BNS अध्याय X हिंदी में – धारा 178 से 188

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय X (धारा 178 से 188) · Read in English

धारा 178 – नकली सिक्का, सरकारी टिकट, करेंसी नोट या बैंक नोट

जो कोई भी राजस्व, करेंसीनोट या बैंक-नोट के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी सिक्के, स्टाम्प की जालसाजी करेगा, या जानबूझकर जालसाजी की प्रक्रिया का कोई हिस्सा करेगा, उसे आजीवन कारावास या दोनों में से किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि दस साल तक बढ़ सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण.—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(1) अभिव्यक्ति "बैंक-नोट" का अर्थ है दुनिया के किसी भी हिस्से में बैंकिंग का व्यवसाय करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा जारी किए गए या उसके अधिकार के तहत जारी किए गए मांग पर धारक को धन के भुगतान के लिए एक वचन पत्र या प्रतिबद्धता। किसी भी राज्य या संप्रभु शक्ति के समकक्ष या उसके विकल्प के रूप में उपयोग करने का इरादा है पैसा;
(2) "सिक्का" का वही अर्थ होगा जो सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011 की धारा 2 में दिया गया है और इसमें पैसे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली धातु शामिल है और इसे किसी राज्य या संप्रभु शक्ति द्वारा या उसके अधिकार के तहत मुद्रांकित और जारी किया जाता है। इतना उपयोग किया जाना;
(3) एक व्यक्ति "सरकारी स्टांप की जालसाजी" का अपराध करता है, जो एक मूल्यवर्ग के असली स्टांप को दूसरे मूल्यवर्ग के असली स्टांप जैसा दिखाकर उसकी जालसाजी करता है;
(4) एक व्यक्ति जाली सिक्के का अपराध करता है जो धोखे का अभ्यास करने का इरादा रखता है, या यह जानते हुए कि धोखे का अभ्यास किया जाएगा, एक असली सिक्के को एक अलग सिक्के की तरह दिखने का कारण बनता है; और
(5) "नकली सिक्के" के अपराध में वजन कम करना या संरचना में परिवर्तन, या सिक्के के स्वरूप में परिवर्तन शामिल है।

धारा 179 – सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट का असली, जाली या नकली के रूप में उपयोग करना

जो कोई राजस्व, मुद्रा-नोट या बैंक-नोट के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए किसी जाली या नकली सिक्के, स्टांप को बेचता है या वितरित करता है, या किसी अन्य व्यक्ति से खरीदता है या प्राप्त करता है, या अन्यथा तस्करी करता है या असली के रूप में उपयोग करता है, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह जाली या नकली है, आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, या किसी एक अवधि के लिए कारावास से, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

धारा 180 – जाली या जाली सिक्के, सरकारी मोहर, करेंसी नोट या बैंक

जिस किसी के पास राजस्व के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा जारी कोई जाली या नकली सिक्का, स्टांप, मुद्रा-नोट या बैंक-नोट है, वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह जाली या नकली है और उसका उपयोग करने का इरादा रखता है। असली के रूप में या इसका असली के रूप में उपयोग किया जा सकता है, तो सात साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 181 – सिक्का, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाने या जाली बनाने के लिए उपकरण या सामग्री बनाना या रखना

जो कोई उपयोग करने या जानने के उद्देश्य से कोई मशीनरी, डाई, उपकरण या सामग्री बनाता है या सुधारता है, या बनाने या सुधारने की प्रक्रिया का कोई हिस्सा करता है, या खरीदता है या बेचता है या निपटान करता है, या उसके कब्जे में है या यह विश्वास करने का कारण होने पर कि इसका उपयोग राजस्व, मुद्रा-नोट या बैंक-नोट के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए किसी सिक्के, स्टांप को बनाने या नकली बनाने के लिए किया जाना है, को आजीवन कारावास या कारावास से दंडित किया जाएगा। या तो एक अवधि के लिए विवरण, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 182 – करेंसी नोट या बैंक नोट जैसे दस्तावेज़ बनाना या उपयोग करना

(1) जो कोई ऐसा दस्तावेज़ बनाता है, या बनवाता है, या किसी भी प्रयोजन के लिए उपयोग करता है, या किसी व्यक्ति को वितरित करता है, जो किसी भी तरह से या किसी भी तरह से मिलता-जुलता है, या इतना लगभग मिलता-जुलता है कि धोखा देने के लिए गणना की जाती है, किसी भी करेंसी-नोट या बैंक-नोट पर जुर्माना लगाया जाएगा जो तीन सौ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
(2) यदि कोई व्यक्ति, जिसका नाम किसी दस्तावेज़ पर दिखाई देता है, जिसे बनाना उप-धारा (1) के तहत अपराध है, किसी कानूनी बहाने के बिना, किसी पुलिस-अधिकारी को नाम और पता बताने से इनकार कर देता है। जिस व्यक्ति द्वारा इसे मुद्रित किया गया या अन्यथा बनाया गया, उसे जुर्माने से दंडित किया जाएगा जो छह सौ रुपये तक हो सकता है।
(3) जहां किसी व्यक्ति का नाम किसी दस्तावेज़ पर दिखाई देता है जिसके संबंध में किसी व्यक्ति पर उप-धारा (1) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है या उस दस्तावेज़ के संबंध में उपयोग किए गए या वितरित किए गए किसी अन्य दस्तावेज़ पर, यह तब तक हो सकता है जब तक कि इसके विपरीत न हो साबित हो गया है, तो यह मान लिया जाएगा कि उस व्यक्ति ने दस्तावेज़ बनवाया है।

धारा 183 – सरकार को नुकसान पहुंचाने के इरादे से सरकारी स्टांप वाले पदार्थ से लेखन को मिटाना, या इसके लिए इस्तेमाल किए गए स्टांप को दस्तावेज़ से हटाना

जो कोई, धोखाधड़ी से या सरकार को नुकसान पहुंचाने के इरादे से, राजस्व के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी स्टाम्प, किसी भी लेख या दस्तावेज़ को हटा देगा या मिटा देगा, जिसके लिए ऐसे स्टाम्प का उपयोग किया गया है, या किसी से हटा देगा। किसी ऐसे स्टांप को लिखना या दस्तावेज़ बनाना जिसका उपयोग ऐसे लेखन या दस्तावेज़ के लिए किया गया हो, ताकि ऐसे स्टांप का उपयोग किसी भिन्न लेखन या दस्तावेज़ के लिए किया जा सके, उसे किसी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या ठीक है, या दोनों के साथ।

धारा 184 – ज्ञात सरकारी स्टांप का उपयोग करना जो पहले इस्तेमाल किया गया हो

जो कोई, धोखाधड़ी से या सरकार को नुकसान पहुंचाने के इरादे से, राजस्व के उद्देश्य से सरकार द्वारा जारी किए गए स्टांप का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए करता है, जिसके बारे में वह जानता है कि पहले इस्तेमाल किया गया था, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी। जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 185 – उस चिह्न को मिटाना जो दर्शाता है कि स्टांप का उपयोग किया गया है

जो कोई, धोखाधड़ी से या सरकार को नुकसान पहुंचाने के इरादे से, राजस्व के उद्देश्य से सरकार द्वारा जारी किए गए स्टांप से मिटा देता है या हटा देता है, ऐसे स्टांप पर किसी भी चिह्न को यह दर्शाने के लिए लगाया या लगाया जाता है कि उसका उपयोग किया गया है, या जानबूझकर किसी ऐसे स्टाम्प को अपने कब्जे में रखता है या बेचता है या उसका निपटान करता है जिस पर से ऐसा चिह्न मिटा दिया गया है या हटा दिया गया है, या किसी ऐसे स्टाम्प को बेचता है या उसका निपटान करता है जिसके बारे में वह जानता है कि उसका उपयोग किया गया है, तो उसे दोनों में से किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 186 – काल्पनिक टिकटों का निषेध

(1) जो भी— (ए) जानबूझकर कोई फर्जी स्टांप बनाता है, उसका लेनदेन करता है या बेचता है, या जानबूझकर किसी डाक प्रयोजन के लिए किसी फर्जी स्टांप का उपयोग करता है; या (बी) बिना किसी वैध कारण के, कोई काल्पनिक स्टाम्प अपने कब्जे में रखता है; या (सी) बिना कानूनी बहाने के, कोई फर्जी टिकट बनाने के लिए कोई डाई, प्लेट, उपकरण या सामग्री अपने कब्जे में रखता है, तो उसे जुर्माने से दंडित किया जाएगा जो दो सौ रुपये तक बढ़ सकता है।
(2) कोई भी काल्पनिक टिकट बनाने के लिए किसी भी व्यक्ति के कब्जे में ऐसा कोई भी टिकट, डाई, प्लेट, उपकरण या सामग्री जब्त की जा सकती है और यदि जब्त की जाती है तो उसे जब्त कर लिया जाएगा।
(3) इस धारा में "काल्पनिक स्टाम्प" का अर्थ है डाक शुल्क की दर दर्शाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला कोई भी स्टाम्प, या सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी स्टाम्प की कोई प्रतिकृति या नकल या प्रतिनिधित्व, चाहे वह कागज पर हो या अन्यथा। उस उद्देश्य के लिए।
(4) इस खंड में और धारा 176 से 179, और धारा 181 से 183 दोनों में, "सरकारी" शब्द, जब डाक की दर को दर्शाने के उद्देश्य से जारी किए गए किसी भी टिकट के संबंध में या उसके संदर्भ में उपयोग किया जाता है। , धारा 2 के खंड (11) में किसी भी बात के बावजूद, भारत के किसी भी हिस्से में या किसी विदेशी देश में कार्यकारी सरकार को प्रशासित करने के लिए कानून द्वारा अधिकृत व्यक्ति या व्यक्तियों को शामिल माना जाएगा।

धारा 187 – टकसाल में कार्यरत व्यक्ति सिक्के का वजन या संरचना कानून द्वारा निर्धारित वजन से भिन्न बनाता है

जो कोई, भारत में विधिपूर्वक स्थापित किसी टकसाल में कार्यरत रहते हुए, उस टकसाल से जारी किसी भी सिक्के को वजन से भिन्न वजन या संरचना का बनाने के इरादे से कोई कार्य करता है, या जो करने के लिए वह कानूनी रूप से बाध्य है उसे छोड़ देता है। या कानून द्वारा निर्धारित कंपोजीशन के लिए, किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 188 – टकसाल से सिक्का बनाने के उपकरण को गैरकानूनी तरीके से लेना

जो कोई भी, वैध प्राधिकार के बिना, भारत में विधिपूर्वक स्थापित किसी भी टकसाल से कोई सिक्का बनाने वाला उपकरण या उपकरण निकालेगा, उसे किसी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। .