भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय VI (धारा 100 से 146) · Read in English
धारा 100 – गैर इरादतन हत्या
जो कोई अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे को बेचता है, किराए पर देता है, या अन्यथा निपटान करता है, इस इरादे से कि ऐसे बच्चे को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध संबंध या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा। , या यह जानते हुए कि यह संभावना है कि ऐसे व्यक्ति को किसी भी उम्र में नियोजित किया जाएगा या ऐसे किसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा, किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। स्पष्टीकरण 1.—जब अठारह वर्ष से कम आयु की महिला को किसी वेश्या को या वेश्यालय रखने या प्रबंधित करने वाले किसी व्यक्ति को बेच दिया जाता है, किराये पर दे दिया जाता है, या अन्यथा बेच दिया जाता है, तो ऐसी महिला का इस प्रकार निपटान करने वाला व्यक्ति, जब तक कि इसके विपरीत न हो साबित हो गया है, तो यह माना जाएगा कि उसे इस इरादे से ठिकाने लगाया गया है कि उसका उपयोग वेश्यावृत्ति के उद्देश्य के लिए किया जाएगा। स्पष्टीकरण 2.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए "अवैध संभोग" का अर्थ उन व्यक्तियों के बीच यौन संबंध है जो विवाह या किसी संघ या बंधन से एकजुट नहीं हैं, जो हालांकि विवाह की श्रेणी में नहीं आता है, लेकिन समुदाय के व्यक्तिगत कानून या रीति-रिवाज द्वारा मान्यता प्राप्त है। वे किससे संबंधित हैं या, जहां वे अलग-अलग समुदायों से संबंधित हैं, ऐसे दोनों समुदायों से, उनके बीच एक अर्ध-वैवाहिक संबंध बनता है।
धारा 101 – हत्या
जो कोई अठारह वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को इस इरादे से खरीदता है, किराये पर लेता है या अन्यथा कब्ज़ा प्राप्त करता है कि ऐसे व्यक्ति को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध संबंध या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा। या यह जानते हुए कि ऐसे बच्चे को किसी भी उम्र में नियोजित किया जाएगा या ऐसे किसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा, उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जो सात साल से कम नहीं होगी लेकिन जिसे चौदह साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। स्पष्टीकरण 1.-कोई भी वेश्या या वेश्यालय चलाने या प्रबंधित करने वाला कोई भी व्यक्ति, जो अठारह वर्ष से कम आयु की महिला को खरीदता है, किराये पर लेता है या अन्यथा उसका कब्ज़ा प्राप्त करता है, जब तक कि विपरीत साबित न हो जाए, यह माना जाएगा कि उसने ऐसी महिला का कब्ज़ा प्राप्त कर लिया है। इरादा यह था कि उसका उपयोग वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से किया जाएगा। स्पष्टीकरण 2.-"अवैध संभोग" का वही अर्थ है जो धारा 96 में है।
धारा 102 – जिस व्यक्ति की मृत्यु का इरादा था उसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु कारित करके गैर इरादतन हत्या
यदि कोई व्यक्ति, ऐसा कुछ भी करके, जिसका वह इरादा रखता है या जानता है कि मृत्यु कारित होने की संभावना है, किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु कारित करके गैर इरादतन हत्या करता है, जिसकी मृत्यु न तो वह चाहता है और न ही जानता है कि मौत कारित होने की संभावना है, तो गैर इरादतन हत्या की जाती है। अपराधी द्वारा इस प्रकार का वर्णन किया गया है कि यह तब होता जब उसने उस व्यक्ति की मृत्यु कारित की होती जिसकी मृत्यु वह चाहता था या स्वयं जानता था कि वह मृत्यु कारित कर सकता है।
धारा 103 – हत्या के लिए सजा
(1) जो कोई हत्या करेगा, वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) जब पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का कोई समूह मिलकर मूलवंश, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, वैयक्तिक विश्वास या किसी अन्य समरूप आधार पर हत्या कारित करते हैं तो ऐसे समूह का प्रत्येक सदस्य मृत्यु या आजीवन कारावास के दंड से दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 104 – आजीवन कारावास की सजा
जो कोई, आजीवन कारावास के दण्डादेश के अधीन होते हुए हत्या करेगा, वह मृत्यु या आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति का शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, से दण्डित किया जाएगा ।
धारा 105 – गैर इरादतन हत्या के लिए सजा
जो कोई, ऐसा आपराधिक मानव वध करता है, जो हत्या की कोटि में नहीं आता है, यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु कारित की गई है, मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु होना संभाव्य है, कारित करने के आशय से किया जाता है, तो वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध के लिए दण्ड । दायी होगा, या यदि वह कार्य इस आशय के साथ कि उससे मृत्यु कारित करना सम्भाव्य है, किन्तु मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु कारित करना सम्भाव्य है, कारित करने के किसी आशय के बिना किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा ।
धारा 106 – लापरवाही से मौत का कारण
(1) जो कोई, उतावलेपन से या उपेक्षापूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करता है, जो आपराधिक मानव वध की कोटि में नहीं आता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा और यदि ऐसा कृत्य किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा, जब वह चिकित्सीय प्रक्रिया संपादित कर रहा है, कारित किया जाता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी" से ऐसा चिकित्सा व्यवसायी अभिप्रेत है जिसके पास राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के अधीन मान्यताप्राप्त कोई चिकित्सा अर्हता है और जिसका नाम उस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या किसी राज्य चिकित्सा रजिस्टर में प्रविष्ट किया गया है। 2019 का 30
(2) जो कोई, वाहन के उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण चलाने से, किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करता है, जो आपराधिक मानव वध की कोटि में नहीं आता है और घटना के तत्काल पश्चात्, इसे पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट किए बिना, भाग जाता है, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 107 – मानसिक बीमारी से पीड़ित बच्चे या व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना
यदि अठारह वर्ष से कम आयु का कोई व्यक्ति, मानसिक बीमारी से ग्रस्त कोई व्यक्ति, कोई विक्षिप्त व्यक्ति या नशे की हालत में कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई भी ऐसी आत्महत्या के लिए उकसाएगा, उसे मौत या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा। या दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। यदि अठारह वर्ष से कम आयु का कोई व्यक्ति, मानसिक बीमारी से ग्रस्त कोई व्यक्ति, कोई विक्षिप्त व्यक्ति या नशे की हालत में कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई भी ऐसी आत्महत्या के लिए उकसाएगा, उसे मौत या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा। या दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
धारा 108 – आत्महत्या के लिए उकसाना
यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 109 – हत्या का प्रयास
का प्रयत्न । 109. (1) जो कोई, किसी कृत्य को ऐसे आशय या ज्ञान से और ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उस कृत्य द्वारा मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या का दोषी होता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा, और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाए, तो वह अपराधी या तो आजीवन कारावास से या ऐसे दण्ड से दण्डनीय होगा, जैसा इसमें इसके पूर्व वर्णित है।
(2) जब उपधारा (1) के अधीन अपराध करने वाला कोई व्यक्ति आजीवन कारावास के दण्डादेश के अधीन है, तब यदि उपहति कारित करता है, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, से दण्डित किया जाएगा दृष्टात (क) य का वध करने के आशय से क उस पर ऐसी परिस्थितियों में गोली चलाता है कि यदि मृत्यु हो जाती, तो क हत्या का दोषी होता। क इस धारा के अधीन दण्डनीय है। (ख) क सुकुमार अवस्था के किसी शिशु की मृत्यु करने के आशय से उसे एक निर्जन स्थान में अरक्षित छोड़ देता है। क ने इस धारा द्वारा परिभाषित अपराध किया है, यद्यपि परिणामस्वरूप उस शिशु की मृत्यु नहीं होती । (ग) य की हत्या का आशय रखते हुए क एक बन्दूक खरीदता है और उसको भरता है। क ने अभी तक अपराध नहीं किया है। य पर क बन्दूक चलाता है। उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है, और यदि इस प्रकार गोली मार कर वह य को घायल कर देता है, तो वह उपधारा (1) के पश्चातवर्ती भाग द्वारा उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है। (घ) विष द्वारा य की हत्या करने का आशय रखते हुए क विष खरीदता है, और उसे उस भोजन में मिला देता है, जो क के अपने पास रहता है क ने इस धारा में परिभाषित अपराध अभी तक नहीं किया है। क उस भोजन को य की मेज पर रखता है, या उसको य की मेज पर रखने के लिए य के सेवकों को परिदत्त करता है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 110 – गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास
जो कोई, किसी कार्य को ऐसे आशय या ज्ञान से और ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि उस कार्य से वह मृत्यु कारित कर देता, तो वह हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध का दोषी होता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति हो जाए तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । दृष्टांत क गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर, ऐसी परिस्थितियों में, य पर पिस्तौल चलाता है कि यदि इसके द्वारा वह मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध का दोषी होता। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
धारा 111 – संगठित अपराध
(1) किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में या ऐसे सिंडिकेट की ओर से अकेले या संयुक्त रूप से सामान्य मति से कार्य करते हुए किसी व्यक्ति द्वारा या व्यक्तियों के किसी समूह द्वारा कोई सतत् विधिविरुद्ध क्रियाकलाप किया जाता है, जिसमें व्यपहरण, डकैती, यान चोरी, उद्घापन, भूमि हथियाना, संविदा पर हत्या करना, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, व्यक्तियों, औषधियों, हथियारों या अवैध माल या सेवाओं का दुर्व्यापार, वेश्यावृत्ति या फिरौती के लिए मानव दुर्व्यापार शामिल है, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तात्विक फायदा, जिसके अंतर्गत वित्तीय फायदा भी है, प्राप्त करने के लिए हिंसा का प्रयोग, हिंसा की धमकी, अभित्रास, प्रपीड़न या अन्य विधिविरुद्ध साधनों द्वारा कारित करता है, वह संगठित अपराध गठित करेगा । स्पष्टीकरण इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) "संगठित अपराध सिंडिकेट" से दो या अधिक व्यक्तियों का कोई समूह अभिप्रेत है जो एक सिंडिकेट या टोली के रूप में या तो अकेले या सामूहिक रूप से कार्य करते हुए किसी सतत् विधि विरुद्ध क्रियाकलाप में लिप्त है।
(ii) "सतत् विधिविरुद्ध क्रियाकलाप" से विधि द्वारा प्रतिषिद्ध ऐसा क्रियाकलाप अभिप्रेत है जो तीन या अधिक वर्ष के कारावास से दण्डनीय संज्ञेय अपराध है, जो किसी व्यक्ति द्वारा या तो अकेले या संयुक्त रूप से, किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में या ऐसे सिंडिकेट की ओर से जिसके संबंध में एक से अधिक आरोप पत्र दस वर्ष की पूर्ववर्ती अवधि के भीतर सक्षम न्यायालय के समक्ष दाखिल किए गए हैं, द्वारा किया गया है और उस न्यायालय ने ऐसे अपराध का संज्ञान कर लिया है और इसमें आर्थिक अपराध भी शामिल हैं;
(iii) "आर्थिक अपराध" में आपराधिक न्यासभंग, कूटरचना, करेंसी नोट, बैंक नोट और सरकारी स्टापों का कूटकरण, हवाला संव्यवहार, बड़े पैमाने पर विपणन कपट या किसी प्ररूप में धनीय फायदा प्राप्त करने के लिए विभिन्न व्यक्तियों के साथ कपट करने के लिए कोई स्कीम चलाना या किसी बैंक या वित्तीय संस्था या किसी अन्य संस्था या संगठन को कपट करने की दृष्टि से किसी रीति में, कोई कृत्य करना शामिल है ।
(2) जो कोई, संगठित अपराध कारित करेगा, – (क) यदि ऐसे अपराध के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय होगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो दस लाख रुपए से कम का नहीं होगा; (ख) किसी अन्य मामले में, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(3) जो कोई, संगठित अपराध का दुष्प्रेरण, प्रयत्न, षडयंत्र करता है या यह जानते हुए कारित किया जाना सुकर बनाता है या संगठित अपराध के किसी प्रारंभिक कार्य में अन्यथा नियोजित होता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(4) कोई व्यक्ति, जो संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(5) जो कोई, किसी व्यक्ति को, जिसने संगठित अपराध कारित किया है, साशयपूर्वक संश्रय देता है या छिपाता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा, और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा : परंतु यह उपधारा उस दशा में लागू नहीं होगी, जिसमें संश्रय या छिपाना अपराधी के पति या पत्नी द्वारा किया जाता है । (ख) किसी अन्य मामले में, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(3) जो कोई, संगठित अपराध का दुष्प्रेरण, प्रयत्न, षडयंत्र करता है या यह जानते हुए कारित किया जाना सुकर बनाता है या संगठित अपराध के किसी प्रारंभिक कार्य में अन्यथा नियोजित होता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(4) कोई व्यक्ति, जो संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(5) जो कोई, किसी व्यक्ति को, जिसने संगठित अपराध कारित किया है, साशयपूर्वक संश्रय देता है या छिपाता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा, और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा : परंतु यह उपधारा उस दशा में लागू नहीं होगी, जिसमें संश्रय या छिपाना अपराधी के पति या पत्नी द्वारा किया जाता है । कम का नहीं होगा, किन्तु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो दो लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
(7) यदि संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य की ओर से कोई व्यक्ति या किसी भी समय ऐसी किसी चल या अचल सम्पत्ति को कब्जे में रखता है, जिसका वह समाधानप्रद लेखा नहीं दे सकता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो दस वर्ष तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा ।
धारा 112 – छोटे संगठित अपराध या सामान्य रूप से संगठित
(1) कोई भी अपराध जो वाहन की चोरी या वाहन से चोरी, घरेलू और व्यावसायिक चोरी, चाल चोरी, कार्गो अपराध, चोरी (चोरी का प्रयास, निजी संपत्ति की चोरी), संगठित चोरी से संबंधित नागरिकों के बीच असुरक्षा की सामान्य भावना पैदा करता है। जेब काटना, छीनना, दुकान से सामान चुराना या कार्ड स्किमिंग के माध्यम से चोरी करना और स्वचालित टेलर मशीन से चोरी करना या सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में गैरकानूनी तरीके से धन प्राप्त करना या टिकटों की अवैध बिक्री और सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों की बिक्री और संगठित आपराधिक समूहों द्वारा किए गए संगठित अपराध के ऐसे अन्य सामान्य रूप या गिरोह, छोटे संगठित अपराध का गठन करेंगे और इसमें उक्त अपराध शामिल होंगे जब मोबाइल संगठित अपराध समूहों या गिरोहों द्वारा किए जाते हैं जो संपर्क, एंकर पॉइंट और स्थानांतरित होने से पहले की अवधि में क्षेत्र में कई अपराधों को अंजाम देने के लिए आपस में संपर्क, एंकर पॉइंट और लॉजिस्टिक समर्थन का नेटवर्क बनाते हैं। चालू.
(2) जो कोई भी उप-धारा (1) के तहत कोई छोटा संगठित अपराध करेगा या करने का प्रयास करेगा, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और उत्तरदायी भी होगा सही करने के लिए।
धारा 113 – आतंकवादी कृत्य का अपराध
(1) यदि कोई व्यक्ति भारत में या किसी विदेशी देश में भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालने, आम जनता या उसके एक वर्ग को डराने के इरादे से कोई कार्य करता है, तो उसे आतंकवादी कार्य करने वाला माना जाता है। , या कोई कार्य करके सार्वजनिक व्यवस्था को भंग करना,–-
(i) बम, डायनामाइट या किसी अन्य विस्फोटक पदार्थ या ज्वलनशील सामग्री या आग्नेयास्त्रों या अन्य घातक हथियारों या जहर या हानिकारक गैसों या अन्य रसायनों या किसी अन्य पदार्थ (चाहे जैविक या अन्यथा) प्रकृति में खतरनाक का उपयोग इस तरह से किया जाए ताकि निर्माण किया जा सके। ऐसा माहौल बनाना या भय का संदेश फैलाना, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए या उसे गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचे, या किसी व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ जाए;
(ii) संपत्ति की क्षति या विनाश या समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक किसी भी आपूर्ति या सेवाओं में व्यवधान, सरकारी या सार्वजनिक सुविधा, सार्वजनिक स्थान या निजी संपत्ति के विनाश के कारण क्षति या हानि का कारण बनना;
(iii) महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में व्यापक हस्तक्षेप, क्षति या विनाश का कारण बनना;
(iv) सरकार या उसके संगठन को इस तरह से उकसाना या डराना-धमकाना जिससे किसी सार्वजनिक पदाधिकारी या किसी व्यक्ति की मौत या चोट लग जाए या होने की संभावना हो या किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने और जान से मारने या घायल करने की धमकी देने का कार्य करना। ऐसा व्यक्ति सरकार को कोई कार्य करने या करने से रोकने के लिए मजबूर करने, या देश की राजनीतिक, आर्थिक, या सामाजिक संरचनाओं को अस्थिर करने या नष्ट करने, या सार्वजनिक आपातकाल बनाने या सार्वजनिक सुरक्षा को कमजोर करने के लिए;
(v) गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध किसी भी संधि के दायरे में शामिल है।
(2) जो कोई भी, आतंकवादी कृत्य करने का प्रयास करेगा या अपराध करेगा,––
(i) यदि ऐसे अपराध के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो पैरोल के लाभ के बिना मृत्यु या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी, और जुर्माना भी लगाया जाएगा जो दस लाख रुपये से कम नहीं होगा;
(ii) किसी अन्य मामले में, कारावास से दंडनीय होगा, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो पांच लाख रुपये से कम नहीं होगा।
(3) जो कोई भी आतंकवादी कृत्यों के लिए किसी संगठन, संघ या व्यक्तियों के समूह का षडयंत्र रचता है, संगठित करता है या करवाता है, या किसी आतंकवादी कृत्य की तैयारी के किसी भी कार्य में शामिल होने के लिए सहायता करता है, सुविधा देता है या अन्यथा षडयंत्र करता है, वह कारावास से दंडनीय होगा। ऐसी सज़ा जो पांच साल से कम नहीं होगी लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जाएगा जो पांच लाख रुपये से कम नहीं होगा।
(4) कोई भी व्यक्ति, जो आतंकवादी संगठन का सदस्य है, जो आतंकवादी कृत्य में शामिल है, को कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा जो इससे कम नहीं होगा पांच लाख रुपये.
(5) जो कोई, किसी आतंकवादी कृत्य का अपराध करने वाले किसी व्यक्ति को जानबूझकर आश्रय देता है या छिपाता है या आश्रय देने या छुपाने का प्रयास करता है, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि तीन साल से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। , और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा जो पांच लाख रुपये से कम नहीं होगा: बशर्ते कि यह उपधारा किसी ऐसे मामले पर लागू नहीं होगी जिसमें अपराधी के पति या पत्नी द्वारा आश्रय या छिपाव किया गया हो।
(6) जो कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी संपत्ति को रखता है, आतंकवादी कृत्य या आतंकवाद की आय से प्राप्त या प्राप्त करता है, या आतंकवादी फंड के माध्यम से अर्जित करता है, या संपत्ति या धन रखता है, प्रदान करता है, एकत्र करता है या उपयोग करता है या संपत्ति, धन या उपलब्ध कराता है। वित्तीय सेवा या अन्य संबंधित सेवाओं का, किसी भी माध्यम से, पूर्ण या आंशिक रूप से किसी आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने या उसे सुविधाजनक बनाने के लिए उपयोग किया जाना, एक अवधि के लिए कारावास से दंडनीय होगा, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा जो पांच लाख रुपये से कम नहीं होगा और ऐसी संपत्ति कुर्की और जब्ती के लिए भी उत्तरदायी होगी। स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,– (ए) "आतंकवादी" किसी भी व्यक्ति को संदर्भित करता है जो –
(i) हथियारों, विस्फोटकों का विकास, निर्माण, स्वामित्व, अधिग्रहण, परिवहन, आपूर्ति या उपयोग करता है, या परमाणु, रेडियोलॉजिकल या अन्य खतरनाक पदार्थ छोड़ता है, या आग, बाढ़ या विस्फोट का कारण बनता है;
(ii) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी माध्यम से आतंकवादी कृत्य करता है, या प्रयास करता है, या साजिश रचता है;
(iii) आतंकवादी कृत्यों में प्रमुख या सहयोगी के रूप में भाग लेता है; (बी) अभिव्यक्ति "आतंकवाद की आय" का वही अर्थ होगा जो गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 2 के खंड (जी) में दिया गया है; (सी) "आतंकवादी संगठन, संघ या व्यक्तियों का समूह" किसी भी आतंकवादी या आतंकवादियों के समूह के स्वामित्व या नियंत्रण वाली किसी इकाई को संदर्भित करता है –
(i) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी माध्यम से आतंकवादी कृत्य करता है या करने का प्रयास करता है;—
(ii) आतंकवादी कृत्यों में भाग लेता है;—
(iii) आतंकवाद के लिए तैयारी करता है;—
(iv) आतंकवाद को बढ़ावा देता है;—
(v) दूसरों को आतंकवाद के लिए संगठित या निर्देशित करता है;—
(vi) आतंकवादी कृत्य को आगे बढ़ाने के सामान्य उद्देश्य से कार्य करने वाले व्यक्तियों के एक समूह द्वारा आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने में योगदान देता है, जहां योगदान जानबूझकर और आतंकवादी कृत्य को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से या समूह के इरादे की जानकारी के साथ किया जाता है। आतंकवादी कृत्य करना; या
(vii) अन्यथा आतंकवाद में शामिल है; या
(viii) गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की पहली अनुसूची में सूचीबद्ध कोई भी संगठन या सूचीबद्ध संगठन के समान नाम के तहत काम करने वाला कोई संगठन।
धारा 114 – चोट पहुंचाना
जो कोई किसी व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा, बीमारी या दुर्बलता का कारण बनता है, उसे चोट पहुंचाना कहा जाता है।
धारा 115 – स्वेच्छा से चोट पहुंचाना
(1) जो कोई, किसी कार्य को इस आशय से करता है कि उसके द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित की जाए या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह उसके द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और उसके द्वारा किसी व्यक्ति की उपहति कारित करता है, वह "स्वेच्छया उपहति करता है", यह कहा जाता है। स्वेच्छ्या उपहति कारित करना ।
(2) जो कोई, धारा 122 की उपधारा (1) के अधीन उपबंधित मामले के सिवाय, स्वेच्छया उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रूपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
धारा 116 – गंभीर चोट
केवल निम्नलिखित प्रकार की चोट को "गंभीर" के रूप में नामित किया गया है, अर्थात्:– (ए) नपुंसकता. (बी) दोनों आंखों की रोशनी का स्थायी अभाव (सी) दोनों कानों से सुनने की क्षमता स्थायी रूप से खत्म हो जाती है। (डी) किसी भी सदस्य या संयुक्त का निजीकरण। (ई) किसी भी सदस्य या संयुक्त की शक्तियों का विनाश या स्थायी हानि। (एफ) सिर या चेहरे का स्थायी विरूपण। (छ) हड्डी या दांत का फ्रैक्चर या अव्यवस्था। (ज) कोई भी चोट जो जीवन को खतरे में डालती है या जिसके कारण पीड़ित को पंद्रह दिनों के दौरान गंभीर शारीरिक दर्द होता है, या वह अपनी सामान्य गतिविधियों का पालन करने में असमर्थ हो जाता है।
धारा 117 – स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई, स्वेच्छ्या उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति, जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है घोर उपहति है, और यदि वह उपहति, जो वह कारित करता है, घोर उपहति है, तो वह "स्वेच्छ्या घोर उपहति करता है, यह कहा जाता है। स्पष्टीकरण कोई व्यक्ति, स्वेच्छ्या घोर उपहति कारित करता है. यह नहीं कहा जाता है, सिवाय जबकि वह घोर उपहति कारित करता है और घोर उपहति कारित करने का उसका आशय हो या धोर उपहति कारित होना वह सम्भाव्य जानता हो। किन्तु यदि वह यह आशय रखते हुए या यह संभाव्य जानते हुए कि वह किसी एक किस्म की घोर उपहति कारित कर दे वास्तव में दूसरी ही किस्म की घोर उपहति कारित करता है. तो वह स्वेच्छ्या घोर उपहति कारित करता है. यह कहा जाता है। दृष्टांत क. यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह य के चेहरे को स्थायी रूप से विद्धूपित कर देगा, य के चेहरे पर प्रहार करता है जिससे य का चेहरा स्थायी रूप से विदूपित तो नहीं होता, किन्तु य को पंद्रह दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा कारित होती है। क ने स्वेच्छ्या धोर उपहति कारित की है।
(2) जो कोई, धारा 122 की उपधारा (2) में उपबंधित मामले के सिवाय, स्वेच्छ्या धोर उपहति कारित करता है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
(3) जो कोई, उपधारा (1) के अधीन कोई अपराध कारित करता है और ऐसे कारित करने के क्रम में किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है. जिससे उस व्यक्ति को स्थायी दिव्यांगता कारित हो जाती है या लगातार विकृतशील दशा में डाल देता है वह ऐसी अवधि के कठिन कारावास से, जो दस वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, से दंडनीय होगा ।
(4) जब पांच या अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा, सामान्य मति से कार्य करते हुए, किसी व्यक्ति को उसके मूलवंश, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समरूप आधार पर, घोर उपहति कारित की जाती है, वहां ऐसे समूह का प्रत्येक सदस्य घोर उपहति कारित करने के अपराध का दोषी होगा और वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक हो सकेगी दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
धारा 118 – खतरनाक हथियारों या साधनों से स्वेच्छा से चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई, धारा 122 की उपधारा (1) में उपबंधित दशा के सिवाय, गोली मारने, वेधने या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक हथियार के तौर पर उपयोग में लाया जाए, जिससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या किसी संक्षारक पदार्थ द्वारा या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा, जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव शरीर के लिए हानिकारक है, या किसी जीव-जन्तु द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो बीस हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(2) जो कोई, धारा 122 की उपधारा (2) में उपबंधित दशा के सिवाय, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी साधन से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 119 – संपत्ति की उगाही करने के लिए, या किसी अवैध कार्य के लिए बाध्य करने के लिए स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई, इस प्रयोजन से स्वेच्छ्या उपहति कारित करता है कि उपहत व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्घापित की जाए या उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी बात, जो अवैध है, या जिससे किसी अपराध का किया जाना सुकर होता है, करने के लिए मजबूर किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) जो कोई, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छ्या घोर उपहति कारित करता है, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 120 – अपराध स्वीकार करने के लिए, या संपत्ति की बहाली के लिए मजबूर करने के लिए स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई भी पीड़ित से या पीड़ित में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति से कोई भी स्वीकारोक्ति या कोई जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से, जिससे अपराध या कदाचार का पता चल सकता है, या बाधा डालने के उद्देश्य से स्वेच्छा से चोट पहुंचाता है। पीड़ित या किसी संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा को बहाल करने या बहाल करने या किसी दावे या मांग को पूरा करने या ऐसी जानकारी देने में रुचि रखने वाला कोई भी व्यक्ति, जिससे किसी संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा की बहाली हो सकती है, दंडित किया जाएगा। किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(2) जो कोई भी उप-धारा (1) में निर्दिष्ट किसी भी उद्देश्य के लिए स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। रेखांकन (ए) ए, एक पुलिस-अधिकारी, ज़ेड को यह स्वीकार करने के लिए प्रेरित करने के लिए कि उसने अपराध किया है, ज़ेड को प्रताड़ित करता है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (बी) ए, एक पुलिस-अधिकारी, बी को यह बताने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रताड़ित करता है कि चोरी की गई कुछ संपत्ति कहाँ जमा की गई है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है। (सी) ए, एक राजस्व अधिकारी, ज़ेड से देय राजस्व के कुछ बकाया का भुगतान करने के लिए उसे मजबूर करने के लिए ज़ेड को प्रताड़ित करता है। ए इस धारा के तहत अपराध का दोषी है।
धारा 121 – लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक है, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है या इस आशय से कि उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को, वैसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन से निवारित या भयोपरत करे या वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयत्न किए गए किसी बात के परिणामस्वरूप स्वेच्छ्या उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । लोक सेवक को अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छ्या उपहति या घोर उपहति कारित करना (2) जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक है, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है या इस आशय से कि उस व्यक्ति को, या किसी अन्य लोक सेवक को वैसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के निर्वहन से निवारित या भयोपरत करे या वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति दवारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयतित किसी बात के परिणामस्वरूप स्वेच्छ्या घोर उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 122 – उकसावे पर स्वेच्छा से चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई स्वेच्छा से गंभीर और अचानक उकसावे पर चोट पहुँचाता है, यदि उसका न तो इरादा है और न ही वह जानता है कि उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने की संभावना है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। अवधि जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों के साथ।
(2) जो कोई स्वेच्छा से गंभीर और अचानक उकसावे पर गंभीर चोट पहुंचाता है, यदि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंचाने का न तो इरादा रखता है और न ही खुद जानता है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी। जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों। स्पष्टीकरण.—यह धारा अपवाद 1, धारा 99 के समान प्रावधान के अधीन है।
धारा 123 – अपराध करने के इरादे से जहर आदि के माध्यम से चोट पहुंचाना
जो कोई ऐसे व्यक्ति को चोट पहुंचाने के इरादे से, या किसी अपराध को करने या करने को सुविधाजनक बनाने के इरादे से, किसी भी व्यक्ति को कोई जहर या कोई स्तब्ध करने वाली, नशीली या अस्वास्थ्यकर दवा, या अन्य चीज देता है या दिलवाता है या यह जानते हुए कि यह संभावना है कि वह चोट पहुंचाएगा, किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
धारा 124 – एसिड आदि के उपयोग से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना
(1) जो कोई किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग को स्थायी या आंशिक क्षति या विकृति का कारण बनता है, या जलाता है या अपंग करता है या विरूपित करता है या अक्षम करता है या उस व्यक्ति पर एसिड फेंककर या एसिड पिलाकर गंभीर चोट पहुंचाता है, या किसी अन्य साधन का उपयोग करने के इरादे से या यह जानते हुए कि वह ऐसी चोट या चोट पहुंचाने की संभावना रखता है या किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से निष्क्रिय अवस्था में पहुंचाता है, उसे किसी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा। दस साल से कम, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी हो सकता है: बशर्ते कि ऐसा जुर्माना पीड़ित के इलाज के चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए उचित और उचित होगा: बशर्ते कि इस धारा के तहत लगाया गया कोई भी जुर्माना पीड़ित को भुगतान किया जाएगा।
(2) जो कोई किसी व्यक्ति पर तेजाब फेंकता है या फेंकने का प्रयास करता है या किसी व्यक्ति को तेजाब पिलाने का प्रयास करता है, या किसी अन्य साधन का उपयोग करने का प्रयास करता है, स्थायी या आंशिक क्षति या विकृति या जलने या अपंग करने या विकृति या विकलांगता पैदा करने के इरादे से या उस व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाने पर, किसी भी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो पांच साल से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण 1.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "एसिड" में कोई भी पदार्थ शामिल है जिसमें अम्लीय या संक्षारक चरित्र या जलने की प्रकृति है, जो शारीरिक चोट पहुंचाने में सक्षम है जिससे निशान या विकृति या अस्थायी या स्थायी विकलांगता हो सकती है। स्पष्टीकरण 2.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, स्थायी या आंशिक क्षति या विकृति या स्थायी वनस्पति अवस्था, अपरिवर्तनीय होने की आवश्यकता नहीं होगी।
धारा 125 – दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य
जो कोई, इतने उतावलेपन या उपेक्षा से कोई ऐसा कार्य करता है कि उससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक सुरक्षा संकटापन्न होती है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो ढाई हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, किंतु- (क) जहां उपहति कारित की जाती है, वहां दोनों में से किसी भांति के कारावास, जिसकी अवधि छह मास तक हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा; (ख) जहां घोर उपहति कारित की जाती है, वहां दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । सदोष अवरोध और सदोष परिरोध के विषय में
धारा 126 – गलत तरीके से रोकना
(1) जो कोई, किसी व्यक्ति को स्वेच्छया ऐसी बाधा डालता है कि उस व्यक्ति को उस दिशा में, जिसमें उस व्यक्ति को जाने का अधिकार है, जाने से रोक दे, वह उस व्यक्ति का सदोष अवरोध करता है, यह कहा जाता है। सदोष अवरोध । अपवाद भूमि के या जल के ऐसे प्राइवेट मार्ग में बाधा डालना, जिसके सम्बन्ध में किसी व्यक्ति को सद्भावपूर्वक विश्वास है कि वहां बाधा डालने का उसे विधिपूर्ण अधिकार है, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत अपराध नहीं है । दृष्टांत क एक मार्ग में, जिससे होकर जाने का य का अधिकार है, सद्भावपूर्वक यह विश्वास न रखते हुए कि उसको मार्ग रोकने का अधिकार प्राप्त है, बाधा डालता है। य जाने से उसके द्वारा रोक दिया जाता है। क, य का सदोष अवरोध करता है ।
(2) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा 127 – गलत तरीके से कारावास
(1) जो कोई, किसी व्यक्ति का इस प्रकार सदोष अवरोध करता है कि उस व्यक्ति को निश्चित परिसीमा से परे जाने से रोक दे, वह उस व्यक्ति का "सदोष परिरोध" करता है, यह कहा जाता है। दृष्टांत (क) य को दीवार से घिरे हुए स्थान में प्रवेश कराकर क उसमें ताला लगा देता है। इस प्रकार य दीवार की परिसीमा से परे किसी भी दिशा में नहीं जा सकता। क ने य का सदोष परिरोध किया है। (ख) क एक भवन के बाहर जाने के द्वारों पर बन्दूकधारी मनुष्यों को बैठा देता है और य से कह देता है कि यदि य भवन के बाहर जाने का प्रयत्न करेगा तो वे य को गोली मार देंगे। कनेय का सदोष परिरोध किया है।
(2) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करता है, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(3) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध तीन या अधिक दिनों के लिए करता है, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(4) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध दस या अधिक दिनों के लिए करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, का भी दायी होगा । (5) जो कोई, यह जानते हुए किसी व्यक्ति को सदोष परिरोध में रखता है कि उस व्यक्ति को छोड़ने के लिए रिट सम्यक् रूप से निकल चुकी है, वह किसी अवधि के उस कारावास के अतिरिक्त, जिससे कि वह इस अध्याय की किसी अन्य धारा के अधीन दण्डनीय हो, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(6) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध इस प्रकार करता है जिससे यह आशय प्रतीत होता है कि ऐसे परिरुद्ध व्यक्ति से हितबद्ध किसी व्यक्ति को या किसी लोक सेवक को ऐसे व्यक्ति के परिरोध की जानकारी न होने पाए या इसमें इसके पूर्व वर्णित किसी ऐसे व्यक्ति या लोक सेवक को, ऐसे परिरोध के स्थान की जानकारी न होने पाए या उसका पता वह न चला पाए, वह उस दण्ड के अतिरिक्त, जिसके लिए वह ऐसे सदोष परिरोध के लिए दण्डनीय हो, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(7) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध इस प्रयोजन से करता है कि उस परिरुद्ध व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्घापित की जाए, या उस परिरुद्ध व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को, कोई ऐसी अवैध बात करने के लिए, या कोई ऐसी जानकारी देने के लिए जिससे अपराध का किया जाना सुकर हो जाए, मजबूर किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(8) जो कोई, किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध इस प्रयोजन से करता है कि उस परिरुद्ध व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई संस्वीकृति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध या कदाचार का पता चल सके, उद्घापित की जाए, या वह परिरुद्ध व्यक्ति या उससे हितबद्ध कोई व्यक्ति मजबूर किया जाए कि वह किसी सम्पति या मूल्यवान प्रतिभूति को वापस करे या वापस करवाए या किसी दावे या मांग की तुष्टि करे या कोई ऐसी जानकारी दे जिससे किसी सम्पत्ति या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को वापस कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 128 – बल
यह कहा जाता है कि एक व्यक्ति दूसरे पर बल का प्रयोग करता है यदि वह उस दूसरे में गति, गति में परिवर्तन, या गति की समाप्ति का कारण बनता है, या यदि वह किसी पदार्थ में ऐसी गति, या गति में परिवर्तन, या गति की समाप्ति का कारण बनता है जो कि लाता है किसी दूसरे के शरीर के किसी भी हिस्से के संपर्क में आने वाला पदार्थ, या ऐसी किसी भी चीज़ के साथ जिसे वह पहन रहा है या ले जा रहा है, या ऐसी किसी भी चीज़ के साथ संपर्क में है कि ऐसा संपर्क उस दूसरे की भावना की भावना को प्रभावित करता है: बशर्ते कि वह व्यक्ति जो गति, या गति में परिवर्तन का कारण बनता है, या गति की समाप्ति, उस गति का कारण बनती है, गति में परिवर्तन, या गति की समाप्ति निम्नलिखित तीन तरीकों में से एक में होती है, अर्थात्:–– (ए) अपनी शारीरिक शक्ति से; (बी) किसी भी पदार्थ को इस तरह से निपटाने से कि गति या परिवर्तन या गति की समाप्ति उसकी ओर से, या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किसी भी आगे के कार्य के बिना हो जाती है; (सी) किसी भी जानवर को हिलने, उसकी गति बदलने या हिलना बंद करने के लिए प्रेरित करके।
धारा 129 – आपराधिक बल
जो कोई किसी अपराध को करने के लिए जानबूझकर किसी व्यक्ति पर उस व्यक्ति की सहमति के बिना बल का प्रयोग करता है, या ऐसे बल के प्रयोग से कारित करने का इरादा रखता है, या यह जानते हुए कि ऐसे बल के प्रयोग से वह ऐसा करेगा। जिस व्यक्ति पर बल का प्रयोग किया गया है, उसे चोट, भय या झुंझलाहट पैदा करना, दूसरे पर आपराधिक बल का प्रयोग करना कहा जाता है। रेखांकन (ए) जेड एक नदी पर बंधी नाव में बैठा है। क लंगर को खोल देता है, और इस प्रकार जानबूझकर नाव को धारा में बहा देता है। यहां A जानबूझकर Z को गति देता है, और वह पदार्थों को इस तरह से निपटाकर ऐसा करता है कि गति किसी भी व्यक्ति की ओर से किसी अन्य कार्रवाई के बिना उत्पन्न होती है। इसलिए A ने जानबूझकर Z पर बल का प्रयोग किया है; और यदि उसने किसी अपराध को करने के लिए ज़ेड की सहमति के बिना ऐसा किया है, या यह इरादा रखते हुए या यह जानते हुए कि बल के इस प्रयोग से ज़ेड को चोट, भय या झुंझलाहट होगी, तो ए ने ज़ेड पर आपराधिक बल का उपयोग किया है। (बी) जेड एक रथ पर सवार है। A, Z के घोड़ों को मारता है, और इस प्रकार उनकी गति तेज़ कर देता है। यहां A ने जानवरों को अपनी गति बदलने के लिए प्रेरित करके Z की गति में परिवर्तन किया है। इसलिए A ने Z पर बल प्रयोग किया है; और यदि A ने Z की सहमति के बिना यह इरादा रखते हुए या यह जानते हुए किया है कि वह Z को घायल कर सकता है, डरा सकता है या परेशान कर सकता है, तो A ने Z पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है। (सी) जेड एक पालकी में सवार है। A, Z को लूटने के इरादे से, खंभा पकड़ लेता है और पालकी रोक देता है। यहां A ने Z की गति को रोक दिया है, और उसने यह काम अपनी शारीरिक शक्ति से किया है। इसलिए A ने Z पर बल प्रयोग किया है; और चूँकि A ने किसी अपराध को अंजाम देने के लिए, Z की सहमति के बिना, जानबूझकर ऐसा कार्य किया है। A ने Z पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है। (डी) ए जानबूझकर सड़क पर जेड के खिलाफ धक्का देता है। यहां A ने अपनी शारीरिक शक्ति से अपने ही व्यक्ति को Z के संपर्क में लाने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए उसने जानबूझकर Z पर बल का प्रयोग किया है; और यदि उसने ज़ेड की सहमति के बिना ऐसा किया है, यह इरादा रखते हुए या यह जानते हुए कि वह ज़ेड को घायल कर सकता है, डरा सकता है या परेशान कर सकता है, तो उसने ज़ेड पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है। (ई) एक पत्थर फेंको, यह इरादा रखते हुए या यह जानते हुए कि पत्थर इस प्रकार ज़ेड के संपर्क में आएगा, या ज़ेड के कपड़ों के साथ, या ज़ेड द्वारा ले जाए गए किसी चीज़ के साथ, या कि यह पानी से टकराएगा और पानी में गिर जाएगा ज़ेड के कपड़ों या ज़ेड द्वारा उठाए गए किसी चीज़ के खिलाफ। यहां, यदि पत्थर फेंकने से किसी पदार्थ के ज़ेड या ज़ेड के कपड़ों के संपर्क में आने का प्रभाव उत्पन्न होता है, तो ए ने ज़ेड पर बल का उपयोग किया है, और यदि उसने ज़ेड की सहमति के बिना ऐसा किया है उसने Z को घायल करने, डराने या परेशान करने के इरादे से Z पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है। (एफ) जानबूझकर एक महिला का घूंघट खींचता है। यहां ए जानबूझकर उस पर बल का प्रयोग करता है, और यदि वह ऐसा उसकी सहमति के बिना इस इरादे से करता है या यह जानते हुए करता है कि इससे उसे चोट लग सकती है, डर लग सकता है या वह परेशान हो सकता है, तो उसने उस पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है। (जी) जेड स्नान कर रहा है। क स्नान के पानी में वह पानी डालता है जिसके बारे में वह जानता है कि वह उबल रहा है। यहां A जानबूझकर अपनी शारीरिक शक्ति से उबलते पानी में ऐसी गति पैदा करता है जिससे वह पानी Z के संपर्क में आता है, या अन्य पानी के साथ इस प्रकार स्थित होता है कि इस तरह के संपर्क से Z की अनुभूति की भावना प्रभावित होनी चाहिए; इसलिए A ने जानबूझकर Z पर बल का प्रयोग किया है; और यदि उसने ज़ेड की सहमति के बिना यह इरादा किया है या यह जानते हुए किया है कि इससे ज़ेड को चोट, भय या झुंझलाहट हो सकती है, तो ए ने आपराधिक बल का प्रयोग किया है। (ज) ए, ज़ेड की सहमति के बिना, एक कुत्ते को ज़ेड पर हमला करने के लिए उकसाता है। यहां, यदि A का इरादा Z को चोट, भय या झुंझलाहट पैदा करने का है, तो वह Z पर आपराधिक बल का प्रयोग करता है।
धारा 130 – हमला
जो कोई कोई इशारा करता है, या कोई तैयारी करता है, यह इरादा रखता है या यह जानता है कि ऐसा इशारा या तैयारी किसी भी उपस्थित व्यक्ति को यह आशंका पैदा कर देगी कि वह इशारा या तैयारी करने वाला उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने वाला है, तो कहा जाता है हमला करो। स्पष्टीकरण.-मात्र शब्द हमले की श्रेणी में नहीं आते। लेकिन जिन शब्दों का उपयोग कोई व्यक्ति करता है, वे उसके इशारों या तैयारी को ऐसा अर्थ दे सकते हैं जिससे वे इशारे या तैयारी हमले के समान हो सकते हैं। रेखांकन (ए) ए, जेड पर अपनी मुट्ठी हिलाता है, यह इरादा रखते हुए या यह जानते हुए कि वह जेड को यह विश्वास दिला सकता है कि ए, जेड पर हमला करने वाला है। ए ने हमला किया है। (बी) ए एक क्रूर कुत्ते के थूथन को खोलना शुरू कर देता है, यह इरादा रखते हुए या यह जानते हुए कि वह जेड को यह विश्वास दिला सकता है कि वह कुत्ते को जेड पर हमला करने के लिए मजबूर करने वाला है। ए ने जेड पर हमला किया है। (सी) ए एक छड़ी उठाता है और जेड से कहता है, "मैं तुम्हें मारूंगा"। यहां, हालांकि ए द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द किसी भी मामले में हमले की श्रेणी में नहीं आ सकते हैं, और हालांकि केवल इशारा, किसी अन्य परिस्थिति के बिना, हमले की श्रेणी में नहीं आ सकता है, शब्दों द्वारा समझाया गया इशारा हमले की श्रेणी में आ सकता है।
धारा 131 – गंभीर उकसावे के अलावा अन्यथा हमला या आपराधिक बल के लिए सजा
जो कोई, किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा गम्भीर और अचानक प्रकोपन दिए जाने पर करने से अन्यथा करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । स्पष्टीकरण 1 गम्भीर और अचानक प्रकोपन से, इस धारा के अधीन किसी अपराध के दण्ड में कमी नहीं होगी,- (क) यदि वह प्रकोपन अपराध करने के लिए प्रतिहेतु के रूप में अपराधी द्वारा वांछित या स्वेच्छया प्रकोपित किया गया है; या (ख) यदि वह प्रकोपन किसी ऐसी बात द्वारा दिया गया है जो विधि के पालन में, या किसी लोक सेवक द्वारा ऐसे लोक सेवक की शक्ति के विधिपूर्ण प्रयोग में की गई है; या (ग) यदि वह प्रकोपन किसी ऐसी बात द्वारा दिया गया है जो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के विधिपूर्ण प्रयोग में की गई है। स्पष्टीकरण 2 प्रकोपन, अपराध को कम करने के लिए पर्याप्त गम्भीर और अचानक था या नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है।
धारा 132 – लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल
जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति पर, जो लोक सेवक है, उस समय जब वैसे लोक सेवक के नाते वह उसके अपने कर्तव्य का निष्पादन कर रहा है, या इस आशय से कि उस व्यक्ति को वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य के निर्वहन से निवारित करे या भयोपरत करे या ऐसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या की जाने के लिए प्रयत्न किए गए किसी बात के परिणामस्वरूप हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
धारा 133 – गंभीर उकसावे के अलावा किसी व्यक्ति का अपमान करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग
जो कोई किसी व्यक्ति पर गंभीर और अचानक उकसावे के अलावा उस व्यक्ति का अपमान करने के इरादे से हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माने से या दोनों से।
धारा 134 – किसी व्यक्ति द्वारा लाई गई संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल
जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, किसी संपत्ति पर चोरी करने का प्रयास करता है जिसे वह व्यक्ति पहन रहा है या ले जा रहा है, तो उसे दो साल तक की अवधि के लिए कारावास या जुर्माना से दंडित किया जाएगा। , या दोनों के साथ।
धारा 135 – किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल
जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उस व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने का प्रयास करता है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों के साथ।
धारा 136 – गंभीर उकसावे पर हमला या आपराधिक बल
जो कोई किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए गंभीर और अचानक उकसावे पर उस पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे एक अवधि के लिए साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो एक हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या साथ से दंडित किया जाएगा। दोनों. स्पष्टीकरण.-यह धारा धारा 129 के समान स्पष्टीकरण के अधीन है। अपहरण, अपहरण, दासता और जबरन श्रम
धारा 137 – अपहरण
(1) व्यपहरण दो किस्म का होता है भारत में से व्यपहरण और विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण (क) जो कोई, किसी व्यक्ति का, उस व्यक्ति की, या उस व्यक्ति की ओर से सम्मति देने के लिए वैध रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति की सम्मति के बिना, भारत की सीमाओं से परे पहुंचा देता है, वह भारत में से उस व्यक्ति का व्यपहरण करता है, यह कहा जाता है। अनुभाग 1 क] 71 भारत का राजपत्र असाधारण (ख) जो कोई, किसी शिशु को या किसी विकृतचित व्यक्ति को, ऐसे शिशु या विकृतचित व्यक्ति के विधिपूर्ण संरक्षकता में से ऐसे संरक्षक की सम्मति के बिना ले जाता है या बहका जाता है. वह ऐसे शिशु या ऐसे व्यक्ति का विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण करता है, यह कहा जाता है। स्पष्टीकरण इस खंड में 'विधिपूर्ण सरंक्षक शब्दों के अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति आता है, जिस पर ऐसे शिशु या अन्य व्यक्ति की देख-रेख या अभिरक्षा का भार विधिपूर्वक न्यस्त किया गया है। अपवाद इस खंड का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति के कार्य पर नहीं है, जिसे सद्भावपूर्वक यह विश्वास है कि वह किसी अधर्मज शिशु का पिता है, या जिसे सद्भावपूर्वक यह विश्वास है कि वह ऐसे शिशु की विधिपूर्ण अभिरक्षा का हकदार है, जब तक कि ऐसा कार्य अनैतिक या विधिविरुद्ध प्रयोजन के लिए न किया जाए ।
(2) जो कोई, भारत में से या विधिपूर्ण संरक्षकता में से किसी व्यक्ति का व्यपहरण करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 138 – अपहरण
जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बलपूर्वक बाध्य करता है, या किसी कपटपूर्ण साधन से उत्प्रेरित करता है, वह उस व्यक्ति का अपहरण करता है, ऐसा कहा जाता है।
धारा 139 – भीख मांगने के लिए किसी बच्चे का अपहरण करना या अपंग बनाना
(1) जो कोई भी अठारह वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे का अपहरण करता है या ऐसे बच्चे का वैध अभिभावक न होते हुए, बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करता है, ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या उपयोग किया जा सके। कठोर कारावास से दंडनीय, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(2) जो कोई भी अठारह वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे को अपंग बना देगा ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या उपयोग किया जा सके, वह कारावास से दंडनीय होगा जो बीस वर्ष से कम नहीं होगा, लेकिन जिसे जीवन तक बढ़ाया जा सकता है। इसका मतलब उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास और जुर्माना होगा।
(3) जहां कोई भी व्यक्ति, जो अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे का वैध संरक्षक नहीं है, ऐसे बच्चे को भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या उपयोग करता है, यह माना जाएगा, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए, कि उसने अपहरण किया है या अन्यथा प्राप्त किया है। ऐसे बच्चे की अभिरक्षा ताकि ऐसे बच्चे को नियोजित किया जा सके या भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जा सके।
(4) इस खंड में "भीख माँगना" का अर्थ है—
(i) किसी सार्वजनिक स्थान पर भिक्षा मांगना या प्राप्त करना, चाहे गायन, नृत्य, भाग्य बताने, करतब दिखाने या सामान बेचने या अन्यथा के बहाने;
(ii) भिक्षा मांगने या प्राप्त करने के उद्देश्य से किसी निजी परिसर में प्रवेश करना;
(iii) भिक्षा प्राप्त करने या जबरन वसूली के उद्देश्य से, किसी घाव, घाव, चोट, विकृति या बीमारी को उजागर करना या प्रदर्शित करना, चाहे वह स्वयं की हो या किसी अन्य व्यक्ति की या किसी जानवर की;
(iv) भिक्षा मांगने या प्राप्त करने के उद्देश्य से ऐसे बच्चे को एक प्रदर्शनी के रूप में उपयोग करना।
धारा 140 – हत्या या फिरौती आदि के लिए अपहरण या अपहरण
(1) जो कोई, इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करता है कि ऐसे व्यक्ति की हत्या की जाए या उसको ऐसे व्ययनित किया जाए कि वह अपनी हत्या होने के खतरे में पड़ जाए, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा। दृष्टांत (क) क इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि किसी देव मूर्ति पर य की बलि चढ़ाई जाए, भारत में से य का व्यपहरण करता है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। (ख) ख को उसके घर से क इसलिए बलपूर्वक या बहकाकर ले जाता है कि ख की हत्या की जाए। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(2) जो कोई, इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करता है या ऐसे व्यपहरण या अपहरण के पश्चात् ऐसे व्यक्ति को अवरोध में रखता है और ऐसे व्यक्ति की मृत्यु या उसकी उपहति कारित करने की धमकी देता है या अपने आचरण से ऐसी युक्तियुक्त आशंका पैदा करता है कि ऐसे व्यक्ति की हत्या या उपहति कारित की जा सकती है या ऐसे व्यक्ति को उपहति या उसकी मृत्यु कारित करता है जिससे कि सरकार या किसी विदेशी राज्य या अंतरराष्ट्रीय अंतर-शासनात्मक संगठन या किसी अन्य व्यक्ति को किसी कार्य को करने या करने से विरत रहने के लिए या फिरौती देने के लिए विवश किया जाए, वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(3) जो कोई, इस आशय से किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण करता है कि उसका गुप्त रूप से और सदोष परिरोध किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(4) जो कोई, किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण इसलिए करता है कि उसे धोर उपहति या दासत्व का या किसी व्यक्ति की प्रकृति विरुद्ध काम वासना का विषय बनाया जाए या बनाए जाने के खतरे में पड़ सकता है वैसे उसे व्ययनित किया जाए या सम्भव्य जानते हुए करता है कि ऐसे व्यक्ति को उपर्युक्त बातों का विषय बनाया जाएगा या उपर्युक्त रूप से व्ययनित किया जाएगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से. जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
धारा 141 – विदेश से लड़की या लड़के का आयात
जो कोई भारत के बाहर किसी देश से इक्कीस वर्ष से कम आयु की किसी लड़की या अठारह वर्ष से कम आयु के किसी लड़के को भारत में इस आशय से आयात करेगा कि लड़की या लड़के को किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संभोग के लिए मजबूर किया जाए या बहकाया जाए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि लड़की या लड़के को मजबूर किया जाएगा या बहकाया जाएगा, तो उसे दस वर्ष तक के कारावास से दंडनीय होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
धारा 142 – अपहृत या अपहृत व्यक्ति को गलत तरीके से छुपाना या कैद में रखना
जो कोई, यह जानते हुए कि किसी व्यक्ति का अपहरण कर लिया गया है या अपहरण किया गया है, ऐसे व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाएगा या कैद करेगा, उसे उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने उसी इरादे या जानकारी के साथ, या उसी के लिए ऐसे व्यक्ति का अपहरण या अपहरण किया था। वह उद्देश्य जिसके लिए या जिसके लिए वह ऐसे व्यक्ति को छुपाता है या कारावास में रखता है।
धारा 143 – व्यक्ति की तस्करी
(1) जो कोई, शोषण के उद्देश्य से, किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को भर्ती, परिवहन, आश्रय, स्थानांतरण, या प्राप्त करता है, – (ए) धमकियों का उपयोग करना; या (बी) बल, या किसी अन्य प्रकार की जबरदस्ती का उपयोग करना; या (सी) अपहरण द्वारा; या (डी) धोखाधड़ी, या धोखाधड़ी का अभ्यास करके; या (ई) सत्ता के दुरुपयोग से; या (एफ) भर्ती, परिवहन, आश्रय, स्थानांतरित या प्राप्त व्यक्ति पर नियंत्रण रखने वाले किसी भी व्यक्ति की सहमति प्राप्त करने के लिए भुगतान या लाभ देने या प्राप्त करने सहित प्रलोभन द्वारा, तस्करी का अपराध करता है। br> स्पष्टीकरण 1.—अभिव्यक्ति "शोषण" में शारीरिक शोषण का कोई भी कार्य या किसी भी प्रकार का यौन शोषण, गुलामी या गुलामी, दासता, भिक्षावृत्ति या जबरन अंगों को हटाने जैसी प्रथाएं शामिल होंगी। स्पष्टीकरण 2.—तस्करी के अपराध के निर्धारण में पीड़ित की सहमति महत्वहीन है।
(2) जो कोई भी तस्करी का अपराध करेगा, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि सात साल से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
(3) जहां अपराध में एक से अधिक व्यक्तियों की तस्करी शामिल है, वहां कठोर कारावास से दंडनीय होगा, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(4) जहां अपराध में अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे की तस्करी शामिल है, वहां कठोर कारावास से दंडनीय होगा, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और यह भी होगा जुर्माना लगाया जा सकता है।
(5) जहां अपराध में अठारह वर्ष से कम उम्र के एक से अधिक बच्चों की तस्करी शामिल है, वहां कठोर कारावास से दंडनीय होगा, जिसकी अवधि चौदह वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी देना होगा।
(6) यदि किसी व्यक्ति को एक से अधिक अवसरों पर अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे की तस्करी के अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है, तो ऐसे व्यक्ति को आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा। , और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
(7) जब कोई लोक सेवक या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति की तस्करी में शामिल होता है, तो ऐसे लोक सेवक या पुलिस अधिकारी को आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा, और जुर्माना भी देना होगा.
धारा 144 – तस्करी किए गए व्यक्ति का शोषण
(1) जो कोई, जानबूझकर या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे की तस्करी की गई है, ऐसे बच्चे को किसी भी तरीके से यौन शोषण में शामिल करेगा, उसे एक अवधि के लिए कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जो इससे कम नहीं होगा पांच साल से अधिक, लेकिन जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(2) जो कोई, जानबूझकर या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि किसी व्यक्ति की तस्करी की गई है, ऐसे व्यक्ति को यौन संबंध बनाता है किसी भी तरीके से शोषण करने पर कठोर कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि तीन साल से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी देना होगा।
धारा 145 – दासों का आदतन व्यवहार
जो कोई आदतन गुलामों का आयात, निर्यात, हटाना, खरीदना, बेचना, तस्करी करना या उनका सौदा करता है, उसे आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, या दस साल से अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
धारा 146 – गैरकानूनी अनिवार्य श्रम
जो कोई किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध अवैध रूप से श्रम करने के लिए मजबूर करेगा, उसे एक वर्ष तक के कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।