BNS अध्याय VII हिंदी में – धारा 147 से 158

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय VII (धारा 147 से 158) · Read in English

धारा 147 – भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ना, या युद्ध छेड़ने का प्रयास करना, या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाना

जो कोई भी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ता है, या ऐसे युद्ध छेड़ने का प्रयास करता है, या ऐसे युद्ध छेड़ने के लिए उकसाता है, उसे मौत की सजा दी जाएगी, या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। रेखांकन ए भारत सरकार के खिलाफ विद्रोह में शामिल हो जाता है। ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

धारा 148 – धारा 145 द्वारा दंडनीय अपराध करने की साजिश

जो कोई भी भारत के भीतर या बाहर और बाहर धारा 145 द्वारा दंडनीय किसी भी अपराध को करने की साजिश करता है, या आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन के माध्यम से केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार को भयभीत करने की साजिश करता है, उसे दंडित किया जाएगा। आजीवन कारावास, या किसी भी प्रकार का कारावास, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण.-इस धारा के अंतर्गत षड़यंत्र रचने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसके अनुसरण में कोई कार्य या अवैध लोप घटित हो।

धारा 149 – भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे से हथियार आदि इकट्ठा करना

जो कोई भी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने के इरादे से आदमी, हथियार या गोला-बारूद इकट्ठा करता है या अन्यथा युद्ध करने की तैयारी करता है, उसे आजीवन कारावास या अधिकतम अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा। दस साल और जुर्माना भी देना होगा।

धारा 150 – युद्ध छेड़ने की योजना को सुविधाजनक बनाने के इरादे से छिपाना

जो कोई भी किसी कार्य द्वारा, या किसी अवैध चूक द्वारा, भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की मंशा को छिपाता है, इस आशय से कि इस तरह के छिपाव से युद्ध छेड़ने में सुविधा होगी, या यह संभावना है कि इस तरह के छिपाव से युद्ध छेड़ने में सुविधा होगी। ऐसा युद्ध करने पर दस वर्ष तक की कैद की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 151 – किसी वैध शक्ति के प्रयोग को मजबूर करने या रोकने के इरादे से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना

जो कोई भी भारत के राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल की किसी भी वैध शक्ति का प्रयोग करने या किसी भी तरीके से प्रयोग करने से रोकने के लिए प्रेरित या मजबूर करने के इरादे से हमला करता है या गलत तरीके से रोकता है, या गलत तरीके से प्रयास करता है आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन के माध्यम से रोकना, या भयभीत करना, या भयभीत करने का प्रयास करना, ऐसे राष्ट्रपति या राज्यपाल को किसी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही दंडित किया जाएगा। जुर्माने का भागी होगा.

धारा 152 – भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य

जो कोई, प्रयोजनपूर्वक या जानबूझकर, बोले गए या लिखे गए शब्दों ‌द्वारा या संकेतों ‌द्वारा, या दृश्यरूपण या इलैक्ट्रानिक संसूचना द्वारा या वितीय साधन के प्रयोग द्वारा या अन्यथा अलगाव या सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक क्रियाकलापों को प्रदीप्त करता है या प्रदीप्त करने का प्रयत्न करता है या अलगाववादी क्रियाकलार्पो की भावना को बढ़ावा देता है या भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है या ऐसे कृत्य में सम्मिलित होता है या उसे कारित करता है, वह आजीवन कारावास से. या ऐसे कारावास से जो सात वर्ष तक हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । स्पष्टीकरण इस धारा में निर्दिष्ट क्रियाकलाप प्रदीप्त किए बिना या प्रदीप्त करने का प्रयत्न के बिना विधिपूर्ण साधर्ना द्वारा उनको परिवर्तित कराने की दृष्टि से सरकार के उपार्यो या प्रशासनिक या अन्य क्रिया के प्रति अननुमोदन प्रकट करने वाली टीका-टिप्पणियां, इस धारा के अधीन अपराध का गठन नहीं करती है।

धारा 153 – भारत सरकार के साथ शांति रखने वाले किसी भी विदेशी राज्य की सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना

जो कोई भी भारत सरकार के साथ शांति रखने वाले किसी विदेशी राज्य की सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ता है या ऐसे युद्ध छेड़ने का प्रयास करता है, या ऐसे युद्ध छेड़ने के लिए उकसाता है, उसे आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसमें जुर्माना भी जोड़ा जा सकता है, या किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, जिसमें जुर्माना भी जोड़ा जा सकता है, या जुर्माना।

धारा 154 – भारत सरकार के साथ शांति में रहने वाले विदेशी राज्य के क्षेत्रों पर लूटपाट करना

जो कोई भी भारत सरकार के साथ शांति में रहने वाले किसी विदेशी राज्य के क्षेत्र में लूटपाट करेगा, या लूटपाट करने की तैयारी करेगा, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही उसे दंडित भी किया जाएगा। इस तरह के लूट-पाट को अंजाम देने में इस्तेमाल की गई या इस्तेमाल किए जाने का इरादा रखने वाली, या ऐसे लूट-पाट से अर्जित की गई किसी भी संपत्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उसे जब्त किया जा सकता है।

धारा 155 – धारा 153 और 154 में उल्लिखित युद्ध या लूटपाट से ली गई संपत्ति प्राप्त करना

जो कोई यह जानते हुए कि धारा 151 और 152 में वर्णित किसी भी अपराध को करने में संपत्ति ली गई है, कोई संपत्ति प्राप्त करता है, तो उसे किसी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही उसे दंडित भी किया जाएगा। जुर्माने और इस प्रकार प्राप्त संपत्ति को जब्त करने के लिए उत्तरदायी होगा।

धारा 156 – लोक सेवक स्वेच्छा से राज्य या युद्ध कैदी को भागने की इजाजत दे रहा है

जो कोई लोक सेवक होते हुए और किसी राज्य कैदी या युद्ध कैदी की अभिरक्षा में रहते हुए, स्वेच्छा से ऐसे कैदी को किसी ऐसे स्थान से भागने की अनुमति देता है जहां ऐसा कैदी कैद है, तो उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 157 – लोक सेवक लापरवाही से ऐसे कैदी को भागने में कष्ट दे रहा है

जो कोई लोक सेवक होते हुए और किसी राज्य कैदी या युद्ध कैदी की अभिरक्षा में रहते हुए, लापरवाही से ऐसे कैदी को कारावास के किसी भी स्थान से भागने पर मजबूर करता है, जहां ऐसा कैदी कैद है, तो उसे एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा। इसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 158 – ऐसे कैदी को भागने में सहायता करना, छुड़ाना या आश्रय देना

जो कोई जानबूझकर किसी राज्य कैदी या युद्धबंदी को वैध हिरासत से भागने में सहायता या सहायता करता है, या ऐसे किसी कैदी को बचाता है या छुड़ाने का प्रयास करता है, या ऐसे किसी कैदी को शरण देता है या छुपाता है जो वैध हिरासत से भाग गया है, या प्रस्ताव देता है या देने का प्रयास करता है। ऐसे कैदी को दोबारा पकड़ने में किसी भी तरह का विरोध करने पर आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण। -एक राज्य कैदी या युद्धबंदी, जिसे भारत में कुछ सीमाओं के भीतर अपनी पैरोल पर बड़े पैमाने पर रहने की अनुमति है, कहा जाता है कि यदि वह उस सीमा से परे चला जाता है जिसके भीतर उसे बड़े पैमाने पर रहने की अनुमति है