BNS अध्याय XIV हिंदी में – धारा 227 से 269

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सभी अध्याय › अध्याय XIV (धारा 227 से 269) · Read in English

धारा 227 – झूठा साक्ष्य देना

जो कोई, शपथ द्वारा या कानून के स्पष्ट प्रावधान द्वारा सत्य बयान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, या किसी विषय पर घोषणा करने के लिए कानून द्वारा बाध्य है, कोई भी ऐसा बयान देता है जो झूठा है, और जिसके बारे में वह जानता है या विश्वास करता है झूठा होना या सच न मानना, झूठा साक्ष्य देना कहा जाता है। स्पष्टीकरण 1.—एक बयान इस खंड के अर्थ के भीतर है, चाहे वह मौखिक रूप से दिया गया हो या अन्यथा। स्पष्टीकरण 2.-प्रमाणित करने वाले व्यक्ति के विश्वास के बारे में एक गलत बयान इस धारा के अर्थ के अंतर्गत है, और एक व्यक्ति यह कहकर झूठा साक्ष्य देने का दोषी हो सकता है कि वह उस चीज़ पर विश्वास करता है जिस पर वह विश्वास नहीं करता है, साथ ही साथ यह बताते हुए कि वह एक ऐसी चीज़ जानता है जो वह नहीं जानता है। रेखांकन (ए) ए, एक उचित दावे के समर्थन में, जो बी ने जेड के खिलाफ एक हजार रुपये के लिए किया है, एक मुकदमे में झूठी शपथ लेता है कि उसने जेड को बी के दावे के न्याय को स्वीकार करते हुए सुना है। ए ने झूठा साक्ष्य दिया है। (बी) ए, सत्य बताने की शपथ से बंधा हुआ है, कहता है कि उसका मानना है कि एक निश्चित हस्ताक्षर ज़ेड की लिखावट है, जबकि उसे विश्वास नहीं है कि यह ज़ेड की लिखावट है। यहां ए वही बताता है जो वह जानता है झूठा हो, और इसलिए झूठा सबूत देता है। (सी) ए, ज़ेड की लिखावट के सामान्य चरित्र को जानते हुए, कहता है कि वह एक निश्चित हस्ताक्षर को ज़ेड की लिखावट मानता है; ए नेकनीयती से ऐसा मानते हुए। यहां ए का बयान केवल उसके विश्वास के बारे में है, और उसके विश्वास के बारे में सच है, और इसलिए, हालांकि हस्ताक्षर जेड की लिखावट नहीं हो सकता है, ए ने गलत सबूत नहीं दिया है। (डी) ए, सत्य बताने की शपथ से बंधा हुआ है, कहता है कि वह जानता है कि ज़ेड एक विशेष दिन पर एक विशेष स्थान पर था, इस विषय पर कुछ भी नहीं जानता था। A झूठा साक्ष्य देता है कि बताए गए दिन Z उस स्थान पर था या नहीं। (ई) ए, एक दुभाषिया या अनुवादक, किसी कथन या दस्तावेज़ की सच्ची व्याख्या या अनुवाद देता है या प्रमाणित करता है, जिसकी वह सही व्याख्या या अनुवाद करने के लिए शपथ से बाध्य है, जो नहीं है और जिसे वह सच नहीं मानता है व्याख्या या अनुवाद. क ने झूठा साक्ष्य दिया है।

धारा 228 – झूठे साक्ष्य गढ़ना

जो कोई किसी परिस्थिति को अस्तित्व में लाता है या किसी पुस्तक या रिकॉर्ड, या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में कोई झूठी प्रविष्टि करता है या कोई दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाता है जिसमें गलत बयान होता है, इस इरादे से कि ऐसी परिस्थिति, झूठी प्रविष्टि या गलत बयान साक्ष्य में दिखाई दे सकता है। न्यायिक कार्यवाही, या किसी लोक सेवक के समक्ष या किसी मध्यस्थ के समक्ष कानून द्वारा की गई कार्यवाही में, और ऐसी परिस्थिति, झूठी प्रविष्टि या गलत बयान, साक्ष्य में दिखाई देने पर, किसी भी व्यक्ति को ऐसी कार्यवाही में शामिल होने का कारण बन सकता है साक्ष्य पर राय, ऐसी कार्यवाही के परिणाम से संबंधित किसी भी मुद्दे को छूने वाली एक गलत राय पर विचार करना "झूठा साक्ष्य गढ़ना" कहा जाता है। रेखांकन (ए) ए ने ज़ेड के एक बॉक्स में गहने इस इरादे से रखे हैं कि वे उस बॉक्स में पाए जा सकते हैं, और इस परिस्थिति के कारण ज़ेड को चोरी का दोषी ठहराया जा सकता है। ए ने झूठे साक्ष्य गढ़े हैं। (बी) ए अदालत में पुष्टिकारक साक्ष्य के रूप में उपयोग करने के उद्देश्य से अपनी दुकान-पुस्तक में झूठी प्रविष्टि करता है। ए ने झूठे साक्ष्य गढ़े हैं। (सी) ए, जेड को एक आपराधिक साजिश के लिए दोषी ठहराने के इरादे से, जेड की लिखावट की नकल में एक पत्र लिखता है, जिसका तात्पर्य ऐसी आपराधिक साजिश में एक सहयोगी को संबोधित करना है, और पत्र को ऐसे स्थान पर रखता है जिसे वह जानता है कि पुलिस के अधिकारी तलाश कर सकते हैं. ए ने झूठे साक्ष्य गढ़े हैं।

धारा 229 – झूठे साक्ष्य के लिए सजा

(1) जो कोई, साशय किसी न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में मिथ्या साक्ष्य देता है या किसी न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से मिथ्या साक्ष्य गढ़ता है. वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा, और दस हजार रुपए तक के जुर्माने के लिए भी दायी होगा:
(2) जी कोई, उपधारा (1) में निर्दिष्ट से भिन्न किसी अन्य मामले में साशय मिथ्या साक्ष्य देता है या गढ़ता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और पांच हजार रुपए तक के जुर्माने का भी दायी होगा। स्पष्टीकरण 1 सेना न्यायालय के समक्ष विधारण न्यायिक कार्यवाही है। स्पष्टीकरण 2 न्यायालय के समक्ष कार्यवाही प्रारम्भ होने के पूर्व, जो विधि द्वारा निर्दिष्ट अन्वेषण होता है, वह न्यायिक कार्यवाही का एक पक्रम है, चाहे वह अन्वेषण किसी न्यायालय के सामने न भी हो। दृष्टांत यह अभिनिश्चय करने के प्रयोजन से कि क्या य को विधारण के लिए सुपर्द किया जाना चाहिए, मजिस्ट्रेट के समक्ष जांच में शपथ पर कथन करता है, जिसका वह मिथ्या होना जानता है। यह जांच न्यायिक कार्यवाही का एक प्रक्रम है, इसलिए क ने मिथ्या साक्ष्य दिया है। स्पष्टीकरण 3 न्यायालय ‌द्वारा विधि के अनुसार निर्दिष्ट और न्यायालय के प्राधिकार के अधीन संचालित अन्वेषण न्यायिक कार्यवाही का एक प्रक्रम है. चाहे वह अन्वेषण किसी न्यायालय के सामने न भी हो। इष्टांत संबंधित स्थान पर जा कर भूमि की सीमाओं को अभिनिश्चित करने के लिए न्यायालय द्वारा प्रतिनियुक्त अधिकारी के समक्ष जांच में क शपथ पर कथन करला है जिसका मिथ्या होना वह जानता है। यह जांच न्यायिक कार्यवाही का एक प्रक्रम है. इसलिए क ने मिथ्या साक्ष्य दिया है।

धारा 230 – मृत्युदंड अपराध की सजा दिलाने के इरादे से झूठे सबूत देना या गढ़ना

(1) जो कोई किसी व्यक्ति को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराने का इरादा रखते हुए, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करेगा, झूठे साक्ष्य देता या गढ़ता है, जो उस समय लागू कानून के अनुसार मृत्युदंड है। भारत को आजीवन कारावास या कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा जो पचास हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
(2) यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को उपधारा (1) में निर्दिष्ट झूठे साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषी ठहराया जाता है और फांसी दी जाती है, तो ऐसे झूठे साक्ष्य देने वाले व्यक्ति को या तो मौत से दंडित किया जाएगा या यहां पहले वर्णित सजा से दंडित किया जाएगा।

धारा 231 – आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध की सजा पाने के इरादे से झूठे सबूत देना या गढ़ना

जो कोई किसी व्यक्ति को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराने के इरादे से झूठा साक्ष्य देता है या गढ़ता है, या यह जानते हुए कि वह ऐसा करेगा, जो भारत में उस समय लागू कानून के अनुसार मृत्युदंड नहीं है, लेकिन आजीवन कारावास, या सात साल या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, उस अपराध के लिए दोषी व्यक्ति को दंडित किया जाएगा। रेखांकन A, Z को डकैती के लिए दोषी ठहराने के इरादे से अदालत के समक्ष झूठा साक्ष्य देता है। डकैती की सजा आजीवन कारावास या जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के दस साल तक की कठोर कारावास है। इसलिए, ए आजीवन कारावास या जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के कारावास के लिए उत्तरदायी है।

धारा 232 – किसी भी व्यक्ति को गलत साक्ष्य देने के लिए धमकाना

(1) जो कोई किसी अन्य व्यक्ति को उसके व्यक्ति, प्रतिष्ठा या संपत्ति या किसी ऐसे व्यक्ति के व्यक्ति या प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की धमकी देता है, जिसमें वह व्यक्ति रुचि रखता है, उस व्यक्ति को झूठा सबूत देने के इरादे से, कारावास से दंडित किया जाएगा। या तो एक अवधि के लिए विवरण जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों के साथ।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट झूठे साक्ष्य के परिणामस्वरूप निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है और सजा सुनाई जाती है, तो मौत या सात साल से अधिक की कैद की सजा दी जाती है, धमकी देने वाले व्यक्ति को उसी सजा और सजा से दंडित किया जाएगा। ऐसे निर्दोष व्यक्ति को उसी प्रकार और उसी सीमा तक दंडित किया जाता है और सजा दी जाती है।

धारा 233 – झूठे ज्ञात साक्ष्य का उपयोग करना

जो कोई भी किसी ऐसे सबूत को, जिसके बारे में वह जानता है कि वह झूठा या मनगढ़ंत है, सच्चे या असली साक्ष्य के रूप में भ्रष्ट तरीके से उपयोग या उपयोग करने का प्रयास करेगा, तो उसे उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने झूठा सबूत दिया या गढ़ा।

धारा 234 – गलत प्रमाणपत्र जारी करना या हस्ताक्षर करना

जो कोई भी कानून द्वारा दिए जाने या हस्ताक्षर किए जाने के लिए आवश्यक किसी भी प्रमाण पत्र को जारी या हस्ताक्षर करता है, या किसी ऐसे तथ्य से संबंधित है जिसके लिए ऐसा प्रमाण पत्र कानून द्वारा साक्ष्य में स्वीकार्य है, यह जानते हुए या विश्वास करते हुए कि ऐसा प्रमाण पत्र किसी भी महत्वपूर्ण बिंदु पर गलत है, उसे दंडित किया जाएगा। उसी प्रकार जैसे उसने झूठी गवाही दी हो।

धारा 235 – गलत माने जाने वाले प्रमाणपत्र को सत्य के रूप में उपयोग करना

जो कोई भी किसी भी ऐसे प्रमाण पत्र को सच्चे प्रमाण पत्र के रूप में भ्रष्ट रूप से उपयोग करता है या उपयोग करने का प्रयास करता है, यह जानते हुए कि यह किसी भी महत्वपूर्ण बिंदु पर झूठा है, उसे उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने झूठा सबूत दिया था।

धारा 236 – घोषणा में दिया गया गलत बयान जो कानून द्वारा साक्ष्य के रूप में प्राप्य है

जो कोई भी, अपने द्वारा की गई या हस्ताक्षरित किसी भी घोषणा में, जो किसी न्यायालय या किसी लोक सेवक या अन्य व्यक्ति की घोषणा है, किसी भी तथ्य को साक्ष्य के रूप में प्राप्त करने के लिए कानून द्वारा बाध्य या अधिकृत है, कोई भी ऐसा बयान देता है जो गलत है, और जिसे वह या तो झूठ जानता है या विश्वास करता है या सच होने में विश्वास नहीं करता है, जिस उद्देश्य के लिए घोषणा की गई है या उपयोग किया जाता है, उसके किसी भी महत्वपूर्ण बिंदु को छूने पर उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने झूठा साक्ष्य दिया हो।

धारा 237 – ऐसी घोषणा को गलत जानकर सत्य के रूप में उपयोग करना

जो कोई भी ऐसी किसी भी घोषणा को सत्य के रूप में भ्रष्ट रूप से उपयोग करता है या उपयोग करने का प्रयास करता है, यह जानते हुए भी कि वह किसी भी महत्वपूर्ण बिंदु पर झूठी है, उसे उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने गलत सबूत दिया था। स्पष्टीकरण.-एक घोषणा जो केवल कुछ अनौपचारिकता के आधार पर अस्वीकार्य है, धारा 234 और इस धारा के अर्थ के अंतर्गत एक घोषणा है।

धारा 238 – अपराध के सबूतों को गायब करना, या स्क्रीन अपराधी को गलत जानकारी देना

जो कोई, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के किए जाने के किसी साक्ष्य का विलोप, इस आशय से कारित करता है कि अपराधी को विधिक दंड से बचाया जा सके या उस आशय से उस अपराध से संबंधित कोई ऐसी सूचना देता है, जिसके मिथ्या होने का उसे जान या विश्वास है- (क) यदि वह अपराध जिसके किए जाने का उसे जान या विश्वास है, मृत्यु से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; (ख) और यदि वह अपराध आजीवन कारावास से, या ऐसे कारावास से, जो दस वर्ष तक का हो सकेगा, दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के, कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; (ग) यदि वह अपराध ऐसे कारावास से उतनी अवधि के लिए दंडनीय हो, जो दस वर्ष तक की न हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से उतनी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक-चौथाई तक हो सकेगी या जुर्माने से. या दोनों से, दंडित किया जाएगा । दृष्टांत क यह जानते हुए कि ख ने य की हत्या की है, ख को दंड से बचाने के आशय से मृत शरीर को छिपाने में ख की सहायता करता है। क दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय है

धारा 239 – सूचित करने के लिए बाध्य व्यक्ति द्वारा अपराध की जानकारी देने में जानबूझकर चूक

जो कोई, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, जानबूझकर उस अपराध के संबंध में कोई भी जानकारी देने से चूक जाता है, जिसे देने के लिए वह कानूनी रूप से बाध्य है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे छह तक बढ़ाया जा सकता है। महीने, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 240 – किए गए अपराध के संबंध में गलत जानकारी देना

238.जो कोई यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के संबंध में कोई जानकारी देता है जिसके बारे में वह जानता है या मानता है कि वह झूठ है, तो उसे दो साल तक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी। या जुर्माना, या दोनों के साथ। स्पष्टीकरण.- धारा 236 और 237 में और इस धारा में "अपराध" शब्द में भारत के बाहर किसी भी स्थान पर किया गया कोई भी कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता है, तो निम्नलिखित में से किसी भी धारा के तहत दंडनीय होगा, अर्थात् 97, 99 , 172, 173, 174, 175, 301,303, 304, 305, 306, 320, 325 और 326।

धारा 241 – दस्तावेज़ को सबूत के तौर पर पेश करने से रोकने के लिए उसे नष्ट करना

जो कोई किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को गुप्त या नष्ट कर देता है, जिसे वह अदालत में या किसी लोक सेवक के समक्ष वैध रूप से आयोजित किसी कार्यवाही में सबूत के रूप में पेश करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर किया जा सकता है, या ऐसे पूरे या किसी हिस्से को मिटा देता है या अपठनीय बना देता है। दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को उपरोक्त न्यायालय या लोक सेवक के समक्ष साक्ष्य के रूप में पेश करने या उपयोग करने से रोकने के इरादे से, या उसके बाद उसे कानूनी रूप से बुलाया जाएगा या उस उद्देश्य के लिए उसे पेश करने की आवश्यकता होगी, कारावास से दंडित किया जाएगा। किसी भी प्रकार की अवधि के लिए जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो पांच हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 242 – मुकदमे या अभियोजन में कार्य या कार्यवाही के उद्देश्य से गलत प्रतिरूपण

जो कोई दूसरे का मिथ्या रूप धारण करता है, और ऐसे कल्पित चरित्र में कोई स्वीकारोक्ति या बयान देता है, या निर्णय स्वीकार करता है, या कोई प्रक्रिया जारी करवाता है या जमानत या सुरक्षा प्राप्त करता है, या किसी मुकदमे या आपराधिक अभियोजन में कोई अन्य कार्य करता है, उसे दंडित किया जाएगा। किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 243 – संपत्ति को जब्त या निष्पादन में जब्त होने से रोकने के लिए संपत्ति को धोखाधड़ी से हटाना या छुपाना

जो कोई किसी व्यक्ति की किसी संपत्ति या उसमें मौजूद किसी हित को धोखे से हटाता है, छिपाता है, स्थानांतरित करता है या किसी व्यक्ति को सौंपता है, इस इरादे से कि उस संपत्ति या उसमें मौजूद ब्याज को सजा के तहत जब्ती या जुर्माने की संतुष्टि के रूप में लेने से रोका जाए। , या जिसे वह जानता है कि किसी न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाए जाने की संभावना है, या किसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में लिए जाने से, जो किया गया है, या जिसे वह जानता है कि किसी न्यायालय द्वारा दिए जाने की संभावना है किसी सिविल मुकदमे में तीन साल तक की कैद या पांच हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 244 – संपत्ति को ज़ब्त या निष्पादन में जब्त होने से रोकने के लिए धोखाधड़ी से किया गया दावा

जो कोई किसी संपत्ति या उसमें किसी हित को धोखाधड़ी से स्वीकार करता है, प्राप्त करता है या दावा करता है, यह जानते हुए कि उसके पास ऐसी संपत्ति या हित पर कोई अधिकार या उचित दावा नहीं है, या किसी संपत्ति या उसमें किसी भी हित के किसी भी अधिकार को छूने के लिए कोई धोखाधड़ी करता है, जिससे उसे रोकने का इरादा हो। उस संपत्ति या उसमें मौजूद ब्याज को किसी सजा के तहत जब्ती या जुर्माने की संतुष्टि के रूप में लिया जाना चाहिए, जिसे सुनाया जा चुका है, या जिसे वह जानता है कि किसी न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाए जाने की संभावना है, या निष्पादन में ली जा रही है। किसी सिविल मुकदमे में किसी न्यायालय द्वारा की गई डिक्री या आदेश के बारे में, या जिसके बारे में वह जानता है कि किए जाने की संभावना है, दोषी को किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माने से दंडित किया जाएगा। या दोनों के साथ.

धारा 245 – देय राशि के लिए धोखाधड़ी से डिक्री भुगतना

जो कोई किसी व्यक्ति के मुकदमे में ऐसी राशि के लिए जो उस व्यक्ति को देय नहीं है या उससे बड़ी राशि के लिए या किसी संपत्ति या संपत्ति में हित के लिए, जिससे वह व्यक्ति धोखाधड़ी से डिक्री या आदेश पारित कराता है या करवाता है। हकदार नहीं है, या धोखाधड़ी से किसी डिक्री या आदेश को उसके संतुष्ट होने के बाद निष्पादित करने का कारण बनता है या पीड़ित करता है, या किसी भी चीज़ के संबंध में जिसके संबंध में वह संतुष्ट हो गया है, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जो बढ़ सकती है दो साल की सज़ा, या जुर्माना, या दोनों। रेखांकन A, Z के विरुद्ध एक मुकदमा संस्थित करता है। बी, या तो अपने खाते से या ज़ेड के लाभ के लिए, ज़ेड की संपत्ति की किसी भी बिक्री की आय में हिस्सा ले सकता है जो ए के डिक्री के तहत किया जा सकता है। Z ने इस धारा के अंतर्गत अपराध किया है।

धारा 246 – बेईमानी से अदालत में झूठा दावा करना

जो कोई धोखाधड़ी से या बेईमानी से, या किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने या परेशान करने के इरादे से, अदालत में कोई दावा करता है जिसके बारे में वह जानता है कि वह झूठा है, उसे दो साल तक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, और उसे दंडित किया जाएगा। जुर्माना भी देना होगा.

धारा 247 – धोखाधड़ी से देय राशि के लिए डिक्री प्राप्त करना

जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी ऐसी राशि के लिए जो देय नहीं है, या देय राशि से अधिक राशि के लिए या किसी संपत्ति या संपत्ति में हित के लिए, जिसका वह हकदार नहीं है, धोखाधड़ी से डिक्री या आदेश प्राप्त करता है, या धोखाधड़ी से डिक्री या आदेश प्राप्त करता है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उसके संतुष्ट होने के बाद या किसी भी बात के लिए जिसके संबंध में वह संतुष्ट हो चुका है, निष्पादित किया गया है, या धोखे से पीड़ित किया गया है या उसके नाम पर ऐसा कोई कार्य करने की अनुमति दी गई है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे बढ़ाया जा सकता है। दो साल की सज़ा, या जुर्माना, या दोनों।

धारा 248 – चोट पहुंचाने के इरादे से लगाया गया अपराध का झूठा आरोप

जो कोई किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने के इरादे से उस व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू करता है या करवाता है, या किसी व्यक्ति पर अपराध करने का झूठा आरोप लगाता है, यह जानते हुए कि ऐसी कार्यवाही के लिए कोई उचित या वैध आधार नहीं है या उस व्यक्ति के विरुद्ध आरोप,— (ए) किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना जो दो लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से; (बी) यदि ऐसी आपराधिक कार्यवाही मृत्यु, आजीवन कारावास, या दस साल या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के झूठे आरोप पर शुरू की जाती है, तो दस साल तक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय होगा, और जुर्माना भी देना होगा।

धारा 249 – अपराधी को शरण देना

जब भी कोई अपराध किया जाता है, तो जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को आश्रय देता है या छुपाता है जिसे वह जानता है या उसके पास अपराधी होने पर विश्वास करने का कारण है, उसे कानूनी सजा से बचाने के इरादे से, – (ए) यदि अपराध मौत से दंडनीय है, तो उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (बी) यदि अपराध आजीवन कारावास से दंडनीय है, या कारावास से जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (सी) यदि अपराध कारावास से दंडनीय है जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, न कि दस वर्ष तक, तो अपराध के लिए प्रदान की गई अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा जो कि सबसे लंबी अवधि के एक-चौथाई भाग तक बढ़ाया जा सकता है। अपराध के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। स्पष्टीकरण.-इस धारा में "अपराध" में भारत के बाहर किसी भी स्थान पर किया गया कोई भी कार्य शामिल है, जो यदि भारत में किया जाता है, तो निम्नलिखित में से किसी भी धारा के तहत दंडनीय होगा, अर्थात् 97, 99, 172, 173, 174, 175 , 301,303, 304, 305, 306, 320, 325 और 326 और ऐसा प्रत्येक कार्य, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, दंडनीय माना जाएगा जैसे कि आरोपी व्यक्ति भारत में इसका दोषी रहा हो। अपवाद.-इस धारा का विस्तार किसी ऐसे मामले पर नहीं होगा जिसमें अपराधी के पति/पत्नी द्वारा शरण देना या छिपाना हो। रेखांकन ए, यह जानते हुए कि बी ने डकैती की है, जानबूझकर बी को छुपाता है ताकि उसे कानूनी सजा से बचाया जा सके। यहां, चूंकि बी आजीवन कारावास के लिए उत्तरदायी है, ए तीन साल से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास के लिए उत्तरदायी है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी है।

धारा 250 – किसी अपराधी को सजा से बचाने के लिए उपहार आदि लेना

जो कोई अपने अपराध को छुपाने या किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से रोकने के विचार से अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण स्वीकार करता है या प्राप्त करने का प्रयास करता है, या अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति का कोई पुनर्स्थापन स्वीकार करता है। किसी भी अपराध के लिए सजा, या किसी व्यक्ति को कानूनी सजा दिलाने के उद्देश्य से उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर,– (ए) यदि अपराध मौत से दंडनीय है, तो सात साल तक की अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (बी) यदि अपराध आजीवन कारावास से दंडनीय है, या कारावास से जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (सी) यदि अपराध दस साल तक के कारावास से दंडनीय है, तो अपराध के लिए प्रदान की गई अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, जो अपराध के लिए प्रदान की गई कारावास की सबसे लंबी अवधि के एक-चौथाई भाग तक बढ़ सकता है, या जुर्माने से या दोनों से।

धारा 251 – अपराधी की जांच के लिए उपहार की पेशकश करना या संपत्ति की बहाली करना

जो कोई किसी व्यक्ति को कोई परितोषण देता है या देता है, या देने या देने की पेशकश करता है या करने के लिए सहमत होता है, या उस व्यक्ति द्वारा किसी अपराध को छिपाने के विचार में, या किसी व्यक्ति की स्क्रीनिंग के विचार में, किसी भी व्यक्ति को किसी भी संपत्ति को बहाल करता है या बहाल करता है। किसी भी अपराध के लिए कानूनी सजा से, या किसी व्यक्ति को कानूनी सजा दिलाने के उद्देश्य से उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने से,– (ए) यदि अपराध मौत से दंडनीय है, तो सात साल तक की अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (बी) यदि अपराध आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय है जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (सी) यदि अपराध दस साल तक के कारावास से दंडनीय है, तो अपराध के लिए प्रदान की गई अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, जो अपराध के लिए प्रदान की गई कारावास की सबसे लंबी अवधि के एक-चौथाई भाग तक बढ़ सकता है, या जुर्माने से या दोनों से।

धारा 252 – चोरी की गई संपत्ति को वापस पाने में मदद के लिए उपहार लेना, आदि

जो कोई दिखावे के तहत या किसी व्यक्ति को किसी चल संपत्ति को वापस पाने में मदद करने के लिए कोई परितोषण लेता है या लेने के लिए सहमत होता है या सहमति देता है, जिससे वह इस संहिता के तहत दंडनीय किसी भी अपराध से वंचित हो गया है, जब तक कि वह अपने सभी साधनों का उपयोग नहीं करता है अपराधी को पकड़वाने और अपराध के लिए दोषी ठहराने की शक्ति, किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जा सकता है जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 253 – ऐसे अपराधी को शरण देना जो हिरासत से भाग गया है या जिसकी गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है

जब भी कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है या उस पर आरोप लगाया जाता है, उस अपराध के लिए कानूनी हिरासत में होते हुए, ऐसी हिरासत से भाग जाता है, या जब भी कोई लोक सेवक, ऐसे लोक सेवक की वैध शक्तियों का प्रयोग करते हुए, किसी निश्चित व्यक्ति को आदेश देता है किसी अपराध के लिए पकड़ा गया, जो कोई, ऐसे भागने या पकड़े जाने के आदेश के बारे में जानते हुए, पकड़े जाने से रोकने के इरादे से उस व्यक्ति को आश्रय देता है या छुपाता है, उसे निम्नलिखित तरीके से दंडित किया जाएगा, अर्थात्:– (ए) यदि वह अपराध जिसके लिए व्यक्ति हिरासत में था या उसे पकड़ने का आदेश दिया गया है, मौत से दंडनीय है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ; (बी) यदि अपराध आजीवन कारावास या दस साल के कारावास से दंडनीय है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के; (सी) यदि अपराध कारावास से दंडनीय है जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और दस साल तक नहीं, तो उसे अपराध के लिए प्रदान की गई अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा जो कि सबसे लंबी अवधि के एक-चौथाई भाग तक बढ़ाया जा सकता है ऐसे अपराध के लिए कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। स्पष्टीकरण.-इस धारा में "अपराध" में कोई कार्य या चूक भी शामिल है जिसके लिए किसी व्यक्ति पर भारत से बाहर दोषी होने का आरोप लगाया जाता है, यदि वह भारत में इसका दोषी होता, तो अपराध के रूप में दंडनीय होता, और जिसके लिए वह प्रत्यर्पण से संबंधित किसी भी कानून के तहत, या अन्यथा, भारत में गिरफ्तार किए जाने या हिरासत में लिए जाने के लिए उत्तरदायी है, और इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसा प्रत्येक कार्य या चूक, दंडनीय माना जाएगा। आरोपी व्यक्ति भारत में इसका दोषी था। अपवाद.—यह प्रावधान उस मामले तक लागू नहीं होता है जिसमें पकड़े जाने वाले व्यक्ति के पति या पत्नी द्वारा शरण देना या छिपाना शामिल है।

धारा 254 – लुटेरों या डकैतों को शरण देने के लिए जुर्माना

जो कोई यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई व्यक्ति लूट या डकैती करने वाला है या हाल ही में किया है, ऐसी लूट या डकैती को अंजाम देने में मदद करने के इरादे से, या उनकी स्क्रीनिंग करने के इरादे से उन्हें या उनमें से किसी को शरण देता है या सजा से उनमें से किसी को भी कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह महत्वहीन है कि लूट या डकैती भारत के भीतर या उसके बाहर करने का इरादा है, या किया गया है। अपवाद.—यह धारा उस मामले तक विस्तारित नहीं है जिसमें संश्रय अपराधी के पति या पत्नी द्वारा दिया गया है।

धारा 255 – लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को सजा से या संपत्ति को जब्त होने से बचाने के इरादे से कानून के निर्देशों की अवहेलना करना

जो कोई, एक लोक सेवक होते हुए, जानबूझकर कानून के किसी भी निर्देश की अवज्ञा करता है, जिस तरह से उसे ऐसे लोक सेवक के रूप में आचरण करना है, इस इरादे से कि वह किसी को बचाएगा, या यह जानते हुए कि वह बचाएगा। व्यक्ति को कानूनी सज़ा से, या उसे उस सज़ा से कम सज़ा के अधीन करना जिसके लिए वह उत्तरदायी है, या बचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह किसी भी संपत्ति को जब्त होने से या किसी भी आरोप से बचाने की संभावना रखता है जिसके लिए वह कानून द्वारा उत्तरदायी है , किसी एक अवधि के लिए कारावास से, जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 256 – लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को सजा से या संपत्ति को जब्त होने से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड या लेखन तैयार करना

जो कोई, एक लोक सेवक होने के नाते, और ऐसे लोक सेवक होने के नाते, किसी भी रिकॉर्ड या अन्य लेखन की तैयारी के लिए जिम्मेदार है, उस रिकॉर्ड या लेखन को इस तरीके से तैयार करता है जिसके बारे में वह जानता है कि वह गलत है, ऐसा करने के इरादे से, या जानते हुए भी यह संभावना है कि वह जनता को या किसी व्यक्ति को नुकसान या चोट पहुंचाएगा, या बचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि वह इस तरह किसी व्यक्ति को कानूनी सजा से बचाएगा, या बचाने के इरादे से या यह जानते हुए कि वह किसी भी संपत्ति को जब्ती या अन्य आरोप से बचा सकता है जिसके लिए वह कानून द्वारा उत्तरदायी है, उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना से, या से दंडित किया जाएगा। दोनों।

धारा 257 – न्यायिक कार्यवाही में लोक सेवक द्वारा कानून के विपरीत भ्रष्ट तरीके से रिपोर्ट आदि बनाना

जो कोई, लोक सेवक होते हुए, न्यायिक कार्यवाही के किसी भी चरण में भ्रष्ट या दुर्भावनापूर्ण ढंग से कोई रिपोर्ट, आदेश, फैसला या निर्णय देता है या सुनाता है, जिसके बारे में वह जानता है कि वह कानून के विपरीत है, तो उसे दोनों में से किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 258 – अधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा परीक्षण या कारावास के लिए प्रतिबद्धता, जो जानता है कि वह कानून के विपरीत कार्य कर रहा है

जो कोई, किसी ऐसे पद पर रहते हुए, जो उसे व्यक्तियों को मुकदमे के लिए या कारावास में रखने के लिए, या व्यक्तियों को कारावास में रखने के लिए कानूनी अधिकार देता है, भ्रष्ट या दुर्भावनापूर्ण रूप से किसी व्यक्ति को मुकदमे के लिए या कारावास में रखता है, या किसी व्यक्ति को कारावास में रखता है। यह जानते हुए कि ऐसा करके वह कानून के विपरीत काम कर रहा है, उस अधिकार का प्रयोग करने पर सात साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 259 – पकड़ने के लिए बाध्य लोक सेवक की ओर से पकड़ने में जानबूझकर चूक

जो कोई, एक लोक सेवक होते हुए, किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ने या कारावास में रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, जिस पर किसी अपराध के लिए आरोप लगाया गया है या पकड़े जाने के लिए उत्तरदायी है, जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को पकड़ना छोड़ देता है, या जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को भागने के लिए मजबूर करता है, या जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को ऐसे कारावास से भागने या भागने का प्रयास करने में सहायता करता है, तो दंडित किया जाएगा,– (ए) यदि कारावास में बंद व्यक्ति पर, या जिसे पकड़ा जाना चाहिए था, किसी अपराध के लिए आरोप लगाया गया था, या पकड़े जाने के लिए उत्तरदायी था, तो जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के, सात साल तक की कारावास की सजा हो सकती है। मौत की सज़ा का प्रावधान; या (बी) यदि कारावास में बंद व्यक्ति, या जिसे पकड़ा जाना चाहिए था, पर किसी अपराध के लिए आरोप लगाया गया था, या पकड़े जाने के लिए उत्तरदायी था, तो जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के तीन साल तक की कारावास की सजा हो सकती है। आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडनीय; या (सी) यदि कारावास में बंद व्यक्ति, या जिसे पकड़ा जाना चाहिए था, पर किसी अपराध के लिए आरोप लगाया गया था, या पकड़े जाने के लिए उत्तरदायी था, तो किसी अवधि के लिए कारावास, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के साथ दिया जा सकता है। दस वर्ष से कम अवधि के कारावास से दंडनीय।

धारा 260 – सजा के तहत या कानूनी रूप से प्रतिबद्ध व्यक्ति को पकड़ने के लिए बाध्य लोक सेवक की ओर से जानबूझकर चूक करना

जो कोई, एक लोक सेवक होने के नाते, किसी भी अपराध के लिए अदालत की सजा के तहत किसी भी व्यक्ति को पकड़ने या कारावास में रखने या कानूनी रूप से हिरासत में रखने के लिए ऐसे लोक सेवक के रूप में कानूनी रूप से बाध्य है, जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को पकड़ने से चूक जाता है, या जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को पीड़ित करता है भागने या जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को भागने में सहायता करने या ऐसे कारावास से भागने का प्रयास करने पर दंडित किया जाएगा, – (ए) यदि कारावास में बंद व्यक्ति, या जिसे पकड़ा जाना चाहिए था, मौत की सजा के तहत है, तो आजीवन कारावास या चौदह वर्ष तक की कारावास की सजा, जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के साथ; या (बी) यदि कारावास में बंद व्यक्ति या जिसे पकड़ा जाना चाहिए था, वह अदालत की सजा के अधीन है या किसी के आधार पर, सात साल तक की जेल हो सकती है, जुर्माने के साथ या बिना जुर्माने के साथ। ऐसी सज़ा को आजीवन कारावास या दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास में बदलना; या (सी) किसी अवधि के लिए कारावास, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों के साथ, यदि कारावास में व्यक्ति या जिसे पकड़ा जाना चाहिए था, अदालत की सजा के अधीन है। अवधि दस वर्ष तक नहीं बढ़ाई जा सकती या यदि व्यक्ति कानूनी रूप से हिरासत के लिए प्रतिबद्ध था।

धारा 261 – लोक सेवक द्वारा लापरवाही से कारावास या हिरासत से भागना

जो कोई, एक लोक सेवक होने के नाते, किसी ऐसे व्यक्ति को कारावास में रखने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है जिस पर किसी अपराध का आरोप लगाया गया है या दोषी ठहराया गया है या कानूनी रूप से हिरासत में रखा गया है, लापरवाही से ऐसे व्यक्ति को कारावास से भागने के लिए पीड़ित करता है, उसे साधारण कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 262 – किसी व्यक्ति द्वारा उसकी वैध गिरफ्तारी का विरोध या बाधा

जो कोई जानबूझकर किसी ऐसे अपराध के लिए खुद की वैध गिरफ्तारी में कोई प्रतिरोध या अवैध बाधा उत्पन्न करता है जिसके लिए उस पर आरोप लगाया गया है या जिसके लिए उसे दोषी ठहराया गया है, या किसी भी हिरासत से भाग जाता है या भागने का प्रयास करता है जिसमें वह कानूनी रूप से ऐसे किसी के लिए हिरासत में लिया गया है अपराध करने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण। -इस धारा में सजा उस सजा के अतिरिक्त है जिसके लिए गिरफ्तार किया जाने वाला या हिरासत में लिया जाने वाला व्यक्ति उस अपराध के लिए उत्तरदायी था जिसके लिए उस पर आरोप लगाया गया था, या जिसके लिए उसे दोषी ठहराया गया था।

धारा 263 – किसी अन्य व्यक्ति की वैध गिरफ्तारी का विरोध या बाधा

जो कोई जानबूझकर किसी अपराध के लिए किसी अन्य व्यक्ति की वैध गिरफ्तारी के लिए कोई प्रतिरोध या अवैध बाधा उत्पन्न करता है, या किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी हिरासत से बचाता है या छुड़ाने का प्रयास करता है जिसमें वह व्यक्ति किसी अपराध के लिए कानूनी रूप से हिरासत में है, – (ए) किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा; (बी) यदि पकड़ा जाने वाला व्यक्ति, या बचाया गया या छुड़ाने का प्रयास किया गया व्यक्ति, आजीवन कारावास या दस साल तक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध के लिए आरोपित या पकड़े जाने के लिए उत्तरदायी है, तो उसे दोषी ठहराया जाएगा। किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (सी) यदि जिस व्यक्ति को पकड़ा जाना है, या बचाया जाना है, या छुड़ाने का प्रयास किया गया है, उस पर मौत की सजा वाले अपराध का आरोप लगाया गया है या पकड़े जाने के लिए उत्तरदायी है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे सात तक बढ़ाया जा सकता है। वर्ष, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा; (डी) यदि जिस व्यक्ति को पकड़ा जाना है या बचाया जाना है, या छुड़ाने का प्रयास किया गया है, वह अदालत की सजा के तहत या ऐसी सजा को कम करने के आधार पर, आजीवन कारावास या दस साल की कैद के लिए उत्तरदायी है। साल या उससे अधिक की सजा दी जाएगी, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है; (ई) यदि पकड़ा जाने वाला या बचाया जाने वाला, या छुड़ाने का प्रयास किया जाने वाला व्यक्ति मौत की सजा के तहत है, तो उसे आजीवन कारावास या दस साल से अधिक की अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, और इसके लिए उत्तरदायी भी होगा अच्छा।

धारा 264 – लोक सेवक की ओर से गिरफ्तार करने में चूक करना, या भागने का कष्ट सहना, ऐसे मामलों में, जिनके लिए अन्यथा प्रावधान नहीं किया गया है

जो कोई, एक लोक सेवक होने के नाते, धारा 257, धारा 258 या धारा 259, या किसी अन्य कानून में किसी भी समय के लिए प्रदान नहीं किए गए किसी भी मामले में किसी भी व्यक्ति को पकड़ने, या कारावास में रखने के लिए ऐसे लोक सेवक के रूप में कानूनी रूप से बाध्य है। बलपूर्वक, उस व्यक्ति को पकड़ने में चूक करता है या उसे कारावास से भागने देता है, दंडित किया जाएगा- (ए) यदि वह जानबूझकर ऐसा करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा; और (बी) यदि वह लापरवाही से ऐसा करता है, तो दो साल तक की साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 265 – अन्यथा प्रदान न किए गए मामलों में वैध गिरफ्तारी या भागने या बचाव में प्रतिरोध या बाधा

जो कोई भी, किसी भी मामले में धारा 260 या धारा 261 या उस समय लागू किसी अन्य कानून में प्रदान नहीं किया गया है, जानबूझकर खुद की या किसी अन्य व्यक्ति की वैध गिरफ्तारी के लिए कोई प्रतिरोध या अवैध बाधा उत्पन्न करता है, या भाग जाता है या किसी भी हिरासत से भागने का प्रयास करता है जिसमें वह कानूनी रूप से हिरासत में है, या किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी हिरासत से बचाने या छुड़ाने का प्रयास करता है जिसमें वह व्यक्ति कानूनी रूप से हिरासत में है, तो उसे छह महीने तक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी। , या जुर्माना, या दोनों के साथ।

धारा 266 – सजा से छूट की शर्त का उल्लंघन

जो कोई, सज़ा में किसी भी सशर्त छूट को स्वीकार करते हुए, जानबूझकर किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है, जिस पर ऐसी छूट दी गई थी, उसे उस सज़ा से दंडित किया जाएगा जिसके लिए उसे मूल रूप से सज़ा दी गई थी, यदि उसने पहले से ही उस सज़ा का कोई हिस्सा नहीं भुगता है, और यदि वह उस सज़ा का कोई भी हिस्सा भुगता है, फिर उस सज़ा का इतना हिस्सा जितना उसने पहले से नहीं भुगता है।

धारा 267 – न्यायिक कार्यवाही में बैठे लोक सेवक का जानबूझकर अपमान या व्यवधान

जो कोई जानबूझकर किसी लोक सेवक का अपमान करता है, या किसी व्यवधान का कारण बनता है, जबकि ऐसा लोक सेवक न्यायिक कार्यवाही के किसी भी चरण में बैठा है, तो उसे छह महीने तक की अवधि के लिए साधारण कारावास या जुर्माने से दंडित किया जाएगा। जिसे पांच हजार रुपये तक या दोनों के साथ बढ़ाया जा सकता है।

धारा 268 – एक मूल्यांकनकर्ता का व्यक्तित्व

जो कोई, प्रतिरूपण द्वारा या अन्यथा, जानबूझकर या जानबूझकर खुद को किसी भी मामले में मूल्यांकनकर्ता के रूप में वापस आने, पैनल में शामिल करने या शपथ लेने के लिए कष्ट देगा, जिसमें वह जानता है कि वह कानून द्वारा इस तरह वापस आने, पैनल में शामिल होने या शपथ लेने का हकदार नहीं है, या यह जानते हुए कि उसे इस प्रकार लौटाया गया है, पैनल में शामिल किया गया है या कानून के विपरीत शपथ ली गई है, स्वेच्छा से ऐसे मूल्यांकनकर्ता पर काम करेगा, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 269 – जमानत या बांड पर रिहा किए गए व्यक्ति द्वारा अदालत में उपस्थित होने में विफलता

जो कोई, किसी अपराध का आरोप लगाया गया है और जमानत या जमानत के बिना बांड पर रिहा किया गया है, वह जमानत या बांड की शर्तों के अनुसार अदालत में उपस्थित होने के लिए पर्याप्त कारण (साबित करने का भार उस पर होगा) के बिना असफल रहता है। , दोनों में से किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण.—इस धारा के अंतर्गत दंड है— (ए) उस सज़ा के अलावा जिसके लिए अपराधी उस अपराध के लिए दोषसिद्धि पर उत्तरदायी होगा जिसके लिए उस पर आरोप लगाया गया है; और (बी) बांड को जब्त करने का आदेश देने की अदालत की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना।