त उपाधारा के अनुसार 6 महीने तक के कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(7), भारतीय दंड संहिता की धारा 157 के समरूप है। 189(8) BNS | BNS 189(8) जो कोई उपाधारा (1) में बताए गए कृत्यों को करता है या करने में सहायता करता है या भाड़े पर लेने या नियोजन किए जाने हेतु प्रयास करता है या प्रस्ताव करता है या नियोजित है या भाड़े पर लिया गया है, तो उसे 6 महीने तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। उदाहरण: भल्ला एक ब्राह्मण समुदाय का नेता है, उसने ब्राह्मण समुदाय के आरक्षण को लेकर लोगों की एक सभा बुलाई और प्रशाशन से बिना अनुमति लिए अपने शहर के बाजार के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में खूब हल्ला मचाया, जिससे वहां के लोग काफी परेशान हुए, बाद में पुलिस बल के रोकने पर भी वो नहीं रुके, ऐसे मामले में भल्ला को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 6 महीने तक के कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(8), कुछ परिवर्तनों के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 158 के समरूप है। 189(9) BNS | BNS 189(9) जो कोई उपाधारा (8) में अनुसार नियोजित या किराए पर लिए जाने के बाद किसी घातक हथियार के साथ या किसी ऐसी चीज के साथ सशस्त्र हो जाता है या किसी दूसरे को उसी प्रकार से सशस्त्र होने की पेशकश करता है, जिसका उपयोग अपराध के हथियार के रूप में करने से किसी की मृत्यु होने की संभावना है, तो उसे 2 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। उदाहरण: खालिद एक मुस्लिम समुदाय का प्रभावी नेता है, खालिद ने प्रशासन से अनुमति लिए बिना ही तीन तलाक के कानून को खारिज करने के लिए विरोध प्रदर्शन करने को लेकर अपने शहर में जगह-जगह पर्चे छपवा दिए और विरोध प्रदर्शन में सम्मिलित होने पर ₹500 प्रतिदिन देने का दावा किया, विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद पुलिस बल ने आदेश पर उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया तो देखा कि भाड़े पर लाए गए सलीम के पास बंदूक थी, ऐसे मामले में खालिद और सलीम को उपरोक्त उपाधारा के अनुसार 2 साल तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। (बाकि लोगों पर भी अलग से कार्रवाई होगी) नोट: भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(9), कुछ परिवर्तनों के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 158 के समरूप है।

धारा 190 – गैरकानूनी सभा का प्रत्येक सदस्य सामान्य उद्देश्य के अभियोजन में किए गए अपराध का दोषी है

यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा उस जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में अपराध किया जाता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है, जिसका किया जाना उस जमाव के सदस्य उस उ‌द्देश्य को अग्रसर करने में सम्भाव्य जानते थे, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस जमाव का सदस्य है, उस अपराध का दोषी होगा ।

धारा 191 – दंगा

(1) जब कभी विधिविरुद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा ऐसे जमाव के सामान्य उ‌द्देश्य को अग्रसर करने में बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है, तब ऐसे जमाव का प्रत्येक सदस्य बलवा करने के अपराध का दोषी होगा ।
(2) जो कोई, बलवा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(3) जो कोई, घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी संभाव्य है, सज्जित होते हुए बलवा करने का दोषी है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

धारा 192 – दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना

जो कोई भी दुर्भावनापूर्ण तरीके से, या स्वेच्छा से कुछ भी करके, जो कि गैरकानूनी है, किसी व्यक्ति को उकसाता है या यह जानते हुए कि इस तरह के उकसावे के कारण दंगा करने का अपराध किया जाएगा, यदि परिणामस्वरूप दंगा का अपराध किया जाता है, तो उसे उकसाना होगा। ऐसे उकसावे के लिए, किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि दंगा करने का अपराध नहीं किया जाता है, तो किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 193 – उस भूमि के मालिक, कब्जाधारी आदि का दायित्व, जिस पर गैरकानूनी सभा या दंगा होता है

(1) जब भी कोई गैरकानूनी सभा या दंगा होता है, तो उस भूमि का मालिक या कब्जाधारी जिस पर ऐसी गैरकानूनी सभा आयोजित की जाती है, या ऐसा दंगा किया जाता है, और ऐसी भूमि में रुचि रखने वाला या दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति दंडनीय होगा। जुर्माने की राशि एक हजार रुपये से अधिक नहीं होगी, यदि वह या उसका एजेंट या प्रबंधक यह जानते हुए कि ऐसा अपराध किया जा रहा है या किया गया है, या यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा होने की संभावना है, इसकी जल्द से जल्द सूचना अपने कार्यालय में न दें। निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को शक्ति दें, और यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि यह होने वाला है, तो इसे रोकने के लिए अपनी शक्ति में सभी वैध साधनों का उपयोग न करें और, इसके घटित होने की स्थिति में, दंगे या गैरकानूनी जमावड़े को तितर-बितर करने या दबाने के लिए अपनी शक्ति के सभी वैध साधनों का उपयोग न करें।
(2) जब भी कोई दंगा किसी ऐसे व्यक्ति के लाभ के लिए या उसकी ओर से किया जाता है जो उस भूमि का मालिक या कब्जाधारी है जिसके संबंध में ऐसा दंगा होता है या जो ऐसी भूमि में किसी हित का दावा करता है, या किसी विवाद का विषय है जिसने दंगा भड़काना, या जिसने उससे कोई लाभ स्वीकार किया है या प्राप्त किया है, ऐसा व्यक्ति जुर्माने से दंडनीय होगा, यदि उसके या उसके एजेंट या प्रबंधक के पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा दंगा होने की संभावना थी या गैरकानूनी सभा जिसके द्वारा ऐसा दंगा होने की संभावना थी, ऐसे जमावड़े या दंगे को होने से रोकने के लिए और उसे दबाने और तितर-बितर करने के लिए अपनी शक्ति में सभी वैध साधनों का उपयोग नहीं करेगा।
(3) जब भी कोई दंगा किसी ऐसे व्यक्ति के लाभ के लिए या उसकी ओर से किया जाता है जो उस भूमि का मालिक या कब्जाधारी है जिसके संबंध में ऐसा दंगा होता है, या जो ऐसी भूमि में किसी हित का दावा करता है, या किसी विवाद का विषय है जो दंगे को जन्म दिया, या जिसने उससे कोई लाभ स्वीकार किया या प्राप्त किया, ऐसे व्यक्ति का एजेंट या प्रबंधक जुर्माने से दंडनीय होगा, यदि ऐसे एजेंट या प्रबंधक के पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा दंगा होने की संभावना थी, या जिस गैरकानूनी जमावड़े द्वारा ऐसा दंगा किए जाने की संभावना है, वह ऐसे दंगे या जमावड़े को होने से रोकने और उसे दबाने और तितर-बितर करने के लिए अपनी शक्ति में सभी वैध साधनों का उपयोग नहीं करेगा।

धारा 194 – झगड़ा

(1) जब दो या अधिक व्यक्ति, लोकस्थान में लड़कर लोक शान्ति में विघ्न डालते हैं, तब यह कहा जाता है कि वे दंगा करते हैं।
(2) जो कोई, दंगा करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

धारा 195 – दंगा आदि को दबाते समय लोक सेवक पर हमला करना या बाधा डालना

(1) जो कोई किसी गैरकानूनी सभा को तितर-बितर करने, या दंगा या झगड़े को दबाने के प्रयास में किसी लोक सेवक पर हमला करता है या बाधा डालता है या अपने कर्तव्य के निर्वहन में किसी लोक सेवक पर आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। एक अवधि के लिए जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पच्चीस हजार रुपये से कम नहीं होगा, या दोनों के साथ।
(2) जो कोई किसी लोक सेवक पर हमला करने की धमकी देता है या बाधा डालने का प्रयास करता है या गैरकानूनी भीड़ को तितर-बितर करने, या दंगा या झगड़े को दबाने के प्रयास में अपने कर्तव्य के निर्वहन में किसी लोक सेवक को धमकी देता है या आपराधिक बल का उपयोग करने का प्रयास करता है, उसे दंडित किया जाएगा। एक वर्ष तक की अवधि के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 196 – धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना

(1) जो भी— (ए) मौखिक या लिखित शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा या दृश्य प्रतिनिधित्व द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से या अन्यथा, धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय के आधार पर प्रचार करता है या बढ़ावा देने का प्रयास करता है या विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच कोई अन्य आधार, वैमनस्य या शत्रुता, घृणा या द्वेष की भावना; या (बी) कोई भी ऐसा कार्य करेगा जो विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल है, और जो सार्वजनिक शांति को परेशान करता है या बिगाड़ने की संभावना है; या (सी) किसी भी अभ्यास, आंदोलन, ड्रिल या अन्य समान गतिविधि का आयोजन इस इरादे से करता है कि ऐसी गतिविधि में भाग लेने वाले आपराधिक बल या हिंसा का उपयोग करेंगे या प्रशिक्षित होंगे या यह जानते हुए कि ऐसी गतिविधि में भाग लेने वाले आपराधिक बल या हिंसा का उपयोग करेंगे या प्रशिक्षित होंगे आपराधिक बल या हिंसा का उपयोग करें, या आपराधिक बल या हिंसा का उपयोग करने का इरादा रखते हुए ऐसी गतिविधि में भाग लें या यह जानते हुए कि ऐसी गतिविधि में भाग लेने वाले किसी भी धार्मिक के खिलाफ आपराधिक बल या हिंसा का उपयोग करेंगे या प्रशिक्षित होंगे। , नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय और किसी भी कारण से ऐसी गतिविधि ऐसे धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच भय या चिंता या असुरक्षा की भावना पैदा करती है या पैदा होने की संभावना है। कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
(2) जो कोई किसी पूजा स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक समारोहों के प्रदर्शन में लगी किसी सभा में उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध करेगा, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और दंडित भी किया जाएगा। जुर्माना लगाया जा सकता है.

धारा 197 – राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे

(1) जो भी, बोले गए या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्य अभ्यावेदन द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से या अन्यथा, – (ए) ऐसा कोई आरोप लगाता या प्रकाशित करता है कि किसी भी वर्ग के व्यक्ति, किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण, कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा नहीं रख सकते हैं। या भारत की संप्रभुता और अखंडता को कायम रखना; या (बी) यह दावा करता है, परामर्श देता है, सलाह देता है, प्रचारित करता है या प्रकाशित करता है कि किसी भी वर्ग के व्यक्तियों को, किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय का सदस्य होने के कारण, नागरिक के रूप में उनके अधिकारों से वंचित या वंचित किया जाएगा। भारत की; या (सी) किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्य होने के कारण व्यक्तियों के किसी भी वर्ग के दायित्व के संबंध में कोई दावा, वकील, दलील या अपील करता है या प्रकाशित करता है, और ऐसा दावा, वकील, दलील या अपील ऐसे सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य या शत्रुता या घृणा या द्वेष की भावना पैदा करती है या पैदा करने की संभावना है; या (डी) भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली झूठी या भ्रामक जानकारी बनाता है या प्रकाशित करता है, तो कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) जो कोई किसी पूजा स्थल में या धार्मिक पूजा या धार्मिक समारोहों के प्रदर्शन में लगी किसी सभा में उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध करेगा, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और दंडित भी किया जाएगा। जुर्माना लगाया जा सकता है.