BNS अध्याय V हिंदी में – धारा 63 से 99

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धारा 63 – बलात्कार

एक आदमी को "बलात्कार" करने वाला माना जाता है यदि वह— (ए) अपने लिंग को किसी भी हद तक किसी महिला की योनि, मुंह, मूत्रमार्ग या गुदा में प्रवेश कराता है या उसे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए मजबूर करता है; या (बी) किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में किसी भी हद तक कोई वस्तु या शरीर का हिस्सा, जो लिंग नहीं है, डालता है या उसे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए मजबूर करता है; या (सी) किसी महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में हेरफेर करता है ताकि ऐसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग, गुदा या शरीर के किसी भी हिस्से में प्रवेश किया जा सके या उसे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए मजबूर किया जा सके; या (डी) निम्नलिखित सात विवरणों में से किसी के अंतर्गत आने वाली परिस्थितियों में, किसी महिला की योनि, गुदा, मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है या उसे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए मजबूर करता है: –
(i) उसकी इच्छा के विरुद्ध.
(ii) उसकी सहमति के बिना।
(iii) उसकी सहमति से, जब उसकी सहमति उसे या किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसमें वह रुचि रखती है, मृत्यु या चोट के भय में डालकर प्राप्त की गई है।
(iv) उसकी सहमति से, जब पुरुष जानता है कि वह उसका पति नहीं है और उसकी सहमति इसलिए दी गई है क्योंकि वह मानती है कि वह एक और पुरुष है जिससे वह है या खुद को कानूनी रूप से विवाहित मानती है।
(v) उसकी सहमति से, जब ऐसी सहमति देते समय, मानसिक बीमारी या नशे के कारण या उसके द्वारा व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य के माध्यम से किसी मूर्खतापूर्ण या अस्वास्थ्यकर पदार्थ के सेवन के कारण, वह उसकी प्रकृति और परिणामों को समझने में असमर्थ है जिस पर वह सहमति देती है।
(vi) उसकी सहमति से या उसके बिना, जब वह अठारह वर्ष से कम उम्र की हो।
(vii) जब वह सहमति संप्रेषित करने में असमर्थ हो। स्पष्टीकरण 1.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "योनि" में लेबिया मेजा भी शामिल होगा। स्पष्टीकरण 2.-सहमति का अर्थ एक स्पष्ट स्वैच्छिक समझौता है जब महिला शब्दों, इशारों या मौखिक या गैर-मौखिक संचार के किसी भी रूप से विशिष्ट यौन कार्य में भाग लेने की इच्छा व्यक्त करती है: बशर्ते कि वह महिला जो शारीरिक रूप से कार्य का विरोध नहीं करती है केवल उस तथ्य के कारण प्रवेश को यौन गतिविधि के लिए सहमति नहीं माना जाएगा। अपवाद.1–एक चिकित्सा प्रक्रिया या हस्तक्षेप को बलात्कार नहीं माना जाएगा। अपवाद.2–किसी पुरुष द्वारा अपनी ही पत्नी, जिसकी पत्नी अठारह वर्ष से कम उम्र की न हो, के साथ यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार नहीं है।

धारा 64 – बलात्कार के लिए सजा

(1) जो कोई, उपधारा (2) में उपबंधित मामलों के सिवाय, बलात्संग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । लिए दंड । के
(2) जो कोई- (क) पुलिस अधिकारी होते हुए-
(i) उस पुलिस थाने की सीमाओं के भीतर, जिसमें ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त है, बलात्संग करता है; या
(ii) किसी थाने के परिसर में बलात्संग करता है; या
(iii) ऐसे पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में या ऐसे पुलिस अधिकारी के अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में, किसी महिला से बलात्संगकरता है; या (ख) लोक सेवक होते हुए, ऐसे लोक सेवक की अभिरक्षा में या ऐसे लोक सेवक के अधीनस्थ किसी लोक सेवक की अभिरक्षा में की किसी महिला से बलात्संग करता है; या (ग) केंद्रीय या किसी राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र में अभिनियोजित सशस्त्र बलों का सदस्य होते हुए, उस क्षेत्र में बलात्संग करता है; या (घ) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान के या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में होते हुए, ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषण गृह, स्थान या संस्था के किसी अंतःवासी से बलात्संग करता है; या (ङ) किसी अस्पताल के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में होते हुए, उस अस्पताल में किसी महिला से बलात्संग करता है; या (च) किसी महिला का नातेदार, संरक्षक या उसका अध्यापक या उसके प्रति विश्वास या प्राधिकार की हैसियत में का कोई व्यक्ति होते हुए, उस महिला से बलात्संग करता है; या(छ) सांप्रदायिक या पंथीय हिंसा के दौरान बलात्संग करता है; या (ज) किसी महिला से यह जानते हुए कि वह गर्भवती है, बलात्संग करता है; या (झ) उस महिला से, जो सम्मति देने में असमर्थ है, बलात्संग करता है; या (ञ) किसी महिला पर नियंत्रण या प्रभाव रखने की स्थिति में होते हुए, उस महिला से बलात्संग करता है या (ट) मानसिक या शारीरिक असमर्थता से ग्रसित किसी महिला से बलात्संग करता है; या (ठ) बलात्संग करते समय किसी महिला को गंभीर शारीरिक अपहानि कारित करता है या अपंग बनाता है या विद्रूपित करता है या उसके जीवन को संकटापन्न करता है; या (ड) उसी महिला से बार-बार बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति का शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।स्पष्टीकरण इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, – (क) "सशस्त्र बल" से नौसेना, सेना और वायु सेना अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन गठित सशस्त्र बलों का कोई सदस्य भी है, जिसमें ऐसे अर्धसैनिक बल और कोई सहायक बल भी सम्मिलित हैं, जो केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन हैं; (ख) "अस्पताल" से अस्पताल का अहाता अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत किसी ऐसी संस्था का अहाता भी है, जो स्वास्थ्य लाभ कर रहे व्यक्तियों को या चिकित्सीयदेखरेख या पुनर्वास की अपेक्षा रखने वाले व्यक्तियों के प्रवेश और उपचार करने के लिए है : (ग) "पुलिस अधिकारी" का वही अर्थ होगा जो पुलिस अधिनियम, 1861 के अधीन "पुलिस" पद में उसका है; 1861 का 5 (घ) “महिलाओं या शिशुओं की संस्था" से ऐसी संस्था अभिप्रेत है चाहे वह अनाथालय या उपेक्षित महिलाओं या शिशुओं के लिए घर या विधवा आश्रम या किसी अन्य नाम से ज्ञात कोई संस्था हो, जो महिलाओं और शिशुओं को ग्रहण करने और उनकी देखभाल करने के लिए स्थापित और अनुरक्षित है ।

धारा 65 – कुछ मामलों में बलात्कार के लिए सजा

(1) जो कोई, सोलह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा : परंतु ऐसा जुर्माना, पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और उसके पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा : परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा ।
(2) जो कोई, बारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत है, तक की हो सकेगी और जुर्माने से, या मृत्युदंड से, दंडित किया जाएगा : परंतु ऐसा जुर्माना, पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और उसके पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा : परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा ।

धारा 66 – मौत का कारण बनने या पीड़ित की लगातार क्षीण अवस्था के लिए सजा

जो कोई, धारा 64 की उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत दंडनीय अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान चोट पहुंचाता है जिससे महिला की मृत्यु हो जाती है या महिला को मौत की सजा मिलती है। लगातार वनस्पति अवस्था में रहने पर कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास या मृत्यु हो सकती है।

धारा 67 – अलगाव के दौरान पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ या अधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा संभोग

जो कोई अपनी पत्नी के साथ, जो अलग रह रही है, चाहे अलगाव की डिक्री के तहत या अन्यथा, उसकी सहमति के बिना संभोग करता है, उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जो दो साल से कम नहीं होगी, लेकिन जो इसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण.-इस धारा में, "यौन संभोग" का अर्थ धारा 63 के खंड (ए) से (डी) में उल्लिखित कोई भी कार्य होगा।

धारा 68 – अधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा संभोग

जो भी, होना— (ए) अधिकार की स्थिति में या प्रत्ययी रिश्ते में; या (बी) एक लोक सेवक; या (सी) जेल, रिमांड होम या किसी भी समय लागू कानून के तहत या उसके तहत स्थापित हिरासत के अन्य स्थान, या महिलाओं या बच्चों की संस्था का अधीक्षक या प्रबंधक; या (डी) किसी अस्पताल के प्रबंधन पर या अस्पताल के स्टाफ में रहते हुए, अपनी हिरासत में या अपने आरोप के तहत या परिसर में मौजूद किसी भी महिला को उसके साथ यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित या प्रलोभित करने के लिए ऐसी स्थिति या प्रत्ययी रिश्ते का दुरुपयोग करता है, ऐसा यौन संबंध जो बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी भी अवधि के लिए कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जो पांच साल से कम नहीं होगा, लेकिन जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्पष्टीकरण 1.—इस खंड में, "यौन संभोग" का अर्थ धारा 63 के खंड (ए) से (डी) में उल्लिखित कोई भी कार्य होगा। स्पष्टीकरण 2.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, धारा 63 का स्पष्टीकरण 1 भी लागू होगा। स्पष्टीकरण 3. – जेल, रिमांड होम या हिरासत के अन्य स्थान या महिलाओं या बच्चों की संस्था के संबंध में "अधीक्षक" में ऐसी जेल, रिमांड होम, स्थान या संस्था में कोई अन्य पद धारण करने वाला व्यक्ति शामिल है जिसके आधार पर ऐसा कोई व्यक्ति अपने कैदियों पर किसी भी अधिकार या नियंत्रण का प्रयोग कर सकता है। स्पष्टीकरण 4.- अभिव्यक्ति "अस्पताल" और "महिला या बच्चों की संस्था" का क्रमशः वही अर्थ होगा जो धारा 64 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में है।

धारा 69 – कपटपूर्ण साधन आदि का उपयोग करके संभोग करना

जो कोई, प्रवंचनापूर्ण साधनों द्वारा या किसी महिला को विवाह करने का वचन देकर, उसे पूरा करने के किसी आशय के बिना, उसके साथ मैथुन करता है, ऐसा मैथुन बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के ऐसी अवधि के कारावास से जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा । प्रवंचनापूर्ण साधनों, आदि का प्रयोग करके मैथुन । स्पष्टीकरण "प्रवंचनापूर्ण साधनों" में, नियोजन या प्रोन्नति, या पहचान छिपाकर विवाह करने के लिए उत्प्रेरणा या उनका मिथ्या वचन सम्मिलित है।

धारा 70 – सामूहिक बलात्कार

(1) जहां किसी महिला से, एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य करते हुए बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध किया है और वह ऐसी अवधि के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भीदंडनीय होगा : परंतु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा : परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा ।
(2) जहां अठारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य करते हुए, बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध किया है और वह आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत है, और जुर्माने से, या मृत्युदंड से, दंडनीय होगा : परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा : परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा ।

धारा 71 – बार बार अपराध करने वालों के लिए सजा

जो कोई भी पहले धारा 63 या धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और बाद में उक्त धाराओं में से किसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है, उसे आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा जिसका अर्थ होगा उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास, या मृत्युदंड।

धारा 72 – कुछ अपराधों आदि के पीड़ित की पहचान का खुलासा

(1) जो कोई, किसी नाम या अन्य बात को, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है, जिसके विरुद्ध धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 या धारा 68 या धारा 69 या धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया पाया गया है, मुद्रित या प्रकाशित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) उपधारा (1) की किसी भी बात का विस्तार, किसी नाम या अन्य बात के मुद्रण या प्रकाशन पर, यदि उससे पीड़ित व्यक्ति की पहचान हो सकती है, तब नहीं होता है जब ऐसा मुद्रण या प्रकाशन- (क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के या ऐसे अपराध का अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के, जो ऐसे अन्वेषण के प्रयोजन के लिए स‌द्भावपूर्वक कार्य करता है, द्वारा या उसके लिखित आदेश के अधीन किया जाता है; या (ख) पीड़ित व्यक्ति द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है; या (ग) जहां पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है या वह शिशु या विकृत चित्त है, वहां, पीड़ित व्यक्ति के निकट संबंधी द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है : परन्तु निकट संबंधी द्वारा कोई भी ऐसा प्राधिकार, किसी मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन के अध्यक्ष या सचिव, चाहे उसका जो भी नाम हो, से भिन्न किसी अन्य व्यक्तिको नहीं दिया जाएगा । स्पष्टीकरण इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन" से केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में मान्यताप्राप्त कोई समाज कल्याण संस्था या संगठन अभिप्रेत है।

धारा 73 – न्यायालय की कार्यवाही से संबंधित किसी भी सामग्री को बिना अनुमति के छापना या प्रकाशित करना

जो कोई धारा 72 में निर्दिष्ट किसी अपराध के संबंध में किसी न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही के संबंध में किसी भी मामले को ऐसे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना मुद्रित या प्रकाशित करेगा, उसे एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। जुर्माना भी देना होगा. स्पष्टीकरण.-किसी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन इस धारा के अर्थ में अपराध नहीं है।

धारा 74 – महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग

जो कोई, किसी महिला की लज्जा भंग करने के आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि उसके द्वारा वह उसकी लज्जा भंग करेगा, उस महिला पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा ।

धारा 75 – यौन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न के लिए सजा

(1) कोई पुरुष, निम्नलिखित कृत्यों में से कोई कृत्य, अर्थात् :-
(i) शारीरिक स्पर्श और अग्रक्रियाएं करता है, जिनमें अवांछनीय और स्पष्ट लैंगिक संबंध बनाने का प्रस्ताव अंतर्वलित है; या
(ii) लैंगिक स्वीकृति के लिए कोई मांग या अनुरोध करता है; या
(iii) किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य दिखाता है; या
(iv) लैंगिक आभासी टिप्पणियां करता है, तो वह लैंगिक उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा ।
(2) कोई पुरुष, जो उपधारा (1) के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) में विनिर्दिष्ट अपराध करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(3) कोई पुरुष, जो उपधारा (1) के खंड (iv) में विनिर्दिष्ट अपराध करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग । लैंगिक उत्पीड़न

धारा 76 – महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

जो कोई, किसी महिला को विवस्त्र करने या निर्वस्त्र होने के लिए बाध्य करने के आशय से उस पर हमला करता है या उसके प्रति आपराधिक बल का प्रयोग करता है या ऐसे कृत्य का दुष्प्रेरण करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

धारा 77 – ताक झांक

जो कोई, किसी निजी कार्य में लगी हुई किसी महिला को, उन परिस्थितियों में, जिनमें वह प्रायः यह प्रत्याशा करती है कि उसे देखा नहीं जा रहा है, एकटक देखता है याउस कृत्य में लिप्त व्यक्ति या उस कृत्य में लिप्त व्यक्ति के कहने पर कोई अन्य व्यक्ति उसका चित्र खींचता है या उस चित्र को प्रसारित करता है, तो प्रथम दोषसि‌द्धि पर, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती किसी दोषसि‌द्धि पर, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । स्पष्टीकरण 1-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "निजी कार्य" के अंतर्गत ताकने का कोई ऐसा कृत्य आता है जो ऐसे किसी स्थान में किया जाता है, जिसके संबंध में, परिस्थितियों के अधीन, युक्तियुक्त रूप से यह प्रत्याशा की जाती है कि वहां एकांतता होगी और जहां कि पीड़िता के जननांगों, नितंबों या वक्षस्थलों को अभिदर्शित किया जाता है या केवल अधोवस्त्र से ढका जाता है या जहां पीड़िता किसी शौचघर का प्रयोग कर रही है; या जहां पीड़िता ऐसा कोई लैंगिक कृत्य कर रही है जो ऐसे प्रकार का नहीं है जो साधारणतया सार्वजनिक तौर पर किया जाता है। स्पष्टीकरण 2-जहां पीड़िता, चित्रों या किसी अभिनय के चित्र को खींचने के लिए सहमति देती है, किन्तु अन्य व्यक्तियों को उन्हें प्रसारित करने की सहमति नहीं देती है और जहां उस चित्र या अभिनय का प्रसारण किया जाता है वहां ऐसे प्रसारण को इस धारा के अधीन अपराध माना जाएगा ।

धारा 78 – पीछा करना

(1) ऐसा कोई पुरुष, जो-
(i) किसी महिला का, उससे व्यक्तिगत अन्योन्यक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस महिला द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किए जाने के बावजूद, बारंबार पीछा करता है और स्पर्श करता है या स्पर्श करने का प्रयत्न करता है; या
(ii) किसी महिला द्वारा इंटरनेट, ई-मेल या किसी अन्य प्ररूप की इलैक्ट्रानिक संसूचना का प्रयोग किए जाने को मानीटर करता है, पीछा करने का अपराध करता है: परंतु ऐसा आचरण पीछा करने की कोटि में नहीं आएगा, यदि वह पुरुष, जो ऐसा करता है, यह साबित कर देता है कि
(i) ऐसा कार्य अपराध के निवारण या पता लगाने के प्रयोजन के लिए किया गया था और पीछा करने वाले अभियुक्त पुरुष को राज्य द्वारा उस अपराध के निवारण और पता लगाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था; या
(ii) ऐसा कार्य किसी विधि के अधीन किया गया था या किसी विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा अधिरोपित किसी शर्त या अपेक्षा का पालन करने के लिए किया गया था या
(iii) विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा आचरण युक्तियुक्त और न्यायोचित था ।(iii) विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा आचरण युक्तियुक्त और न्यायोचित था ।
(2) जो कोई, पीछा करने का अपराध कारित करता है, तो प्रथम दोषसि‌द्धि पर, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती किसी दोषसि‌द्धि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी,

धारा 79 – किसी महिला की गरिमा का अपमान करने के उद्देश्य से शब्द, इशारा या कार्य

जो कोई, किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहता है, कोई ध्वनि या अंगविक्षेप करता है, या कोई वस्तु किसी रूप में प्रदर्शित करता है, इस आशय से कि ऐसी महिला द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाए, या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाए, या ऐसी महिला की एकान्तता का अतिक्रमण करता है, वह साधारण कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दण्डित किया जाएगा ।

धारा 80 – दहेज हत्या

(1) जहां किसी महिला की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति द्वारा या उसके पति के किसी नातेदार द्वारा, दहेज की किसी मांग के लिए, या उसके संबंध में, उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था, वहां ऐसी मृत्यु को "दहेज मृत्यु" कहा जाएगा, और ऐसा पति या नातेदार उसकी मृत्यु कारित करने वाला समझा जाएगा । स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "दहेज" का वही अर्थ है, जो दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 में है।
(2) जो कोई दहेज मृत्यु कारित करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ।

धारा 81 – किसी व्यक्ति द्वारा धोखे से वैध विवाह का विश्वास पैदा कर सहवास करना

प्रत्येक पुरुष, किसी ऐसी महिला को, जो विधिपूर्वक उससे विवाहित न हो, प्रवंचना से यह विश्वास कारित कराता है कि वह विधिपूर्वक उससे विवाहित है और इस विश्वास में उस महिला से, अपने साथ सहवास या मैथुन कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

धारा 82 – पति या पत्नी के जीवनकाल के दौरान दोबारा शादी करना

(1) जो कोई, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए ऐसी दशा में विवाह करता है जिसमें ऐसा विवाह इस कारण से शून्य है कि वह ऐसे पति या पत्नी के जीवनकाल में होता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । अपवाद-इस उपधारा का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति पर नहीं है, जिसका ऐसे पति या पत्नी के साथ विवाह सक्षम अधिकारिता के न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया है, और न ही किसी ऐसे व्यक्ति पर है, जो पूर्व पति या पत्नी के जीवनकाल में विवाह कर लेता है, यदि ऐसा पति या पत्नी उस पश्चात्वर्ती विवाह के समय ऐसे व्यक्ति से सात वर्ष तक निरन्तर दूर रहा है, और उस समय के भीतर ऐसे व्यक्ति द्वारा यह नहीं सुना गया है कि वह जीवित है, परन्तु यह तब जब कि ऐसा पश्चात्वर्ती विवाह करने वाला व्यक्ति उस विवाह के होने से पूर्व उस व्यक्ति को, जिसके साथ ऐसा विवाह होता है, तथ्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी, जहां तक कि उनका ज्ञान उसको हो, से अवगत करा दे ।
(2) जो कोई, अपने पूर्व विवाह के तथ्य को उस व्यक्ति से छिपाकर, उससे पश्चात्वर्तीविवाह करता है, वह उपधारा (1) के अधीन अपराध करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

धारा 83 – वैध विवाह के बिना धोखे से विवाह समारोह संपन्न हुआ

जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्ण इरादे से, यह जानते हुए भी कि उसने कानूनी तौर पर शादी नहीं की है, शादी की रस्म पूरी करेगा, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही उसे दंडित भी किया जाएगा। जुर्माना लगाया जा सकता है.

धारा 84 – किसी विवाहित महिला को आपराधिक इरादे से फुसलाना या ले जाना या हिरासत में रखना

जो कोई किसी ऐसी महिला को, जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी है और जिसके बारे में वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है, इस इरादे से ले जाता है या फुसलाता है कि वह किसी भी व्यक्ति के साथ अवैध संबंध बना सकती है, या उस इरादे से ऐसी किसी भी चीज़ को छुपाता है या हिरासत में रखता है। महिला को दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 85 – किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार उसके साथ क्रूरता करता है

जो कोई, किसी महिला का पति या पति का नातेदार होते हुए, ऐसी महिला के प्रति क्रूरता करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

धारा 86 – क्रूरता की परिभाषा

धारा 85 के प्रयोजनों के लिए, "क्रूरता" का अर्थ है- (ए) कोई भी जानबूझकर किया गया आचरण जो ऐसी प्रकृति का हो जिससे महिला को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया जा सके या महिला के जीवन, अंग या स्वास्थ्य (चाहे मानसिक या शारीरिक) को गंभीर चोट या खतरा हो; या (बी) महिला का उत्पीड़न जहां ऐसा उत्पीड़न उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को किसी संपत्ति या मूल्यवान सुरक्षा की किसी भी गैरकानूनी मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से होता है या उसके या उससे संबंधित किसी भी व्यक्ति द्वारा इसे पूरा करने में विफलता के कारण होता है।

धारा 87 – अपहरण, अपहरण या महिला को शादी के लिए मजबूर करने के लिए प्रेरित करना, आदि

जो कोई, किसी महिला का व्यपहरण या अपहरण उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए उस महिला को विवश करने के आशय से या वह विवश की जाएगी, यह सम्भाव्य जानते हुए या अनुचित संभोग करने के लिए उस महिला को विवश या विलुब्ध करने के लिए या वह महिला अनुचित संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध की जाएगी यह संभाव्य जानते हुए करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और जो कोई, किसी महिला को किसी अन्य व्यक्ति से अनुचित संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या वह विवश या विलुब्ध की जाएगी यह संभाव्य जानते हुए इस संहिता में यथापरिभाषित आपराधिक अभित्रास द्वारा या प्राधिकार के दुरुपयोग या विवश करने के अन्य साधन द्वारा उस महिला को किसी स्थान से जाने को उत्प्रेरित करता है, वह भी पूर्वोक्त प्रकार से दण्डित किया जाएगा ।

धारा 88 – गर्भपात का कारण बनना

जो कोई, गर्भवती महिला का स्वेच्छया गर्भपात कारित करता है, यदि ऐसा गर्भपात उस महिला का जीवन बचाने के प्रयोजन से स‌द्भावपूर्वक कारित न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, और यदि वह महिला स्पन्दनगर्भा हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । गर्भपात कारित करना । स्पष्टीकरण जो महिला स्वयं अपना गर्भपात कारित करती है, वह इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत आती है ।

धारा 89 – महिला की सहमति के बिना गर्भपात करना

जो कोई भी महिला की सहमति के बिना धारा 88 के तहत अपराध करेगा, चाहे महिला जल्दी ही बच्चे पैदा कर रही हो या नहीं, उसे आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है। और जुर्माना भी देना होगा।

धारा 90 – गर्भपात कराने के इरादे से किए गए कार्य के कारण हुई मृत्यु

(1) जो कोई, किसी गर्भवती महिला का गर्भपात कराने के इरादे से, ऐसा कोई कार्य करेगा जिससे ऐसी महिला की मृत्यु हो जाए, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, और उसे दंडित किया जाएगा। जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(2) जहां उप-धारा (1) में निर्दिष्ट कार्य महिला की सहमति के बिना किया जाता है, तो आजीवन कारावास या उक्त उप-धारा में निर्दिष्ट दंड से दंडनीय होगा। स्पष्टीकरण.-इस अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी को पता हो कि उसके कार्य से मृत्यु होने की संभावना है।

धारा 91 – बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु का कारण बनने के इरादे से किया गया कार्य

जो कोई किसी बच्चे के जन्म से पहले उस बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने या उसके जन्म के बाद उसे मरने से रोकने के इरादे से कोई कार्य करता है, और ऐसे कार्य के द्वारा उस बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकता है, या ऐसा करता है। उसके जन्म के बाद मृत्यु हो जाती है, यदि ऐसा कार्य मां के जीवन को बचाने के उद्देश्य से सद्भावना से नहीं किया गया है, तो उसे दस साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों में से किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जा सकता है। दोनों।

धारा 92 – गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आने वाले अजन्मे बच्चे की मृत्यु का कारण बनना

जो कोई ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है, कि यदि उसने मृत्यु कारित की तो वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, और ऐसे कार्य से किसी अजन्मे बच्चे की मृत्यु कारित करता है, तो उसे एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा। दस साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी देना होगा। रेखांकन ए, यह जानते हुए कि उससे एक गर्भवती महिला की मृत्यु होने की संभावना है, ऐसा कार्य करता है, जिससे यदि महिला की मृत्यु होती, तो वह गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता। स्त्री घायल तो होती है, पर मरती नहीं; लेकिन इससे उसके गर्भ में पल रहे एक अजन्मे बच्चे की मृत्यु हो जाती है। ए इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है। बच्चों के विरुद्ध अपराध के बारे में

धारा 93 – बारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे को माता पिता या उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति द्वारा एक्सपोज़र और परित्याग

जो कोई बारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे का पिता या माता होते हुए, या ऐसे बच्चे की देखभाल करते हुए, ऐसे बच्चे को पूरी तरह से त्यागने के इरादे से किसी भी स्थान पर उजागर करेगा या छोड़ देगा, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा। या तो एक अवधि के लिए विवरण जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों के साथ। स्पष्टीकरण.-इस धारा का उद्देश्य अपराधी पर हत्या या गैर इरादतन हत्या, जैसा भी मामला हो, के मुकदमे को रोकना नहीं है, यदि जोखिम के परिणामस्वरूप बच्चे की मृत्यु हो जाती है।

धारा 94 – मृत शरीर के गुप्त निपटान द्वारा जन्म को छिपाना

जो कोई, किसी बच्चे के शव को गुप्त रूप से दफनाकर या अन्यथा निपटान करके, चाहे वह बच्चा उसके जन्म से पहले या बाद में या जन्म के दौरान मर गया हो, जानबूझकर ऐसे बच्चे के जन्म को छिपाएगा या छिपाने का प्रयास करेगा, उसे दोनों में से किसी भी तरह के कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसकी अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 95 – अपराध करने के लिए बच्चे को काम पर रखना, नियोजित करना या नियुक्त करना

जो कोई भी अपराध करने के लिए अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को काम पर रखता है, नियोजित करता है या संलग्न करता है, उसे उस अपराध के लिए कारावास या जुर्माने से दंडित किया जाएगा जैसे कि अपराध ऐसे व्यक्ति द्वारा स्वयं किया गया हो। br> स्पष्टीकरण.-यौन शोषण या अश्लील साहित्य के लिए किसी बच्चे को काम पर रखना, नियोजित करना, संलग्न करना या उपयोग करना इस धारा के अर्थ में शामिल है।

धारा 96 – बच्चे की प्राप्ति

जो कोई, किसी भी तरह से, अठारह वर्ष से कम आयु के किसी बच्चे को किसी स्थान से जाने या कोई कार्य करने के लिए इस आशय से प्रेरित करेगा कि ऐसा बच्चा अठारह वर्ष से कम आयु का हो सकता है, या यह जानते हुए कि ऐसा होने की संभावना है। यदि किसी बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाएगा या बहकाया जाएगा तो उसे कारावास की सजा होगी, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

धारा 97 – दस साल से कम उम्र के बच्चे का अपहरण या उससे चोरी करने के इरादे से अपहरण करना

जो कोई दस वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे का अपहरण या अपहरण ऐसे बच्चे से बेईमानी से कोई चल संपत्ति लेने के इरादे से करेगा, उसे सात साल तक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, और उसे दंडित किया जाएगा। जुर्माना भी देना होगा.

धारा 98 – वेश्यावृत्ति आदि के लिए बच्चे को बेचना

जो कोई, किसी शिशु को इस आशय से कि ऐसा शिशु किसी भी आयु में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अनुचित संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया जाए या उपयोग किया जाए या यह संभाव्य जानते हुए कि ऐसा शिशु किसी भी आयु में ऐसे प्रयोजन के लिए काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, बेचता है, भाड़े पर देता है या अन्यथा व्ययनित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा । स्पष्टीकरण 1 जब अठारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला को, किसी वेश्या या किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को, जो वेश्याघर चलाता है या उसका प्रबंध करता है, बेचा जाए, भाड़े पर दिया जाए या अन्यथा व्ययनित किया जाए, तब इस प्रकार ऐसी महिला को व्ययनित करने वाले व्यक्ति के बारे में, जब तक कि प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने उसको इस आशय से व्ययनित किया है कि वह वेश्यावृत्ति के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाई जाएगी । स्पष्टीकरण 2-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "अनुचित संभोग" से ऐसे व्यक्तियों के बीच मैथुन अभिप्रेत है, जो विवाह द्वारा संयुक्त नहीं हैं, या ऐसे किसी संयोग या बन्धन से संयुक्त नहीं हैं जो यद्यपि विवाह की कोटि में तो नहीं आता तथापि उस समुदाय की, जिसके वे हैं या यदि वे भिन्न समुदायों के हैं तो ऐसे दोनों समुदायों की, वैयक्तिक विधि या रूढि द्वारा उनके बीच में विवाह-सदृश सम्बन्ध को मान्य किया जाता है।

धारा 99 – वेश्यावृत्ति आदि के लिए बच्चे को खरीदना

जो कोई अठारह वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को इस इरादे से खरीदता है, किराये पर लेता है या अन्यथा कब्ज़ा प्राप्त करता है कि ऐसे व्यक्ति को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध संबंध या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा। या यह जानते हुए कि ऐसे बच्चे को किसी भी उम्र में नियोजित किया जाएगा या ऐसे किसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा, उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी जो सात साल से कम नहीं होगी लेकिन जिसे चौदह साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। स्पष्टीकरण 1.-कोई भी वेश्या या वेश्यालय चलाने या प्रबंधित करने वाला कोई भी व्यक्ति, जो अठारह वर्ष से कम आयु की महिला को खरीदता है, किराये पर लेता है या अन्यथा उसका कब्ज़ा प्राप्त करता है, जब तक कि विपरीत साबित न हो जाए, यह माना जाएगा कि उसने ऐसी महिला का कब्ज़ा प्राप्त कर लिया है। इरादा यह था कि उसका उपयोग वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से किया जाएगा। स्पष्टीकरण 2.-"अवैध संभोग" का वही अर्थ है जो धारा 96 में है।