भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय XIII (धारा 206 से 226) · Read in English
धारा 206 – समन या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार होना
जो कोई किसी लोक सेवक, जैसे कि लोक सेवक, ऐसे समन, नोटिस या आदेश जारी करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम है, से सम्मन, नोटिस या आदेश की कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाता है, – (ए) एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से; (बी) जहां ऐसा समन या नोटिस या आदेश व्यक्तिगत रूप से या एजेंट द्वारा उपस्थित होने के लिए है, या किसी न्यायालय में दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेश करने के लिए है, उसे साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना से दंडित किया जाएगा। दस हजार रुपये तक या दोनों के साथ बढ़ाया जा सकता है।
धारा 207 – समन या अन्य कार्यवाही की तामील को रोकना, या उसके प्रकाशन को रोकना
जो कोई भी किसी भी तरीके से जानबूझकर खुद को, या किसी अन्य व्यक्ति को, ऐसे समन, नोटिस या आदेश जारी करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम किसी भी लोक सेवक से कार्यवाही करने वाले किसी भी सम्मन, नोटिस या आदेश की तामील करने से रोकता है, या जानबूझकर ऐसे किसी भी सम्मन, नोटिस या आदेश को किसी भी स्थान पर वैध रूप से चिपकाने से रोकता है या जानबूझकर ऐसे किसी भी सम्मन, नोटिस या आदेश को किसी भी स्थान से हटा देता है जहां वह वैध रूप से चिपकाया जाता है या जानबूझकर किसी लोक सेवक के अधिकार के तहत किसी भी उद्घोषणा को वैध बनाने से रोकता है। ऐसे लोक सेवक के रूप में कानूनी रूप से सक्षम, ऐसी उद्घोषणा करने का निर्देश देने के लिए,– (ए) एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जाएगा; (बी) जहां समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा में व्यक्तिगत रूप से या एजेंट द्वारा उपस्थित होना है, या अदालत में एक दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेश करना है, जिसमें छह महीने तक की साधारण कारावास की सजा हो सकती है, या जुर्माना हो सकता है। दस हजार रुपये तक या दोनों के साथ बढ़ाया जा सकता है।
धारा 208 – लोक सेवक के आदेश के अनुपालन में गैर उपस्थिति
जो कोई किसी लोक सेवक से सम्मन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा की कार्यवाही के अनुपालन में किसी निश्चित स्थान और समय पर व्यक्तिगत रूप से या किसी एजेंट द्वारा उपस्थित होने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, ऐसे लोक सेवक के रूप में, उसे जारी करने के लिए , जानबूझकर उस स्थान या समय पर उपस्थित होने से चूक जाता है या उस स्थान से, जहां वह उपस्थित होने के लिए बाध्य है, उस समय से पहले चला जाता है जिस समय उसके लिए प्रस्थान करना वैध है,–- (ए) एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से; (बी) जहां समन, नोटिस, आदेश या उद्घोषणा के लिए किसी न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से या एजेंट द्वारा उपस्थित होना हो, तो छह महीने तक की अवधि के लिए साधारण कारावास, या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। . रेखांकन (ए) ए, कानूनी रूप से उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए बाध्य है, उस न्यायालय से जारी एक सम्मन का पालन करते हुए, जानबूझकर उपस्थित होने से चूक जाता है। ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। (बी) ए, एक जिला न्यायाधीश के समक्ष गवाह के रूप में उपस्थित होने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होने के कारण, उस जिला न्यायाधीश द्वारा जारी किए गए सम्मन का पालन करते हुए जानबूझकर उपस्थित होने से चूक जाता है। ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 209 – 2023 के अधिनियम की धारा 82 के तहत उद्घोषणा के जवाब में गैर उपस्थिति
जो कोई भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 की उप-धारा (1) के तहत प्रकाशित उद्घोषणा द्वारा अपेक्षित निर्दिष्ट स्थान और निर्दिष्ट समय पर उपस्थित होने में विफल रहता है, उसे एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा। तीन साल या जुर्माना या दोनों या सामुदायिक सेवा के साथ, और जहां उस धारा की उप-धारा (4) के तहत उसे घोषित अपराधी घोषित करने की घोषणा की गई है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे बढ़ाया जा सकता है। सात साल और जुर्माना भी देना होगा।
धारा 210 – इसे प्रस्तुत करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को दस्तावेज प्रस्तुत करने में चूक
जो कोई, किसी भी लोक सेवक को किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को प्रस्तुत करने या वितरित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, जानबूझकर उसे प्रस्तुत करने या वितरित करने से चूक जाता है,–- (ए) एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से; (बी) और जहां दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में पेश या वितरित किया जाना है, उसे साधारण कारावास की सजा हो सकती है, जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। रेखांकन ए, जिला न्यायालय के समक्ष एक दस्तावेज पेश करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होने के कारण, जानबूझकर उसे पेश करने से चूक जाता है। ए ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 211 – इसे देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को नोटिस या जानकारी देने में चूक
जो कोई, किसी भी लोक सेवक को किसी भी विषय पर कोई नोटिस देने या जानकारी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होने के कारण, जानबूझकर ऐसी सूचना देने या ऐसी जानकारी देने से कानून द्वारा अपेक्षित तरीके और समय पर चूक जाता है, – (ए) एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से; (बी) जहां किसी अपराध के घटित होने के संबंध में नोटिस या सूचना देने की आवश्यकता है, या किसी अपराध के घटित होने को रोकने के लिए या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए आवश्यक है, वहां एक अवधि के लिए साधारण कारावास की सजा दी जाएगी। छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों; (सी) जहां नोटिस या जानकारी देने की आवश्यकता भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 447 के तहत पारित आदेश द्वारा की जाती है, जिसमें छह महीने तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। एक हजार रुपये तक, या दोनों के साथ।
धारा 212 – गलत जानकारी प्रस्तुत करना
जो कोई, किसी भी लोक सेवक को किसी भी विषय पर जानकारी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, वह उस विषय पर जानकारी को सत्य मानकर प्रस्तुत करता है, जिसे वह जानता है या उसके गलत होने का विश्वास करने का कारण रखता है,–- (ए) को साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जाएगा; (बी) जहां वह जानकारी जो वह किसी अपराध के घटित होने के संबंध में देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, या किसी अपराध के घटित होने को रोकने के उद्देश्य से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए आवश्यक है, दोनों में से किसी भी प्रकार के कारावास की सजा हो सकती है। जिसकी अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। रेखांकन (ए) ए, एक भूमिधारक, अपनी संपत्ति की सीमा के भीतर एक हत्या के कमीशन के बारे में जानते हुए, जानबूझकर जिले के मजिस्ट्रेट को गलत सूचना देता है कि मौत सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटनावश हुई है। ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है। (बी) ए, एक गांव का चौकीदार, यह जानते हुए कि पड़ोस में रहने वाले जेड के घर में डकैती करने के लिए अजनबियों का एक बड़ा समूह उसके गांव से गुजरा है, और यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 28 है, 2023 निकटतम पुलिस स्टेशन के अधिकारी को उपरोक्त तथ्य की शीघ्र और समय पर जानकारी देने के लिए, जानबूझकर पुलिस अधिकारी को गलत सूचना देता है कि संदिग्ध व्यक्तियों का एक समूह एक अलग स्थान पर एक निश्चित दूर के स्थान पर डकैती करने के उद्देश्य से गांव से होकर गुजरा है। दिशा। यहां ए इस खंड के उत्तरार्ध में परिभाषित अपराध का दोषी है। स्पष्टीकरण.-धारा 209 में और इस धारा में "अपराध" शब्द में भारत के बाहर किसी भी स्थान पर किया गया कोई भी कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता है, तो निम्नलिखित में से किसी भी धारा के तहत दंडनीय होगा, अर्थात् 97, 99, 172 , 173, 174, 175, 301, धारा 303 के खंड (बी) से (डी), धारा 304, 305, 306, 320, 325 और 326 और "अपराधी" शब्द में कोई भी व्यक्ति शामिल है जिस पर दोषी होने का आरोप है ऐसा कोई कृत्य.
धारा 213 – लोक सेवक द्वारा विधिवत अपेक्षित होने पर शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना
जो कोई भी सत्य बोलने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा खुद को बाध्य करने से इनकार करता है, जब एक लोक सेवक द्वारा खुद को बाध्य करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम होने की आवश्यकता होती है, तो उसे एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे बढ़ाया जा सकता है। छह महीने तक की सजा, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
धारा 214 – सवाल करने के लिए अधिकृत लोक सेवक को जवाब देने से इनकार करना
जो कोई किसी लोक सेवक से किसी विषय पर सत्य कहने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस लोक सेवक द्वारा अपनी वैध शक्तियों के प्रयोग में उस विषय से संबंधित पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इंकार करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
धारा 215 – बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना
जो कोई भी अपने द्वारा दिए गए किसी भी बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता है, जब कानूनी रूप से सक्षम लोक सेवक द्वारा उस बयान पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है कि वह उस बयान पर हस्ताक्षर करेगा, तो उसे एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो तीन हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से।
धारा 216 – लोक सेवक या शपथ या प्रतिज्ञान दिलाने के लिए अधिकृत व्यक्ति को शपथ या प्रतिज्ञान पर गलत बयान देना
जो कोई किसी लोक सेवक या कानून द्वारा ऐसी शपथ या प्रतिज्ञान दिलाने के लिए अधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी विषय पर सत्य बयान करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा कानूनी रूप से बाध्य किया जाता है, ऐसे लोक सेवक या पूर्वोक्त अन्य व्यक्ति को, इस बात को छूता हुआ देता है। विषय, कोई भी कथन जो झूठा है, और जिसे वह जानता है या झूठ मानता है या सच नहीं मानता है, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, और इसके लिए उत्तरदायी भी होगा। अच्छा।
धारा 217 – लोक सेवक को किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंचाने के लिए अपनी कानूनी शक्ति का उपयोग करने के इरादे से झूठी जानकारी
जो कोई किसी लोक सेवक को कोई ऐसी जानकारी देता है जिसके बारे में वह जानता है या झूठ मानता है, ऐसा लोक सेवक- (ए) ऐसा कुछ भी करना या छोड़ना जो ऐसे लोक सेवक को नहीं करना चाहिए या छोड़ना चाहिए यदि ऐसी जानकारी जिसके संबंध में तथ्यों की सही स्थिति उसे ज्ञात थी; या (बी) किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने या परेशान करने के लिए ऐसे लोक सेवक की वैध शक्ति का उपयोग करने के लिए, किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों के साथ. रेखांकन (ए) ए एक मजिस्ट्रेट को सूचित करता है कि जेड, एक पुलिस-अधिकारी, जो ऐसे मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ है, कर्तव्य की उपेक्षा या कदाचार का दोषी है, यह जानते हुए कि ऐसी जानकारी झूठी है, और यह जानते हुए भी कि जानकारी मजिस्ट्रेट को नुकसान पहुंचाएगी। Z को बर्खास्त करने के लिए। A ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। (बी) ए ने एक लोक सेवक को झूठी सूचना दी कि ज़ेड के पास एक गुप्त स्थान पर प्रतिबंधित नमक है, यह जानते हुए कि ऐसी जानकारी झूठी है, और यह जानते हुए कि यह संभावना है कि सूचना का परिणाम ज़ेड के परिसर की तलाशी होगी, जिसमें झुंझलाहट होगी। Z. A ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। (सी) एक पुलिसकर्मी को झूठी सूचना देता है कि उस पर एक विशेष गांव के पड़ोस में हमला किया गया और लूट लिया गया। वह अपने हमलावरों में से किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं बताता है, लेकिन यह जानता है कि इस जानकारी के परिणामस्वरूप पुलिस पूछताछ करेगी और ग्रामीणों या उनमें से कुछ को परेशान करने के लिए गांव में तलाशी लेगी। ए ने इस धारा के तहत अपराध किया है।
धारा 218 – किसी लोक सेवक के वैध प्राधिकारी द्वारा संपत्ति लेने का विरोध
जो कोई यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह ऐसा लोक सेवक है, किसी भी लोक सेवक की वैध प्राधिकारी द्वारा किसी संपत्ति को लेने का विरोध करेगा, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे छह तक बढ़ाया जा सकता है। महीने, या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से।
धारा 219 – लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तावित संपत्ति की बिक्री में बाधा डालना
जो कोई किसी लोक सेवक के वैध प्राधिकारी द्वारा बिक्री के लिए पेश की गई संपत्ति की बिक्री में जानबूझकर बाधा डालता है, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच तक बढ़ाया जा सकता है। हजार रुपये, या दोनों के साथ।
धारा 220 – लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तावित संपत्ति की अवैध खरीद या बोली
जो कोई, किसी लोक सेवक के वैध प्राधिकारी द्वारा रखी गई संपत्ति की किसी भी बिक्री पर, किसी भी व्यक्ति के लिए किसी भी संपत्ति की खरीद या बोली लगाता है, चाहे वह खुद या कोई अन्य, जिसे वह जानता है कि वह कानूनी अक्षमता के तहत है उस बिक्री पर उस संपत्ति की खरीद, या ऐसी संपत्ति के लिए बोली लगाने का इरादा उन दायित्वों को पूरा करने का नहीं है जिनके तहत वह ऐसी बोली लगाकर खुद को रखता है, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना लगाया जा सकता है। दो सौ रुपये तक बढ़ाएँ, या दोनों के साथ।
धारा 221 – लोक सेवक को सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालेगा, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दो हजार पांच सौ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जाएगा। .
धारा 222 – सहायता देने के लिए कानून द्वारा बाध्य होने पर लोक सेवक की सहायता करने में चूक
जो कोई, किसी लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कर्तव्य के निष्पादन में सहायता देने या देने के लिए कानून द्वारा बाध्य होने के कारण, जानबूझकर ऐसी सहायता देने से चूक जाता है,– (ए) एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दो हजार पांच सौ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से; (बी) और जहां किसी न्यायालय द्वारा कानूनी रूप से जारी किसी भी प्रक्रिया को निष्पादित करने या किसी अपराध के घटित होने को रोकने, या दंगा या झगड़े को दबाने के प्रयोजनों के लिए ऐसी मांग करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम लोक सेवक द्वारा ऐसी सहायता की मांग की जाती है, या किसी अपराध के आरोपी या दोषी व्यक्ति को पकड़ने, या कानूनी हिरासत से भागने पर, साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों।
धारा 223 – लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
जो कोई, यह जानते हुए कि वह ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किसी आदेश से, जो ऐसे आदेश को प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है, कोई कार्य करने से विरत रहने के लिए या अपने कब्जे में की, या अपने प्रबंध के अधीन, किसी संपत्ति के बारे में कोई विशेष व्यवस्था करने के लिए निर्दिष्ट किया गया है, ऐसे निदेश की अवज्ञा करता है.- (क) यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित किन्हीं व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति, या बाधा, क्षोभ या क्षति का जोखिम कारित करे, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । (ख) और जहां ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती है, या बलवा या दंगा कारित करती है, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । स्पष्टीकरण यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का आशय अपहानि उत्पन्न करने का हो या उसके ध्यान में यह हो कि उसकी अवज्ञा करने से अपहानि होना संभाव्य है। यह पर्याप्त है कि जिस आदेश की वह अवज्ञा करता है, उस आदेश का उसे जान है, और यह भी ज्ञान है कि उसके अवज्ञा करने से अपहानि उत्पन्न होती या होनी संभाव्य है। दृष्टांत कोई आदेश, जिसमें यह निदेश है कि अमुक धार्मिक जुलूस अमुक सड़क से होकर न निकले, ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जो ऐसा आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है। क यह जानते हुए उस आदेश की अवज्ञा करता है, और उसके द्वारा बलवे का संकट कारित करता है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 224 – लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी
जो कोई किसी लोक सेवक को, या किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में उसका मानना है कि उस लोक सेवक का हित है, चोट पहुंचाने की धमकी देता है, उस लोक सेवक को कोई कार्य करने के लिए प्रेरित करने के लिए, या किसी भी कार्य को करने से रोकने या विलंब करने के लिए। ऐसे लोक सेवक के सार्वजनिक कार्यों के अभ्यास से संबंधित कृत्य के लिए दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 225 – किसी व्यक्ति को लोक सेवक की सुरक्षा के लिए आवेदन करने से रोकने के लिए चोट पहुंचाने की धमकी
जो कोई किसी व्यक्ति को किसी भी चोट के खिलाफ सुरक्षा के लिए कानूनी रूप से सशक्त किसी भी लोक सेवक को ऐसी सुरक्षा देने या ऐसा करने के लिए कानूनी आवेदन करने से रोकने या रोकने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से किसी भी व्यक्ति को चोट पहुंचाने की धमकी देता है। संरक्षण देने पर एक वर्ष तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 226 – वैध शक्ति के प्रयोग को मजबूर करने या रोकने के लिए आत्महत्या करने का प्रयास
जो कोई भी किसी लोक सेवक को उसके आधिकारिक कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए मजबूर करने या रोकने के इरादे से आत्महत्या करने का प्रयास करेगा, उसे साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना या दोनों से या सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा।