BNS अध्याय VIII हिंदी में – धारा 159 से 168

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय VIII (धारा 159 से 168) · Read in English

धारा 159 – विद्रोह के लिए उकसाना, या किसी सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को उसके कर्तव्य से विमुख करने का प्रयास करना

जो कोई भी भारत सरकार की धारा 165 में निर्दिष्ट अधिनियमों के अधीन सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को विद्रोह करने के लिए उकसाता है या ऐसे किसी अधिकारी, सैनिक को बहकाने का प्रयास करता है, नाविक या वायुसैनिक को अपनी निष्ठा या कर्तव्य से विमुख करने पर आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 160 – विद्रोह के लिए उकसाना, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाता है

जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को विद्रोह करने के लिए उकसाएगा, यदि उस उकसावे के परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाता है, तो उसे मृत्युदंड या मृत्युदंड से दंडित किया जाएगा। आजीवन कारावास, या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को विद्रोह करने के लिए उकसाएगा, यदि उस उकसावे के परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाता है, तो उसे मृत्युदंड या मृत्युदंड से दंडित किया जाएगा। आजीवन कारावास, या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

धारा 161 – अपने कार्यालय के निष्पादन के दौरान सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी पर हमले के लिए उकसाना

जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में एक अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अपने कार्यालय के निष्पादन में किसी वरिष्ठ अधिकारी पर हमले के लिए उकसाएगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि तीन साल तक बढ़ सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 162 – ऐसे हमले के लिए उकसाना, यदि हमला किया गया हो

जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में एक अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अपने कार्यालय के निष्पादन में किसी वरिष्ठ अधिकारी पर हमले के लिए उकसाता है, यदि ऐसा हमला किया जाता है उस उकसावे के परिणाम के लिए सात साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 163 – सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को देश छोड़ने के लिए उकसाना

जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को त्यागने के लिए उकसाएगा, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या ठीक है, या दोनों के साथ।

धारा 164 – भगोड़े को शरण देना

जो कोई, इसके बाद अपवाद के रूप में, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में एक अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक ने त्याग दिया है, ऐसे अधिकारी, सैनिक, नाविक या एयरमैन को दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। अपवाद.—यह प्रावधान उस मामले पर लागू नहीं होता है जिसमें आश्रय भगोड़े के पति या पत्नी द्वारा दिया गया है।

धारा 165 – मास्टर की लापरवाही से व्यापारी जहाज पर भगोड़ा छिप गया

किसी व्यापारिक जहाज का मालिक या प्रभारी व्यक्ति, जिस पर भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना का कोई भी भगोड़ा छिपा हुआ है, इस तरह के छिपाव से अनभिज्ञ होते हुए भी, अधिकतम दंड के लिए उत्तरदायी होगा। तीन हजार रुपये, यदि उसे इस तरह के छिपाव के बारे में पता था, लेकिन ऐसे स्वामी या प्रभारी व्यक्ति के रूप में अपने कर्तव्य की कुछ उपेक्षा के लिए, या जहाज के बोर्ड पर अनुशासन की कुछ कमी के लिए।

धारा 166 – सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अवज्ञा के कार्य के लिए उकसाना

जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अवज्ञा का कार्य करने के लिए उकसाता है, यदि अवज्ञा का ऐसा कार्य किया जाता है उकसाने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 167 – कुछ अधिनियमों के अधीन व्यक्ति

सेना अधिनियम, 1950, भारतीय नौसेना (अनुशासन) अधिनियम, 1934, या वायु सेना अधिनियम, 1950 के अधीन कोई भी व्यक्ति इस अध्याय में परिभाषित किसी भी अपराध के लिए इस संहिता के तहत दंड के अधीन नहीं होगा।

धारा 168 – सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग की जाने वाली पोशाक पहनना या टोकन ले जाना

जो कोई, भारत सरकार की सेना, नौसेना या हवाई सेवा में सैनिक, नाविक या वायुसैनिक न होते हुए, ऐसे सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग की जाने वाली किसी भी पोशाक या प्रतीक के समान कोई पोशाक पहनता है या कोई चिन्ह रखता है। यह माना जा सकता है कि वह ऐसा सैनिक, नाविक या वायुसैनिक है, तो उसे तीन महीने तक की कैद या दो हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।